11 करोड़ किसानों ने बनवाया समय से पहले फार्मर ID, आखिर क्या है यह; कैसे मिलेगा फायदा?
केंद्र सरकार ने मार्च 2027 की समयसीमा से पांच महीने पहले 11 करोड़ किसानों की Farmer ID बनाने का लक्ष्य पूरा किया. जानें इससे जुड़ी पहल और खाद की बिक्री के आंकड़े.
Highlights
- सरकार ने 23 अक्टूबर 2026 को 11 करोड़ किसानों की Farmer ID बनाने का लक्ष्य पूरा किया.
- चुनिंदा सीमावर्ती जिलों में खरीफ सीजन 2025 और 2026 के बीच खाद की बिक्री में 37.56 फीसदी की कमी दर्ज की गई.
- जिन जिलों में फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क को पायलट आधार पर लागू किया गया.
केंद्र सरकार ने देशभर में 11 करोड़ किसानों की Farmer ID बनाने का लक्ष्य तय समयसीमा से पांच महीने पहले पूरा कर लिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को एक बयान में यह जानकारी दी. सरकार ने मार्च 2027 तक यह लक्ष्य पूरा करने की समयसीमा तय की थी, जबकि यह उपलब्धि 23 अक्टूबर 2026 को हासिल कर ली गई.
इस पहल का मकसद किसानों की पहचान आसान बनाना और सरकारी योजनाओं व कृषि सेवाओं को उन तक पहुंचाने की प्रक्रिया बेहतर करना है. Farmer ID से पात्र लाभार्थियों की पहचान और उनकी जानकारी का सत्यापन करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही कृषि से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
क्या है Farmer ID?
Farmer ID किसानों की पहचान से जुड़ी व्यवस्था है. इसका मकसद सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं के लिए पात्र किसानों की पहचान करना और उनकी जानकारी का सत्यापन करना है. सरकार इस पहल के जरिए कृषि प्रशासन को आधुनिक बनाने और सरकारी सेवाओं को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है.
खाद की बिक्री से जोड़ी जा रही Farmer ID
किसानों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड को उर्वरक विभाग के इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) से भी जोड़ा जा रहा है. इसके लिए मोबाइल और वेब के जरिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले एकीकृत आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क (FFS) के तहत चुनिंदा सीमावर्ती जिलों में खरीफ सीजन 2025 और खरीफ सीजन 2026 के बीच खाद की बिक्री में 37.56 फीसदी की कमी दर्ज की गई. इन इलाकों में खाद की बिक्री को Farmer ID, फसल की जरूरतों और जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ा गया था. इसके लिए AgriStack या राज्य स्तर के दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया.
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इस व्यवस्था से सीमापार तस्करी के लिए खाद को दूसरी जगह भेजे जाने पर रोक लगाने में मदद मिली. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जिन जिलों में इस फ्रेमवर्क को पायलट आधार पर लागू किया गया, वहां खाद की बिक्री के प्रबंधन में करीब 25 फीसदी का बदलाव दर्ज किया गया. सरकार का कहना है कि Farmer ID से जुड़ी यह व्यवस्था किसानों की पहचान और कृषि सेवाओं से संबंधित प्रक्रिया को बेहतर बनाने के साथ-साथ खाद की बिक्री के प्रबंधन में भी मदद कर रही है.
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