Vedanta के नए शेयर बेचने से पहले जान लें यह नियम, कैसे लगेगा कैपिटल गेन टैक्स और कितना होगा फायदा
वेदांता डिमर्जर के बाद निवेशकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स की कैलकुलेशन का तरीका स्पष्ट कर दिया गया है. कंपनी ने मूल निवेश लागत को पांच कंपनियों के बीच बांटने का फॉर्मूला जारी किया है. डिमर्जर के दौरान कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन शेयर बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स देनदारी बनेगी.
Vedanta Demerger: वेदांता डिमर्जर के बाद अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई लिस्ट हुई कंपनियों के शेयर बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे लगेगा. कंपनी ने शेयरधारकों के लिए एलोकेशन कॉस्ट का फॉर्मूला जारी कर दिया है, जिससे यह तय होगा कि किस कंपनी के शेयर की खरीद लागत कितनी मानी जाएगी. खास बात यह है कि डिमर्जर के समय कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन शेयर बेचते समय निवेशकों को कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. ऐसे में निवेशकों के लिए टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
डिमर्जर के बाद क्या माहौल
वेदांता ने अपने शेयरधारकों को बताया है कि मूल निवेश की लागत को पांच कंपनियों के बीच बांटना होगा. कुल खरीद लागत का 52.34 फीसदी हिस्सा वेदांता लिमिटेड के लिए माना जाएगा. वहीं 7.15 फीसदी वेदांता एल्युमिनियम मेटल, 12.23 फीसदी तलवंडी साबो पावर, 21.49 फीसदी मालको एनर्जी और 6.79 फीसदी वेदांता आयरन एंड स्टील के हिस्से में जाएगा. इसी आधार पर भविष्य में कैपिटल गेन की कैलकुलेशन की जाएगी.
उदाहरण से समझिए लागत का गणित
मान लीजिए किसी निवेशक ने वेदांता के शेयरों में 1 लाख रुपये का निवेश किया था. ऐसे में 52,340 रुपये की लागत वेदांता लिमिटेड के लिए मानी जाएगी. 7,150 रुपये वेदांता एल्युमिनियम मेटल, 12,230 रुपये तलवंडी साबो पावर, 21,490 रुपये मालको एनर्जी और 6,790 रुपये वेदांता आयरन एंड स्टील के शेयरों की लागत मानी जाएगी. यही लागत आगे टैक्स कैलकुलेशन में उपयोग होगी.
डिमर्जर पर नहीं लगेगा कोई टैक्स
इनकम टैक्स कानून के अनुसार योग्य डिमर्जर के तहत मिलने वाले नए शेयरों पर तत्काल कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है. यानी निवेशकों के डिमैट खाते में नई कंपनियों के शेयर आने मात्र से कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा. डिमर्जर को टैक्स योग्य ट्रांसफर नहीं माना जाता है, इसलिए इस चरण में निवेशकों को कोई टैक्स नहीं देना होगा.
शेयर बेचने पर लगेगा कैपिटल गेन टैक्स
टैक्स की देनदारी तब बनेगी जब निवेशक वेदांता या नई लिस्ट हुई कंपनियों के शेयर बेचेंगे. उस समय कैपिटल गेन की कैलकुलेशन निर्धारित लागत आवंटन के आधार पर की जाएगी. शेयर बेचने पर मिलने वाली अमाउंट और एलोकेशन कॉस्ट के बीच का अंतर ही प्रॉफिट या लॉस माना जाएगा और उसी पर टैक्स लागू होगा.
होल्डिंग पीरियड का मिलेगा फायदा
डिमर्जर के बाद मिले नए शेयरों के लिए होल्डिंग पीरियड दोबारा शुरू नहीं होगा. निवेशक ने मूल वेदांता शेयर जिस तारीख को खरीदे थे, वही तारीख नई कंपनियों के शेयरों के लिए भी मानी जाएगी. उदाहरण के लिए यदि किसी ने 2024 में वेदांता के शेयर खरीदे थे और 2026 में डिमर्जर के तहत नए शेयर मिले हैं, तो सभी शेयरों का होल्डिंग पीरियड 2024 से ही गिना जाएगा.
यह भी पढ़ें- ITR भरने वालों के लिए जरूरी खबर, टैक्स रिजीम बदलने से पहले इन बातों पर करें गौर
लॉन्ग टर्म टैक्स का मिल सकता है फायदा
होल्डिंग पीरियड पुराने निवेश की तारीख से गिने जाने के कारण कई निवेशक सीधे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की कैटेगरी में आ सकते हैं. आमतौर पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स दर कम होती है. इसलिए डिमर्जर के बाद शेयर बेचने से पहले निवेशकों को अपनी लागत और होल्डिंग अवधि दोनों की सही कैलकुलेशन कर लेनी चाहिए.
Latest Stories
ITR भरने वालों के लिए जरूरी खबर, टैक्स रिजीम बदलने से पहले इन बातों पर करें गौर
पोस्ट ऑफिस की इन स्कीम पर मिलता है सबसे ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश के साथ मिलेगा बेहतर रिटर्न
रिटायरमेंट के बाद 50 लाख रुपये कहां लगाएं? FD, SCSS या म्यूचुअल फंड; जानें हर महीने कमाई का स्मार्ट प्लान
