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अगर USA-Iran के बीच हुआ सीजफायर तो सबसे पहले क्या-क्या होगा? आम लोगों को मिलेंगे ये फायदे

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की चर्चा तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि रविवार को डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. यदि ऐसा होता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, हवाई सेवाओं, गैस सप्लाई और भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है. जानिए सीजफायर के बाद क्या-क्या बदल सकता है.

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत. Image Credit: Canva/ Money9

US-Iran Ceasefire Impact : अमेरिका और ईरान के बीच 4 महीने से जारी तनाव के बीच रविवार को संभावित सीजफायर समझौते की चर्चा तेज है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि रविवार को डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. यदि युद्धविराम का आधिकारिक ऐलान होता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, हवाई सेवाओं, गैस सप्लाई और भारतीय शेयर बाजार तक महसूस किया जाएगा. आइए जानते हैं कि सीजफायर के बाद कौन-कौन से बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से सामान्य होगी जहाजों की आवाजाही

युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया था, वहीं अमेरिका ने इरानी तटों की नाकाबंदी की थी. इससे दुनियाभर में व्यापारी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. सीजफायर लागू होने के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों का संचालन सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन को राहत मिलेगी. इससे भारत समेत कई देशों को कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति मिलेगी, क्योंकि यह समुद्री मार्ग दुनियाभर की कुल तेल आपूर्ति में 20 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है.

कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है बड़ी गिरावट

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से तेल आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होंगी. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. ध्यान रहे कि युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को अमेरिकी बेंचमार्क इंडेक्स WTI 73.604 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, वहीं Brent 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था. युद्ध शुरू होने के बाद दोनों बेंचमार्क इंडेक्स 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करते नजर आए.

हालांकि, युद्धविराम के संकेत मिलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई. 14 मई को खबर लिखे जाने तक Brent लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल, जबकि WTI 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर पुराने रूट पर लौट सकती हैं

युद्ध के कारण कई एयरलाइंस को अपने विमान वैकल्पिक मार्गों से संचालित करने पड़े थे. सीजफायर के बाद एयरस्पेस से जुड़े प्रतिबंधों में ढील मिलने पर एयर इंडिया, इंडिगो समेत कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस अपनी उड़ानों को पुराने और छोटे रूट पर वापस ला सकती हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी और मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा.

शेयर बाजार में दिख सकती है जोरदार तेजी

भूराजनैतिक तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है. शुक्रवार को बाजार में आई तेजी के बाद सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में और मजबूती देखने को मिल सकती है. सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,695 अंक और निफ्टी 461 अंक की तेजी के साथ बंद हुआ.

अगर रविवार को युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो सोमवार को Nifty50 अपने लाइफटाइम हाई 26,373.20 के स्तर को पार कर सकता है. साथ ही Sensex भी 86,159.02 के ऑल टाइम हाई के आगे निकल सकता है. शुक्रवार को निफ्टी 23,622.90 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 75,527.95 के स्तर पर बंद हुआ.

इन सेक्टर के स्टॉक में दिख सकती है हलचल

  • L&T को मिल सकता है अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का फायदा
  • IndiGo-Air India के लिए घट सकती है ईंधन लागत
  • Apollo Tyres के मार्जिन में हो सकता है सुधार
  • HDFC Bank को मिल सकता है मजबूत आर्थिक माहौल का लाभ
  • HPCL-OIL-BP के लिए बढ़ सकते हैं रिफाइनिंग मार्जिन

गैस सप्लाई सुधरने से LPG बाजार को मिलेगी राहत

युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बने दबाव के कम होने से गैस की वैश्विक सप्लाई में सुधार आने की संभावना है. इसका असर एलपीजी और अन्य गैस उत्पादों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति संबंधी चुनौतियां कम होंगी. पश्चिम एशिया में तनाव पैदा होने से कच्चे तेल समेत एलपीजी लेकर आने वाले कई जहाज अरब सागर में ही फंसे हुए हैं.