भारत ने पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट कर कमाए ₹2.59 लाख करोड़, होर्मुज संकट के बीच बनाया बड़ा रिकॉर्ड
India Fuel Export: पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, डॉलर के हिसाब से कमाई में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को दिखाते हैं. भारत मुख्य रूप से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, नेफ्था और फ्यूल ऑयल का निर्यात करता है.

India Fuel Export: अप्रैल-सितंबर के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से भारत की कमाई रुपये के हिसाब से लगभग 50 फीसदी बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गई. शिपमेंट की मात्रा में 16 फीसदी की गिरावट के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल और रुपये की कीमत में बड़ी गिरावट के कारण यह कमाई बढ़ी.
कमाई में बढ़ोतरी के पीछे के फैक्टर्स
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, डॉलर के हिसाब से कमाई में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को दिखाते हैं. सितंबर तक के छह महीनों में डीजल और पेट्रोल की औसत क्षेत्रीय बेंचमार्क कीमतों में क्रमशः 83% और 54% की वृद्धि हुई.
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये की कीमत में गिरावट ने इस कमाई को और बढ़ा दिया. अप्रैल-सितंबर के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत मूल्य 95.17 रहा, जबकि एक साल पहले यह 86.44 था, यानी अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपये में लगभग 9 रुपये की गिरावट आई.
तेल की सप्लाई में रुकावट
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के लगभग बंद हो जाने के कारण सप्लाई में बाधाएं आईं, जिसकी वजह से पिछले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं. रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और सप्लाई-डिमांड की तंग स्थितियों के कारण डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे कुछ महीनों में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं.
डीजल के निर्यात से कितनी कमाई?
कमाई में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा डीजल से आया. वॉल्यूम में 19% की गिरावट के बावजूद, डीजल के निर्यात से होने वाली कमाई रुपये के हिसाब से 58% बढ़कर लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये हो गई. डॉलर के हिसाब से कमाई में 48% की बढ़ोतरी हुई, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर डीजल की औसत बेंचमार्क कीमतें 151 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं.
पेट्रोल के निर्यात से बढ़ी कमाई
वॉल्यूम में 24 फीसदी की गिरावट के बावजूद, पेट्रोल के निर्यात से होने वाली कमाई रुपये के हिसाब से 21 फीसदी बढ़कर 58,000 करोड़ रुपये हो गई, और डॉलर के हिसाब से इसमें 13 फीसदी की वृद्धि हुई. क्षेत्रीय स्तर पर पेट्रोल की औसत बेंचमार्क कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. रुपये के हिसाब से भारत की पेट्रोलियम निर्यात कमाई में डीजल और पेट्रोल की हिस्सेदारी लगभग 70 फीसदी रही.
कम हो रहा सरप्लस स्टॉक
ईटी ने उद्योग के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि निर्यात वॉल्यूम में गिरावट यह दिखाता है कि घरेलू स्तर पर सरप्लस (अतिरिक्त स्टॉक) कम हो रहा है, क्योंकि मांग तो बढ़ी है लेकिन उत्पादन स्थिर रहा है. जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता और घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, देश के भीतर ईंधन की खपत मजबूत बनी रही, जिससे रिफाइनरियों के पास विदेशों में बेचने के लिए कम ईंधन बचा.
सितंबर तक के छह महीनों में डीजल और पेट्रोल की खपत में क्रमशः 5% और 7% की वृद्धि हुई, जबकि उत्पादन में क्रमशः 0.3% और 0.8% की गिरावट आई.
पेट्रोलियम एक्सपोर्ट में पेट्रोल-डीजल की हिस्सेदारी
भारत मुख्य रूप से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, नेफ्था और फ्यूल ऑयल का निर्यात करता है. वॉल्यूम के हिसाब से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में डीजल की हिस्सेदारी 42% और पेट्रोल की हिस्सेदारी 23% रही. भारत के कुल ईंधन निर्यात में रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी लगभग 70% है, जबकि बाकी हिस्सा रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी, सरकारी कंपनी MRPL और अन्य रिफाइनरियों द्वारा सप्लाई किया जाता है.
दबाव में रुपया
पिछले छह महीनों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण रुपया दबाव में रहा है. तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू रिफाइनरियों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें आयातित कच्चे तेल का भुगतान करना पड़ता है.
भारत की घरेलू खपत का लगभग 90% हिस्सा इसी आयातित कच्चे तेल से पूरा होता है. कच्चे तेल और ईंधन के आयात पर खर्च किए गए डॉलर का लगभग एक-चौथाई हिस्सा निर्यात के जरिए वापस आ जाता है. वॉल्यूम के हिसाब से भारत जितना कच्चा तेल और ईंधन आयात करता है, उसका पांचवां हिस्सा निर्यात करता है.