Silver ETF में निवेशकों का बदला मूड! दो साल बाद 826 करोड़ रुपये का दिखा आउटफ्लो, क्या रहा ट्रिगर
चांदी की कीमतों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सिल्वर ETF में मुनाफावसूली शुरू कर दी है. AMFI के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में इन फंड्स से करीब 826 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई, जो दो साल से ज्यादा समय बाद पहला आउटफ्लो है. इससे पहले जनवरी में सिल्वर ETF में रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला था.
Silver ETF outflow: चांदी ने बीते महीनों में निवेशकों की जमकर कमाई कराई है. ऑल टाइम हाई पार करने के बावजूद सिल्वर में लोगों का निवेश जारी रहा. लेकिन अब माहौल बदलता नजर आ रहा है. लंबे समय तक मजबूत निवेश देखने वाले सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Silver ETF) में फरवरी के दौरान बड़ी निकासी दर्ज की गई है. दो साल से ज्यादा समय बाद इन फंड्स से पैसे बाहर निकले हैं. बाजार के जानकार इसे हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की सतर्कता से जोड़कर देख रहे हैं.
दो साल बाद सिल्वर ETF से निकासी
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सिल्वर ETF से करीब 826 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई. इससे पहले जनवरी में इन फंड्स में रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला था. जनवरी में सिल्वर ETF में करीब 9,463 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था, जो इससे एक महीने पहले यानी दिसंबर 2025 के 3,962 करोड़ रुपये के निवेश से करीब 139 फीसदी ज्यादा था.
इस तरह जनवरी में तेज निवेश के बाद फरवरी में अचानक निकासी दर्ज होना बाजार में चर्चा का विषय बन गया है.
जनवरी में रिकॉर्ड निवेश, फरवरी में उलटा ट्रेंड
डेटा के मुताबिक फरवरी में सिल्वर ETF में 4,628 करोड़ रुपये का नया निवेश आया, लेकिन उसी दौरान 5,455 करोड़ रुपये की रिडेम्प्शन या निकासी हुई. इस वजह से कुल मिलाकर फरवरी में इन फंड्स से 826 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज हुआ. इससे पहले सिल्वर ETF में आखिरी बार नवंबर 2023 में करीब 19.98 करोड़ रुपये की निकासी देखी गई थी.
क्यों बदला निवेशकों का रुख
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ट्रेंड मुख्य रूप से सिल्वर की कीमतों में हालिया गिरावट के कारण देखने को मिला है. जनवरी के आखिर में चांदी की कीमतों में तेज करेक्शन आया था, जिसके बाद कई निवेशकों ने मुनाफा बुक करना बेहतर समझा.
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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब चांदी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं तो कई उद्योग इसकी खपत कम करने या सस्ते विकल्प जैसे कॉपर या एल्युमिनियम का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश करते हैं. ऐसी स्थिति में ऊंची कीमतों और संभावित मांग में बदलाव की आशंका भी निवेशकों को थोड़े समय के लिए सतर्क बना सकती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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