भारत का फॉरेक्स रिजर्व 8.5 अरब डॉलर घटा, 726 अरब डॉलर के करीब पहुंचा
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 अक्टूबर 2026 को खत्म सप्ताह में 8.58 अरब डॉलर घटकर 726.03 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले भी इसमें 12.95 अरब डॉलर की गिरावट आई थी. सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से अब तक फॉरेक्स रिजर्व करीब 60 अरब डॉलर घट चुका है. रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं.

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 9 अक्टूबर 2026 को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8.58 अरब डॉलर घटकर करीब 726.03 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले वाले सप्ताह में भी रिजर्व में करीब 12.95 अरब डॉलर की कमी आई थी.
छह हफ्तों में करीब 60 अरब डॉलर की गिरावट
भारत का फॉरेक्स रिजर्व 4 सितंबर 2026 को करीब 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है. 9 अक्टूबर तक रिजर्व करीब 59.68 अरब डॉलर कम हो चुका है.
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट ऐसे समय हुई है, जब रुपये पर भी दबाव बना हुआ है. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये को ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक की ओर से किए गए हस्तक्षेप का असर भी रिजर्व पर पड़ सकता है.
विदेशी मुद्रा संपत्ति में सबसे ज्यादा कमी
ताजा सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति यानी Foreign Currency Assets में करीब 7.14 अरब डॉलर की गिरावट आई. यह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है.
इसके अलावा देश के सोने के भंडार में भी करीब 1.32 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई. इससे कुल फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट और बढ़ गई. विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति, सोना, विशेष आहरण अधिकार यानी SDR और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व स्थिति शामिल होती है.
रुपये पर दबाव का भी असर
रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की खरीद-बिक्री कर सकता है. इसका उद्देश्य रुपये में अचानक होने वाली तेज गिरावट या अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना होता है. हाल के हफ्तों में रुपये पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में बाजार में डॉलर की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखाई दे सकता है.
अभी भी मजबूत है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
हालांकि रिकॉर्ड स्तर से फॉरेक्स रिजर्व में करीब 60 अरब डॉलर की कमी आई है, लेकिन 726 अरब डॉलर के आसपास का भंडार अभी भी भारत के लिए बड़ा विदेशी मुद्रा बफर है.
आने वाले समय में रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार की स्थिति जैसे कारक रिजर्व की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. लगातार गिरावट पर नजर रखना इसलिए जरूरी है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार देश की बाहरी वित्तीय स्थिरता और आयात भुगतान क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है.