भारत-रूस मिलकर बना रहे BRICScoin, जानिए क्या है ये नया फाइनेंशियल सिस्टम?
भारत और रूस के बीच बढ़ता आर्थिक तालमेल अब नई वित्तीय रणनीतियां, डिजिटल करेंसी और वैश्विक ताकत के समीकरण में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं. दोनों देश मिलकर डिजिटल नेशनल करेंसी और इंटर-गवर्नमेंट सेटलमेंट के लिए BRICScoin जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं.
भारत और रूस के रिश्ते एक बार फिर नए आर्थिक आयाम की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. ऐसे समय में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रही है, दोनों देश आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा आयोजित “From The Volga to The Ganges” फोरम में रूस-बेलारूस यूनियन स्टेट के स्टेट सेक्रेटरी सर्गेई ग्लेज्येव ने इस साझेदारी को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम बताया.
भारत-रूस व्यापार को लेकर क्या बोले ग्लेज्येव
ग्लेज्येव ने कहा कि भारत रूस का एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे को पूरक करती हैं. उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच व्यापार से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान किया जा चुका है और अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में काम चल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच वित्तीय बाजारों में कोई बड़ी बाधा नहीं है, लेकिन करेंसी कैपिटल से जुड़ी कुछ चुनौतियां हैं, जिनका समाधान ऐसे फोरम के जरिए संभव है.
ग्लेज्येव ने वैश्विक आर्थिक हालात पर बात करते हुए कहा कि मौजूदा समय में दुनिया जटिल दौर से गुजर रही है. उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह पूंजी बाजारों पर दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने इसे पुराने समय के ट्रेड वॉर जैसा बताया और कहा कि इस तरह की स्थिति वैश्विक संतुलन के लिए ठीक नहीं है.
BRICScoin को लाने की तैयारी
उन्होंने भारत की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, भारत तेजी से एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है, खासकर इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और मार्केट कैपिटलाइजेशन के क्षेत्र में. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर शिफ्ट होगा, जहां भारत और चीन अहम भूमिका निभाएंगे.
ग्लेज्येव ने वित्तीय सिस्टम को आधुनिक बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि डिजिटल नेशनल करेंसी और इंटर-गवर्नमेंट सेटलमेंट के लिए BRICScoin जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. उनका मानना है कि इससे देशों के बीच लेन-देन आसान और सस्ता होगा.
उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे वित्तीय ढांचे की जरूरत है जहां किसी एक देश का दबदबा न हो. इसके लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा और फाइनेंशियल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना होगा. यह फोरम इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भारत और रूस के संबंधों को और मजबूत बना सकता है.
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