ईरान- इजरायल युद्ध के बीच सरकार का बड़ा प्लान, बनाएगी ₹1000 करोड़ का वार इंश्योरेंस फंड, रिस्क कवर में मिलेगी मदद

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार पर असर पड़ रहा है. होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा कवर महंगा और मुश्किल हो गया है क्योंकि ग्लोबल रीइंश्योरेंस कंपनियां पीछे हट गई हैं. इस स्थिति में भारत सरकार एक विशेष फंड बनाने पर विचार कर रही है.

इस कदम से भारत के व्यापार और सप्लाई चेन को स्थिरता मिल सकती है.

War Risk Insurance: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण ग्लोबल मैरिटाइम ट्रेड पर दबाव बढ़ गया है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए रिस्क काफी बढ़ गया है. इस वजह से दुनिया की बड़ी रीइंश्योरेंस कंपनियों ने कवर देना बंद कर दिया है. इससे भारत के लिए माल ढुलाई महंगी और मुश्किल हो रही है. इसी स्थिति को देखते हुए सरकार एक खास फंड बनाने पर विचार कर रही है. यह फंड इंश्योरेंस कंपनियों को वार रिस्क कवर देने में मदद करेगा. इससे भारत आने वाले जरूरी सामान की सप्लाई जारी रखने में मदद मिल सकती है.

सरकार क्यों बना रही है नया फंड

सरकार इस फंड को एक बैकअप सिस्टम के रूप में तैयार करना चाहती है. जब ग्लोबल रीइंश्योरेंस कंपनियां कवर देने से पीछे हट रही हैं तब यह फंड बीमा कंपनियों को सहारा देगा. वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव का इवोल्यूशन कर रहा है. इसका मकसद यह है कि जहाजों को हाई रिस्क वाले इलाकों में भी बीमा कवर मिल सके. इससे व्यापार पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सकेगा. खासतौर पर होर्मुज रूट से आने वाले कार्गो को राहत मिलेगी.

होर्मुज रूट और व्यापार पर असर

ईरान से जुड़े तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेटमें जोखिम काफी बढ़ गया है. यह रूट दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई मार्गों में से एक है. यहां से गुजरने वाले जहाजों का बीमा महंगा हो गया है. कई मामलों में बीमा मिलना भी मुश्किल हो रहा है. इसका असर भारत के आयात पर पड़ रहा है. खासकर कच्चे तेल और जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

पहले भी बन चुका है ऐसा पूल

इस तरह का एक सिस्टम पहले भी बनाया जा चुका है. साल 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध के बाद मरीन कार्गो एक्सक्लूडेड टेरिटरीज पूल बनाया गया था. इसे GIC Re ने मैनेज किया था. इस पूल के जरिए उन देशों से आने वाले माल को कवर दिया गया जहां ग्लोबल बीमा कंपनियां कवर नहीं दे रही थीं. इस मॉडल को ही अब फिर से अपनाने पर विचार हो रहा है.

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कैसा हो सकता है नया फंड

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस नए फंड का साइज करीब 1000 करोड़ रुपये हो सकता है. इसे सरकारी बीमा कंपनियों के जरिए ऑपरेट किया जा सकता है. GIC Re इसमें अहम भूमिका निभा सकती है. यह फंड कच्चे तेल समेत अन्य जरूरी कार्गो को भी कवर दे सकता है. हालांकि अंतिम फैसला तभी लिया जाएगा जब होर्मुज रूट सामान्य रूप से खुल जाएगा. इस कदम से भारत के व्यापार और सप्लाई चेन को स्थिरता मिल सकती है.