क्या है सरकार का नया स्मार्टफोन सिक्योरिटी ‘सोर्स कोड रूल’, जानें यूजर्स को क्या हो सकता है फायदा
भारत सरकार स्मार्टफोन सिक्योरिटी को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. प्रस्तावित नए नियमों से ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा लीक और प्राइवेसी उल्लंघन पर लगाम लग सकती है. जानिए इन बदलावों से आम मोबाइल यूजर्स को कैसे ज्यादा सुरक्षा, बेहतर कंट्रोल और भरोसेमंद अपडेट्स का फायदा मिल सकता है.
Indian Government and Smartphone Security Rule: भारत सरकार स्मार्टफोन की सुरक्षा को लेकर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से मोबाइल सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड शेयर करने और कई अहम तकनीकी बदलाव करने की बात कर रहा है. सरकार जिन नए नियमों पर विचार कर रही है, उनका सबसे बड़ा फायदा आम मोबाइल यूजर्स को मिल सकता है. आज के समय में जब ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर ठगी, डेटा लीक और डिजिटल जासूसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में ये प्रस्ताव यूजर्स के लिए सुरक्षा की एक मजबूत दीवार बन सकते हैं.
अगर कंपनियों से उनके सॉफ्टवेयर की गहराई से जांच कराई जाती है, तो फोन में मौजूद तकनीकी खामियों और मैलवेयर को समय रहते पकड़ा जा सकेगा, जिससे बैंकिंग ऐप्स, पर्सनल चैट्स, फोटो, लोकेशन और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रह सकेगी.
बगैर परमिशन के कैमरा और माइक्रोफोन
इन नियमों का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि मोबाइल ऐप्स द्वारा बैकग्राउंड में कैमरा और माइक्रोफोन के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाई जा सकेगी. अक्सर देखा गया है कि कई ऐप्स बिना यूजर की जानकारी के कैमरा, माइक या दूसरे सेंसर एक्सेस करते रहते हैं, जिससे निजता पर खतरा पैदा होता है. नए प्रस्तावों के तहत यूजर्स को यह स्पष्ट नियंत्रण मिल सकता है कि कौन सा ऐप क्या एक्सेस करेगा, जिससे प्राइवेसी उल्लंघन के मामले कम होंगे और लोगों का अपने फोन पर भरोसा बढ़ेगा.
प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स पर रोक
सरकार की योजना प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स को हटाने की सुविधा देने की भी है, जो आम यूजर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है. ज्यादातर स्मार्टफोन्स में ऐसे कई ऐप पहले से मौजूद होते हैं जिन्हें न तो इस्तेमाल किया जाता है और न ही हटाया जा सकता है. अगर इन्हें डिलीट करने की आजादी मिलती है, तो फोन की स्टोरेज बचेगी, परफॉर्मेंस बेहतर होगी और गैर-जरूरी डेटा कलेक्शन भी कम हो जाएगा, जिससे यूजर का अनुभव साफ और सुरक्षित बनेगा.
अपडेट पर हो सख्त निगरानी
इसके अलावा, सॉफ्टवेयर अपडेट और सिक्योरिटी पैच को लेकर सख्त निगरानी से यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद अपडेट मिल सकते हैं. कई बार जल्दबाजी में आए अपडेट फोन को स्लो कर देते हैं या नए बग्स ले आते हैं. अगर अपडेट्स को पहले ठीक से जांचा जाए, तो ऐसी समस्याओं की संभावना घटेगी और यूजर्स को ज्यादा स्थिर और सुरक्षित सिस्टम मिलेगा. साथ ही, ऑटोमैटिक मैलवेयर स्कैनिंग जैसी व्यवस्था से फर्जी और खतरनाक ऐप्स अपने आप पहचान में आ सकेंगे, जिससे कम टेक्निकल समझ रखने वाले यूजर्स भी सुरक्षित रह पाएंगे.
सोर्स कोड शेयर करना क्यों बना विवाद का कारण?
इन नए प्रस्तावों में सबसे संवेदनशील मुद्दा है सोर्स कोड तक सरकारी पहुंच. सोर्स कोड वह मूल प्रोग्रामिंग भाषा होती है, जिस पर मोबाइल का पूरा सिस्टम चलता है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को यह कोड भारत में नामित सरकारी लैब्स में जांच के लिए उपलब्ध कराना होगा. टेक कंपनियां इसे असंभव बता रही हैं. ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (MAIT) ने एक गोपनीय दस्तावेज में कहा है कि सोर्स कोड साझा करना सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों के लिहाज से खतरे भरा है. MAIT का कहना है कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया या अफ्रीका जैसे किसी भी बड़े बाजार में ऐसी शर्तें लागू नहीं हैं.
सरकार और कंपनियों के बीच पहले भी टकराव
यह पहली बार नहीं है जब भारत सरकार और टेक कंपनियों के बीच मतभेद सामने आए हों. हाल ही में सरकार को एक सरकारी साइबर सिक्योरिटी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लेना पड़ा था, क्योंकि इसे लेकर निगरानी की आशंका जताई गई थी. हालांकि, सुरक्षा कैमरों के मामले में सरकार ने विदेशी कंपनियों की लॉबिंग को नजरअंदाज करते हुए सख्त टेस्टिंग नियम लागू किए थे.
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