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सूखे की मार से बढ़ेगा एडिबल ऑयल और सोयाबीन का इंपोर्ट, महंगे हो सकते हैं खाने-पीने के सामान

भारत में सूखे और अल नीनो के असर से वित्त वर्ष 2026-27 में तेल, सोयाबीन, मूंगफली, चीनी और मक्का का आयात बढ़ सकता है. एडिबल ऑयल का आयात 1.75 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है. सोयाबीन मील और मक्का की ऊंची कीमतों से पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ने की चिंता है. वहीं, मूंगफली उत्पादन में 20 फीसदी से ज्यादा गिरावट की आशंका है.

पोल्ट्री इंडस्ट्री ने सोयाबीन मील और मक्का के आयात की अनुमति मांगी. Image Credit: tv9

देश में इस वित्त वर्ष खाने-पीने के सामान, पशु चारे और कृषि से जुड़े कच्चे माल का आयात बढ़ सकता है. इसकी बड़ी वजह सूखे के कारण फसलों के उत्पादन पर पड़ने वाला असर है. घरेलू बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने के साथ इंडस्ट्री भी लागत कम करने के लिए सरकार से आयात में राहत देने की मांग कर रहे हैं. एडिबल ऑयल, सोयाबीन, मूंगफली, चीनी और मक्का जैसे उत्पादों की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है. अल नीनो के असर से दालों, तिलहन, धान और चीनी के उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ी है.

आयात 1.75 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान

भारत में एडिबल ऑयल का आयात बढ़ने की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का एडिबल ऑयल आयात 1.65 करोड़ टन रहा था. वित्त वर्ष 2026-27 में इसके बढ़कर 1.75 करोड़ टन पहुंचने का अनुमान है.

उन्होंने कहा कि घरेलू तिलहन उत्पादन पर सूखे का असर पड़ रहा है. हालांकि, सरसों की फसल का उत्पादन कैसा रहता है, यह देखने के बाद ही आयात की वास्तविक जरूरत का अंदाजा लगाया जा सकेगा.

खरीफ सीजन में सोयाबीन और मूंगफली के उत्पादन में गिरावट की आशंका है. इससे एडिबल ऑयल की घरेलू सप्लाई प्रभावित हो सकती है. अगर उत्पादन में कमी आती है, तो मांग पूरी करने के लिए आयात बढ़ाना पड़ सकता है.

पशु चारे की लागत बढ़ने का डर

सोयाबीन की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. पिछले साल ज्यादा बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई थी. इसके बाद अफ्रीका के सबसे कम विकसित देशों से भारत का सोयाबीन आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

इस साल मराठवाड़ा, विदर्भ, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. इससे सोयाबीन की कमी बनी रह सकती है.

पोल्ट्री उद्योग ने सरकार से 30 लाख टन सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने की मांग की है. Compound Livestock Feed Manufacturers Association के पूर्व अध्यक्ष दिव्या कुमार गुलाटी के मुताबिक, सोयाबीन मील और मक्का पोल्ट्री फीड की लागत का करीब 80 फीसदी हिस्सा हैं. इनकी कीमतें पहले से ऊंची हैं.

उद्योग का कहना है कि आयात की अनुमति नहीं मिलने पर पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

20 फीसदी से ज्यादा गिरावट की आशंका

खरीफ सीजन में मूंगफली के उत्पादन को लेकर भी चिंता है. Solvent Extractors’ Association के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस साल खरीफ मूंगफली का उत्पादन 20 फीसदी से ज्यादा घट सकता है.

सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन की फसलों में कमी से घरेलू एडिबल ऑयल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. भारत पहले ही एडिबल ऑयल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में घरेलू उत्पादन में गिरावट आने पर विदेशी बाजारों पर निर्भरता और बढ़ सकती है.

चीनी, मक्का और कपास के आयात पर भी नजर

एडिबल ऑयल के अलावा दूसरे कृषि उत्पादों के आयात को लेकर भी हलचल है. चीनी उद्योग को कच्ची चीनी के आयात की अनुमति की अवधि बढ़ाने में सफलता मिली है. वहीं, पोल्ट्री उद्योग सोयाबीन मील के साथ मक्का आयात की अनुमति भी चाहता है.

कपड़ा उद्योग घरेलू जरूरत पूरी करने और लागत कम करने के लिए कपास पर आयात शुल्क हटाने की मांग कर रहा है. दूसरी ओर, स्टार्च उद्योग को चिंता है कि अगर ज्यादा मक्का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ, तो उसे चीन से अधिक स्टार्च आयात करना पड़ सकता है.

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अल नीनो से बढ़ी कृषि उत्पादन की चिंता

अल नीनो के असर से देश में कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. दालों, चीनी, तिलहन और धान जैसी जरूरी फसलों पर इसका असर पड़ने की आशंका है. अगर घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले कम रहता है, तो आयात बढ़ाना पड़ सकता है.

हालांकि, आयात बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सभी खाद्य पदार्थों की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी. कीमतों पर घरेलू उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, आयात शुल्क और सरकारी नीतियों का भी असर पड़ेगा. लेकिन अगर फसलों की सप्लाई में कमी आती है और आयात से इसकी भरपाई नहीं हो पाती, तो एडिबल ऑयल, पशु चारे और कुछ दूसरे कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

वित्त वर्ष 2026-27 में एडिबल ऑयल का आयात 1.75 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान.
खरीफ मूंगफली उत्पादन में 20 फीसदी से ज्यादा गिरावट की आशंका.
पोल्ट्री उद्योग ने सोयाबीन मील और मक्का के आयात की अनुमति मांगी.