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ETF खरीदने और बेचने वालों के लिए जरूरी खबर, 1 सितंबर से बदल जाएंगे ट्रेडिंग के नियम, SEBI ने बदला प्राइस बैंड रुल

SEBI ने ETF ट्रेडिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. 1 सितंबर 2026 से अधिकांश ETF के लिए फिक्स्ड प्राइस बैंड की जगह डायनेमिक प्राइस बैंड लागू होगा. इक्विटी और डेट ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड 10 फीसदी रहेगा, जिसे जरूरत के अनुसार 20 फीसदी तक बढ़ाया जा सकेगा.

SEBI ने ETF ट्रेडिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. Image Credit: canva/money9live

SEBI ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है. मार्केट रेगुलेटर ने ETF के लिए मौजूदा फिक्स्ड प्राइस बैंड सिस्टम को खत्म कर डायनामिक प्राइस बैंड सिस्टम लागू करने का फैसला किया है. नए नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होंगे. SEBI का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था बाजार की वास्तविक स्थिति और अंडरलाइंग एसेट्स की कीमतों में होने वाले बदलाव को सही तरीके से नहीं दिखा पाती. नए नियमों से ETF में बेहतर प्राइस डिस्कवरी और निवेशकों के लिए अधिक ट्रांसपेरेंसी मिलने की उम्मीद है.

ETF के लिए क्या बदलेगा

फिलहाल ETF पर दो दिन पुराने नेट एसेट वैल्यू के आधार पर 20 फीसदी का फिक्स्ड प्राइस बैंड लागू होता है. नए नियमों के तहत अधिकांश इक्विटी और डेट ETF के लिए शुरुआती डायनामिक प्राइस बैंड 10 फीसदी होगा. जरूरत पड़ने पर इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 20 फीसदी तक किया जा सकेगा. यदि किसी ETF का भाव तय लिमिट तक पहुंच जाता है तो कूलिंग ऑफ अवधि के बाद प्राइस बैंड में 5 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी.

गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए अलग नियम

सोना और चांदी बेस्ड ETF के लिए SEBI ने अलग सिस्टम बनाई है. इन ETF पर शुरुआती प्राइस बैंड 6 फीसदी रहेगा. बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में बदलाव के आधार पर इसे 3 फीसदी के चरणों में बढ़ाया जा सकेगा. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाले उतार- चढ़ाव का असर ETF की कीमतों में बेहतर तरीके से दिखाई देगा.

बेस प्राइस तय करने का तरीका भी बदला

SEBI ने ETF का बेस प्राइस तय करने के नियमों में भी बदलाव किया है. अब T- 2 NAV की जगह पिछले कारोबारी दिन के क्लोजिंग प्राइस को आधार बनाया जाएगा. यह क्लोजिंग प्राइस बाजार बंद होने से पहले के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस के आधार पर तय होगा. यदि उस दौरान कोई ट्रेड नहीं होता है तो आखिरी ट्रेडेड प्राइस को आधार माना जाएगा.

गोल्ड और सिल्वर ETF में प्री ओपन सेशन

SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए प्री ओपन कॉल ऑक्शन सेशन भी अनिवार्य कर दिया है. इसका उद्देश्य बेहतर प्राइस डिस्कवरी सुनिश्चित करना है. चूंकि सोना और चांदी के अंतरराष्ट्रीय बाजार लगभग लगातार चलते हैं जबकि भारतीय ETF केवल बाजार समय के दौरान ट्रेड होते हैं, इसलिए यह कदम निवेशकों को अधिक सटीक प्राइस डिटरमिनेशन का फायदा देगा.

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निवेशकों पर क्या होगा असर

जानकारों का मानना है कि नए नियमों से ETF की कीमतें अंडरलाइंग एसेट्स के रियल वैल्यू के अधिक करीब रहेंगी. इससे बाजार में ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी और निवेशकों को बेहतर ट्रेडिंग अनुभव मिलेगा. साथ ही तेजी या गिरावट के समय कीमतों में होने वाले असामान्य उतार-चढाव को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी.