अमेरिका से समझौते पर ईरान में बगावत! विदेश मंत्री अराघची के इस्तीफे की उठी मांग; कट्टरपंथियों ने उन्हें बताया ‘घुसपैठिया’

अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर ईरान में राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है. कट्टरपंथी समूहों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है और उन पर वॉशिंगटन के सामने झुकने का आरोप लगाया है. तेहरान और मशहद में हुए प्रदर्शनों के दौरान अराघची के इस्तीफे की मांग भी उठी है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची. Image Credit: tv9 bharatvarsh

Iran US Deal: ईरान में अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है. देश के कट्टरपंथी समूहों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है और उन पर वॉशिंगटन के सामने झुकने का आरोप लगाया है. राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने अराघची के इस्तीफे की मांग की और प्रस्तावित समझौते को ईरान के हितों के खिलाफ बताया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को तेहरान और उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें “घुसपैठिया” तक करार दिया. विरोध प्रदर्शनों के वीडियो ईरानी समाचार एजेंसी फार्स द्वारा जारी किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में कट्टरपंथी समर्थक नजर आए.

क्या है विवाद की वजह

कट्टरपंथी नेताओं का दावा है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है. खासतौर पर उन्हें आशंका है कि इस समझौते से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट पर तेहरान का प्रभाव कम हो सकता है. होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है और लंबे समय से ईरान की रणनीतिक ताकत का प्रमुख हिस्सा रहा है. ऐसे में समझौते को लेकर देश के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं.

अराघची ने क्या कहा

हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान के प्रमुख प्रतिरोधी हथियारों में से एक है. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं.

हालांकि, कट्टरपंथी गुटों का आरोप है कि समझौते की वास्तविक शर्तें सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से बताए गए विवरण से कहीं अधिक व्यापक रियायतें मांगती हैं. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की मंजूरी के बिना अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को लागू नहीं किया जा सकता.

परमाणु नीति को लेकर भी बढ़ा विवाद

यह विरोध केवल शांति समझौते तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ महीनों से ईरान के कट्टरपंथी गुट सरकार पर अधिक आक्रामक परमाणु नीति अपनाने का दबाव बना रहे हैं. कई नेता परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की वकालत कर चुके हैं.

इस वर्ष की शुरुआत में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक लेख में सुझाव दिया था कि ईरान को जल्द से जल्द NPT से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए, जबकि कुछ अन्य नेताओं ने भी परमाणु कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने की वकालत की थी.

यह भी पढ़ें: FACT Ltd से लेकर GMR Airports तक, इन 5 शेयरों में दिखा बुलिश पैटर्न; निवेशक रखें नजर