ITR में हो गई है गलती, 31 जुलाई के बाद भी ऐसे कर सकते हैं रिटर्न में सुधार, जानें प्रोसेस

अगर आपने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 जुलाई से पहले ITR दाखिल किया है और बाद में कोई गलती मिलती है, तो उसे सुधारा जा सकता है. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत पात्र टैक्सपेयर रिवाइज्ड ITR दाखिल कर सकते हैं. आय, डिडक्शन, बैंक डिटेल और टैक्स क्रेडिट की जानकारी दोबारा जांचना जरूरी है.

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत पात्र टैक्सपेयर रिवाइज्ड ITR दाखिल कर सकते हैं. Image Credit: Money9

Revised ITR: अगर आपने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल कर दिया है, लेकिन बाद में उसमें कोई गलती या जानकारी छूट जाने का पता चला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इनकम टैक्स कानून ऐसे टैक्सपेयर्स को रिटर्न सुधारने का मौका देता है. इसके लिए रिवाइज्ड ITR दाखिल किया जा सकता है. हालांकि, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

रिवाइज्ड ITR क्या होता है

रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए टैक्सपेयर्स अपनी ओर से फाइल किए गए मूल ITR में हुई गलती को सुधार सकते हैं. इसमें इनकम की जानकारी छूट जाना, गलत डिडक्शन क्लेम करना या बैंक अकाउंट की गलत जानकारी देना जैसी गलतियां शामिल हो सकती हैं. इसके अलावा रिटर्न में रिपोर्टिंग से जुड़ी छोटी गलतियों को भी सुधारा जा सकता है. गलती को समय रहते ठीक करने से टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है और भविष्य में गलत जानकारी के कारण टैक्स नोटिस आने का जोखिम कम हो सकता है.

किन लोगों को रिवाइज्ड रिटर्न का मौका मिलता है

जानकारों के मुताबिक, अगर किसी टैक्सपेयर को ITR फाइल करने की आखिरी तारीख के बाद अपनी रिटर्न में गलती का पता चलता है, तो वह Section 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है. इसके लिए जरूरी है कि मूल ITR तय डेडलाइन के अंदर दाखिल की गई हो. रिवाइज्ड रिटर्न ई फाइलिंग पोर्टल के जरिए दाखिल की जा सकती है.

इन डॉक्यूमेंट को जरूर जांचें

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम और टैक्स से जुड़ी सभी जानकारी दोबारा जांच लेनी चाहिए. इसके लिए Form 16 में दर्ज आय को चेक करें. इसके साथ Annual Information Statement यानी AIS और Taxpayer Information Summary यानी TIS की जानकारी भी देखनी चाहिए. Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट को भी अपनी ITR से मिलाना जरूरी है. इन सभी दस्तावेजों में दी गई जानकारी के बीच किसी तरह का अंतर हो तो उसे पहले समझना और फिर रिटर्न में सही जानकारी भरना बेहतर है.

बार- बार ITR रिवाइज करने से बचें

टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार रिटर्न में गलती होने पर उसे सुधारना संभव है, लेकिन रिवाइज्ड ITR दाखिल करते समय पूरी जानकारी और दस्तावेजों की जांच जरूरी है. बार-बार रिटर्न में बदलाव करने या मूल रिटर्न और संशोधित रिटर्न में बडे़ अंतर होने पर टैक्स विभाग की ओर से ज्यादा जांच की जा सकती है. इसलिए रिवाइज्ड ITR दाखिल करने से पहले इनकम, डिडक्शन, टैक्स क्रेडिट और बैंक डिटेल जैसी सभी जानकारियों को ध्यान से जांच लेना चाहिए.

डेटा मैचिंग के दौर में क्यों जरूरी है सही ITR

टैक्स विभाग अब डेटा मैचिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. ऐसे में ITR में दी गई जानकारी का दूसरे टैक्स रिकॉर्ड से मेल खाना जरूरी हो गया है. Form 16, AIS, TIS और Form 26AS में मौजूद जानकारी से ITR में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जा सकता है. इसलिए टैक्सपेयर्स को रिटर्न में सही, पूरी और ट्रांसपेरेंट जानकारी देनी चाहिए. इससे भविष्य में टैक्स संबंधी परेशानी और नोटिस के जोखिम को कम किया जा सकता है.