PSLV-C62 EOS-N1: आसमान तक पहुंचा रॉकेट, लेकिन मंजिल रह गई दूर; चौथे चरण में कक्षा तक नहीं पहुंचा सैटेलाइट
ISRO का PSLV-C62 मिशन अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया. मिशन के तहत Earth observation satellite EOS-N1 (अन्वेषा) और अन्य उपग्रहों को sun-synchronous orbit में स्थापित किया जाना था. हालांकि रॉकेट ने उड़ान भरी, लेकिन अंतिम चरण में सैटेलाइट को कक्षा में सही तरह से इंजेक्ट नहीं किया जा सका.
ISRO PSLV-C62 EOS-N1: भारत ने साल 2026 की शुरुआत अंतरिक्ष में एक नई उड़ान के साथ की है. सोमवार की सुबह जैसे ही रॉकेट ने जमीन छोड़ी, श्रीहरिकोटा के आसमान में भारत की वैज्ञानिक ताकत फिर चमक उठी. यह सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं था, बल्कि आने वाले सालों की अंतरिक्ष योजनाओं का पहला कदम था. लॉन्च के शुरुआती पल उम्मीदों से भरे थे. लेकिन मिशन के आखिरी और सबसे अहम हिस्से में दिक्कत सामने आई. चौथे चरण के दौरान सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में सही तरह से स्थापित नहीं किया जा सका.
इस वजह से पृथ्वी पर नजर रखने वाला सैटेलाइट EOS-N1 अपनी निर्धारित sun-synchronous orbit में नहीं पहुंच पाया. मिशन को वह Final confirmation signal नहीं मिला, जो सैटेलाइट के सफल अलग होने को दर्शाता है. Indian Space Research Organisation ने बताया कि मिशन से जुड़ा सारा डेटा सुरक्षित है और अब तकनीकी जांच की जा रही है. इस मिशन को आंशिक रूप से पूरा माना जा रहा है.
PSLV-C62 मिशन असफल
ISRO का PSLV-C62 मिशन अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया. मिशन के तहत Earth observation satellite EOS-N1 (अन्वेषा) और अन्य उपग्रहों को sun-synchronous orbit में स्थापित किया जाना था. हालांकि रॉकेट ने उड़ान भरी, लेकिन अंतिम चरण में सैटेलाइट को कक्षा में सही तरह से इंजेक्ट नहीं किया जा सका. रॉकेट का चौथा चरण यानी PS4 अंतरिक्ष में बेहद नाजुक प्रक्रिया से गुजर रहा था. इसे सैटेलाइट को 505 किलोमीटर ऊंची कक्षा में धकेलना था. इसी दौरान मिशन कंट्रोल को वह पुष्टि संकेत नहीं मिला, जिसे “सेपरेशन” कहा जाता है. यहीं से साफ हो गया कि मिशन अपने अंतिम लक्ष्य से चूक गया है.
2026 का पहला अंतरिक्ष मिशन
यह भारत का साल 2026 का पहला अंतरिक्ष मिशन है. इस मिशन के जरिए पृथ्वी पर नजर रखने वाला सैटेलाइट और कुल 14 अन्य छोटे उपग्रह कक्षा में भेजे गए. यह PSLV रॉकेट की अब तक की 64वीं उड़ान थी. यह लॉन्च सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर हुआ. रॉकेट ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre से उड़ान भरी. लॉन्च से पहले 22 घंटे 30 मिनट की उलटी गिनती यानी काउंटडाउन चला. ISRO के वैज्ञानिकों ने बताया कि सभी सिस्टम सामान्य थे.
सैटेलाइट क्या करेगा
इस मिशन का मुख्य सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ है, जिसे EOS-N1 भी कहा जाता है. यह एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है.
इसका काम धरती की तस्वीरें लेना, मौसम और पर्यावरण से जुड़ा डेटा जुटाना है. यह सैटेलाइट धरती से करीब 100 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया गया है.
दूसरे देशों के सैटेलाइट भी शामिल
इस मिशन में भारत के साथ-साथ दूसरे देशों के सैटेलाइट भी भेजे गए. इनमें थाईलैंड और ब्रिटेन के सैटेलाइट शामिल हैं. इसके अलावा 13 और छोटे उपग्रह भी अलग-अलग ग्राहकों के लिए कक्षा में छोड़े गए. यह काम ISRO की Commercial branch न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड ने संभाला. लॉन्च के करीब दो घंटे बाद ISRO के वैज्ञानिकों ने रॉकेट के चौथे चरण को अलग किया. इसी के साथ एक खास कैप्सूल का परीक्षण किया गया.
यह कैप्सूल स्पेन की एक स्टार्टअप कंपनी ने बनाया है और इसका वजन 25 किलो है. इसे धरती के वातावरण में वापस लाने का अभ्यास किया गया. कैप्सूल और रॉकेट का हिस्सा प्रशांत महासागर में गिरा. PSLV अब तक 63 मिशन पूरे कर चुका है. इसी रॉकेट ने चंद्रयान-1, मंगल मिशन और आदित्य एल-1 जैसे बड़े मिशन पूरे किए हैं. पिछली उड़ान मई 2025 में पूरी तरह सफल नहीं रही थी. ऐसे में यह मिशन इसरो के लिए भरोसा लौटाने वाला साबित हुआ.
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