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सरकार कितने रुपये में बेच रही यूरिया और DAP? खरीफ सीजन में पड़ेगी इतने लाख टन खाद की जरूरत, जानें- कितना है स्टॉक

यूरिया, DAP, NPK और SSP समेत फर्टिलाइजर का कुल घरेलू उत्पादन 2021 में 433.29 लाख टन से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन हो गया है. पिछले कैलेंडर वर्ष में देश की फर्टिलाइजर की कुल जरूरत का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया.

खाद सब्सिडी Image Credit: Getty image

सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में चल रहे खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए फर्टिलाइजर का स्टॉक काफी है. साथ ही सरकार ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में यूरिया की कीमतों में कमी को देखते हुए मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए सब्सिडी के अनुमानों पर फिर से विचार किया जा सकता है.

वेस्ट एशिया में हाल की घटनाओं पर मंत्रालयों के बीच हुई एक ब्रीफिंग में, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की एडिशनल सेक्रेटरी अपर्णा एस शर्मा ने कहा, ‘देश में फर्टिलाइज़र का स्टॉक काफी है. भारत की फर्टिलाइजर सिक्योरिटी पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है.’

सब्सिडी के आंकड़ों पर होगा विचार

जब उनसे पूछा गया कि क्या ग्लोबल कीमतों में गिरावट के कारण 2026-27 के लिए 3.4 लाख करोड़ रुपये के फर्टिलाइजर सब्सिडी अनुमान को कम किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि शुरुआती सब्सिडी अनुमान इस धारणा पर आधारित था कि ट्रेंड वैसा ही रहेगा. शर्मा ने कहा कि लेकिन, सरकार की ओर से हमारी एक संस्था द्वारा हाल ही में जारी किए गए टेंडर के नतीजों के कारण सब्सिडी के आंकड़ों पर फिर से विचार करने की जरूरत होगी, और हम इस पर दोबारा गौर करेंगे.’

हालांकि, एडिशनल सेक्रेटरी ने कहा कि दोबारा आकलन इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लायर्स कितनी मात्रा की पेशकश करते हैं और कुल इंपोर्ट कितना होता है.

यूरिया इंपोर्ट के लिए टेंडर जारी

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL), जिसने हाल ही में 1.7 मिलियन टन यूरिया इम्पोर्ट करने के लिए टेंडर जारी किया था, को ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनियों से 6 मिलियन टन से अधिक के लिए बोलियां मिली हैं. इसमें सबसे कम रेट लगभग 445 डॉलर प्रति टन है. ग्लोबल यूरिया की कीमतों में गिरावट के कारण, इस लेटेस्ट टेंडर में दिए गए रेट अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) द्वारा जारी टेंडर में बताई गई कीमतों से 50 प्रतिशत से भी कम हैं.

ग्लोबल यूरिया की कीमतों में गिरावट से फर्टिलाइजर सब्सिडी में बढ़ोतरी को रोकने और रबी (सर्दियों में बोई जाने वाली फसल) सीजन के लिए मिट्टी के पोषक तत्वों को सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है.

सब्सिडी को 100 फीसदी बढ़ाने का अनुरोध

इस हफ्ते की शुरुआत में सरकारी सूत्रों ने कहा था कि फर्टिलाइजर मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए बजट में तय 1.71 लाख करोड़ रुपये की फर्टिलाइजर सब्सिडी को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने का अनुरोध किया है. यूरिया की ग्लोबल कीमतों में गिरावट के बारे में शर्मा ने कहा कि नए देश एक्सपोर्ट के लिए मार्केट में आए हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई बढ़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत स्टॉक स्थिति और बिना रुकावट घरेलू प्रोडक्शन भी कीमतों पर असर डालने वाले कारण हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘कीमतों में कमी मार्केट में नए देशों के आने की वजह से हुई है और वे बड़े पैमाने पर आए हैं. इसलिए, इससे कीमतें तेजी से गिरी हैं. इसके अलावा, हमारी स्टॉक स्थिति और हमारा प्रोडक्शन बिना रुकावट चल रहा है. तो शायद यह उन देशों के लिए भी एक संकेत है जिनसे हम इंपोर्ट करते हैं कि हमें शायद जरूरत न पड़े और हमारी जरूरत भी कम हो सकती है.’

घरेलू प्रोडक्शन पर निर्भर

शर्मा ने कहा कि कई कारण हो सकते हैं, जिनमें भारत की खपत और स्टॉक की स्थिति शामिल है. ये भी आपस में जुड़े हुए हैं, और इनकी वजह से कीमतों पर असर पड़ा होगा. तो, देखते हैं कि यह ट्रेंड कैसे आगे बढ़ता है. खरीफ सीज़न के लिए और इंपोर्ट की जरूरतों से जुड़े सवाल पर शर्मा ने कहा कि यह घरेलू प्रोडक्शन पर निर्भर करेगा.

कितना है खाद का स्टॉक?

उन्होंने कहा, ‘हम शायद 10 लाख टन या 20 लाख टन और इंपोर्ट करें. हम अपने स्टॉक पर भी नजर रखेंगे. मॉनसून के खतरे को देखते हुए, जो भी अनुमान लगाया गया है, वह खरीफ सीजन के लिए हमारे इंपोर्ट के मामले में हमारा मार्गदर्शन करेगा. इसलिए, अभी हम कोई निश्चित आंकड़े नहीं दे सकते.’

खरीफ 2026 के लिए, कृषि विभाग ने फर्टिलाइजर की जरूरत का दोबारा आकलन किया है जो 383.9 लाख टन है और इसके मुकाबले स्टॉक 197.56 लाख टन है.

घरेलू प्रोडक्शन

शर्मा ने कहा, ‘इनपुट और तैयार फर्टिलाइजर के लिए लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट ने सप्लाई सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाई है. इसके अलावा, हमारे कई जॉइंट वेंचर हैं, और विदेशों में अपने मिशन के जरिए हम दूसरे देशों के साथ जुड़ने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं.’ एडिशनल सेक्रेटरी ने कहा कि घरेलू प्रोडक्शन गैस की उपलब्धता के हिसाब से चल रहा है.

उन्होंने बताया कि संकट के बाद, यूरिया का घरेलू प्रोडक्शन 71.41 लाख टन, DAP लगभग 10.04 लाख टन, NPK कॉम्प्लेक्स 22.96 लाख टन और SSP लगभग 14 लाख टन रहा है. इस तरह, इंपोर्ट और घरेलू उत्पादन के जरिए हमारे स्टॉक में लगभग 153.79 लाख टन फर्टिलाइजर (खाद) शामिल किए गए हैं.

शर्मा ने कहा, ‘विदेशों में हमारे 28 मिशनों के साथ मिलकर, देश ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फ़िनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से यूरिया की सप्लाई हासिल की है. DAP और NPK भी रूस, मोरक्को, मिस्र, USA, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब (रेड सी के रास्ते) जैसे अलग-अलग स्रोतों से मंगाए गए हैं.’

खाद की सरकारी कीमत

देश में यूरिया का उत्पादन 2014-15 में 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन हो गया है. अभी, नीम-कोटेड यूरिया का MRP 242 रुपये प्रति बैग (45kg) है, जबकि DAP 1,350 रुपये प्रति बैग (50kg) के भाव पर बेचा जा रहा है.

यूरिया, DAP, NPK और SSP समेत फर्टिलाइजर का कुल घरेलू उत्पादन 2021 में 433.29 लाख टन से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन हो गया है. पिछले कैलेंडर वर्ष में देश की फर्टिलाइजर की कुल जरूरत का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया.

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