लोन न चुकाने पर मोबाइल फोन ब्लॉक या डिसेबल नहीं कर सकते बैंक, RBI का सुझाव… करें सिर्फ ये काम
खास बात यह है कि ये पाबंदियां सिर्फ उन लोन पर लागू होती हैं जो विशेष रूप से मोबाइल फोन खरीदने के लिए लिए गए हैं और इनका दूसरे उद्देश्यों के लिए लिए गए लोनों से कोई संबंध नहीं है. रिजर्व बैंक ने रिकवरी के तरीकों और उधार लेने वालों की सुरक्षा के नियमों में बड़े बदलाव के तहत यह प्रस्ताव दिया है.
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को उधार देने वालों के लिए ऐसे तरीके सुझाए, जिनके जरिए वे किसी मोबाइल फोन के फंक्शन को तब बंद कर सकें, जब उस फोन को खरीदने के लिए लिए गए लोन का भुगतान न किया जाए.
भारतीय रिजर्व बैंक ने रिकवरी के तरीकों और उधार लेने वालों की सुरक्षा के नियमों में बड़े बदलाव के तहत, यह प्रस्ताव दिया है कि अगर उधार लेने वाले डिवाइस खरीदने के लिए लिए गए लोन का भुगतान नहीं करते हैं, तो लोन देने वालों को मोबाइल फोन के कुछ फंक्शन बंद करने की अनुमति दी जाए.
फीचर्स को सीमित करने की अनुमति
बैंकिंग सेक्टर के रेगुलेटर ने अपने ड्राफ्ट संशोधन निर्देशों में कहा है कि अगर लोन की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो बैंकों को मोबाइल फोन के कुछ फीचर्स को सीमित करने के लिए कुछ कदम उठाने की अनुमति है. हालांकि, उसने यह भी साफ किया कि फोन को पूरी तरह से ब्लॉक करना या डिसेबल करना मना है.
खास बात यह है कि ये पाबंदियां सिर्फ उन लोन पर लागू होती हैं जो विशेष रूप से मोबाइल फोन खरीदने के लिए लिए गए हैं और इनका दूसरे उद्देश्यों के लिए लिए गए लोनों से कोई संबंध नहीं है.
कब से लागू होंगे प्रस्तावित आदेश?
RBI के ‘जिम्मेदार कारोबारी आचरण निर्देशों’ में प्रस्तावित संशोधनों के तहत, बैंकों को कर्ज लेने वाले के मोबाइल डिवाइस की कुछ फंक्शनैलिटीज को सीमित करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी, लेकिन यह अनुमति केवल बहुत सख्त नियमों और शर्तों के तहत ही दी जाएगी.
इस प्रस्ताव का मकसद उस चलन को औपचारिक और रेगुलेट करना है, जिसे कुछ डिजिटल लेंडर्स और फिनटेक कंपनियां स्मार्टफोन फाइनेंसिंग के क्षेत्र में तेजी से अपना रही हैं. ये प्रस्तावित निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे.
पाबंदियां कब लगाई जा सकती हैं
RBI ने यह साफ किया है कि ऐसी पाबंदियां सिर्फ तभी लगाई जा सकती हैं, जब लोन का इस्तेमाल खास तौर पर उस डिवाइस को खरीदने के लिए किया गया हो. लोन एग्रीमेंट में ऐसी कार्रवाई की साफ तौर पर इजाजत होनी चाहिए और उसमें उन हालात का भी साफ-साफ जिक्र होना चाहिए जिनके तहत पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि किस क्रम में कार्रवाई की जाएगी, डिफॉल्ट को ठीक करने की समय-सीमा क्या होगी, और लोन लेने वालों के लिए शिकायत निवारण के कौन-कौन से तरीके उपलब्ध होंगे.
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