ITR भरने में कही आपने भी तो नहीं कर दी ये गलती, अटक जाएगा पूरा रिफंड का पैसा
अगर आप AY 2026-27 के लिए ITR दाखिल कर रहे हैं, तो पुराने टैक्स बकाया के कारण आपका इनकम टैक्स रिफंड एडजस्ट हो सकता है. रिटर्न भरने से पहले Outstanding Demand जरूर जांचें और धारा 245 के नोटिस का समय पर जवाब दें.
Highlights
- पुराने टैक्स बकाया से रिफंड एडजस्ट हो सकता
- धारा 245 नोटिस का समय पर जवाब दें
- आईटीआर पहले आउटस्टैंडिंग डिमांड जरूर जांचें हमेशा
अगर आप आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया है और टैक्स रिफंड की उम्मीद कर रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि आपका रिफंड पुराने टैक्स बकाया (Outstanding Tax Demand) के खिलाफ एडजस्ट किया जा सकता है. आयकर कानून के तहत विभाग को यह अधिकार है कि यदि किसी करदाता पर पिछले वर्षों का वैध टैक्स बकाया है, तो रिफंड जारी करने से पहले उस राशि को समायोजित कर सकता है.
ऐसी स्थिति में कई बार करदाता को पूरा रिफंड नहीं मिल पाता या रिफंड की राशि कम हो जाती है. इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले अपने पुराने टैक्स रिकॉर्ड और बकाया डिमांड की जांच करना बेहद जरूरी है.
कब होता है रिफंड का एडजस्टमेंट?
आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत आयकर विभाग किसी भी करदाता के रिफंड को पुराने टैक्स बकाया के साथ एडजस्ट कर सकता है. हालांकि, ऐसा करने से पहले विभाग को करदाता को सूचना देना और अपनी बात रखने का अवसर देना अनिवार्य होता है.
यदि विभाग की ओर से ई-फाइलिंग पोर्टल या पंजीकृत ईमेल पर धारा 245 का नोटिस भेजा जाता है, तो करदाता को तय समय सीमा के भीतर उसका जवाब देना चाहिए. यदि करदाता नोटिस का जवाब नहीं देता, तो विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर रिफंड एडजस्ट करने का फैसला ले सकता है.
नोटिस मिलने पर क्या करें?
यदि आपको धारा 245 के तहत नोटिस मिलता है, तो सबसे पहले उसमें दर्ज टैक्स डिमांड की जांच करें. यदि डिमांड सही है, तो उसे स्वीकार किया जा सकता है. लेकिन यदि आपको लगता है कि डिमांड गलत है, पहले ही चुका दी गई है या उसके खिलाफ अपील लंबित है, तो संबंधित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांचे किसी भी डिमांड को स्वीकार नहीं करना चाहिए. यदि रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो समय रहते उसे सुधारने से अनावश्यक वित्तीय नुकसान से बचा जा सकता है.
ITR दाखिल करने से पहले करें ये जरूरी जांच
रिटर्न भरने से पहले आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके “Outstanding Demand” सेक्शन जरूर देखें. यदि वहां कोई बकाया दिखाई देता है, तो उसकी स्थिति समझें और आवश्यक कार्रवाई करें. साथ ही फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्स भुगतान के रिकॉर्ड का भी मिलान करें.
कर विशेषज्ञों के अनुसार, सही जानकारी के साथ समय पर रिटर्न दाखिल करने और पुराने टैक्स विवादों का समाधान करने से रिफंड मिलने में देरी या कटौती जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. यदि किसी डिमांड को लेकर विवाद है, तो उसका जवाब निर्धारित समय के भीतर देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
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