भारतीय बाजार के बाद US मार्केट भी लाल, Dow Jones 400 अंक तक टूटा, Gift Nifty फिसला; कहां पहुंचा क्रूड?

भारतीय बाजार में भारी गिरावट के बाद अमेरिकी शेयर बाजार भी दबाव में नजर आए. गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल सेंटिमेंट को और बिगाड़ दिया है. वाल स्ट्रीट के प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में खुलकर कारोबार करते हुए नजर आए. जानें गिफ्ट निफ्टी का क्या है हाल.

गिफ्ट निफ्टी सहित US मार्केट भी टूटा Image Credit: @Money9live

Global Selloff US Market Gift Nifty Crude: गुरुवार, 19 मार्च का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी उतार-चढ़ाव और नुकसान भरा साबित हुआ. दिनभर चली तेज बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी 3 फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुए, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई. खास बात यह रही कि यह गिरावट सिर्फ घरेलू कारणों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वैश्विक बाजारों में बनी कमजोरी का भी सीधा असर देखने को मिला. एक दिन पहले यानी 18 मार्च को ही संकेत मिल गए थे कि बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.

गिफ्ट निफ्टी में गिरावट और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी ने पहले ही नकारात्मक माहौल तैयार कर दिया था. यही ट्रेंड अगले दिन भी जारी रहा. भारतीय समयानुसार जब अमेरिकी बाजार खुले, तो वहां भी लाल निशान हावी रहा, जिसने ग्लोबल सेंटिमेंट को और कमजोर कर दिया.

लाल निशान में US मार्केट

वाल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज शुरुआती कारोबार में करीब 435 अंक यानी 0.94 फीसदी तक गिर गया था. हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन फिर भी यह लगभग 300 अंकों की गिरावट के साथ 45,900 के आसपास ट्रेड करता नजर आया. इसी तरह S&P 500 में भी करीब 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 6,595 के स्तर तक फिसल गया. टेक-हैवी नैस्डैक भी दबाव में रहा और लगभग 0.63 फीसदी गिरकर 22,000 के करीब कारोबार करता दिखा.

गिफ्ट निफ्टी का क्या हाल?

ग्लोबल संकेतों का असर गिफ्ट निफ्टी पर भी साफ दिखा. 19 मार्च की रात 9:30 बजे तक गिफ्ट निफ्टी करीब 85 अंक यानी 0.37 फीसदी की गिरावट के साथ 23,034 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. हालांकि यह गिरावट पिछले दिन के मुकाबले कुछ कम थी, जब इसमें 1 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी आई थी. बावजूद इसके, यह साफ संकेत है कि बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं.

कच्चा तेल कहां पहुंचा?

इस पूरी हलचल के बीच कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के मूड को प्रभावित करती रहीं. WTI क्रूड में करीब 2.25 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह रात 21:35 तक 98.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. वहीं, ब्रेंट क्रूड जो डे हाई में 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, उसमें कुछ गिरावट आई और यह करीब 109.3 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया. तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है, जिसका असर शेयर बाजारों पर पड़ना स्वाभाविक है. कुल मिलाकर घरेलू और वैश्विक दोनों ही कारकों ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है.

अमेरिकी बाजारों की कमजोरी, गिफ्ट निफ्टी के संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है. ऐसे माहौल में बाजार की दिशा आगे भी काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय संकेतों और कमोडिटी कीमतों पर निर्भर करती नजर आएगी.

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