AI से IT कंपनियों की छुट्टी नहीं होने वाली, बढ़ेंगे रोजगार के मौके; Infosys के को-फाउंडर ने बताया कैसे
Infosys के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि का कहना है कि भारत AI के इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ाकर अपनी अलग पहचान बना सकता है. उनके मुताबिक, AI से Infosys जैसी IT कंपनियों के काम की मांग बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि बिजनेस में AI लागू करना सिर्फ कोडिंग नहीं है और छोटे कारोबारों में तकनीक का इस्तेमाल रोजगार के नए मौके पैदा कर सकता है.

सेमीकंडक्टर और AI के दौर में भारत के पास बड़ा मौका है. Infosys के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि का मानना है कि भारत की ताकत सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि इस तकनीक को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने और उनके काम का बनाने में है. Bloomberg New Economy Forum में बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI का दायरा किसी एक मॉडल या कंपनी तक सीमित नहीं है. साथ ही, उन्होंने IT सेक्टर में AI के कारण नौकरियां और कारोबार घटने की आशंकाओं पर भी अपनी राय रखी.
AI से Infosys जैसी कंपनियों का काम बढ़ेगा
नंदन नीलेकणि ने कहा कि AI को एक सामान्य उपयोग वाली तकनीक (General Purpose Technology) के रूप में देखा जा रहा है. उनके मुताबिक, यह तकनीक किसी एक कंपनी या मॉडल के कंट्रोल में नहीं रह सकती. उन्होंने कहा, “आप इस तकनीक को बोतल में बंद नहीं कर सकते.” ज्यादा चिप और कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध होने से अधिक कंपनियों और लोगों को AI विकसित करने और इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा.
AI के कारण IT सेक्टर में पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की जरूरत घटने की आशंकाओं पर नीलेकणि ने कहा कि Infosys जैसी कंपनियों की सेवाओं की मांग बढ़ सकती है. उन्होंने कहा, “Infosys जैसी कंपनियों के लिए जरूरत बढ़ रही है. हमारे पास और काम आने वाला है. ऐसी कंपनियों के भविष्य को लेकर तबाही की भविष्यवाणी करना सिर्फ डर बेचने जैसा है.”
बिजनेस में AI लागू करना सिर्फ कोडिंग नहीं
नीलेकणि के मुताबिक, कंपनियों में AI को अपनाने और बिजनेस में बदलाव लाने का काम केवल कोडिंग तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट में तकनीक की हिस्सेदारी सिर्फ 30 फीसदी होती है, जबकि बाकी काम में गवर्नेंस, सुरक्षा से जुड़े नियम और अन्य नियंत्रण शामिल होते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में ग्राहकों की जरूरतों को समझने वाले लोगों की भूमिका अहम होगी. कंपनियों को AI अपनाने के लिए अपनी काम करने की प्रक्रिया और बिजनेस के तरीकों में भी बदलाव करना होगा. इस वजह से AI के असर को सिर्फ इस आधार पर नहीं देखना चाहिए कि वह कितने पारंपरिक काम अपने आप कर सकता है.
छोटे कारोबार बढ़ाएंगे रोजगार के मौके?
नीलेकणि ने भारत के छोटे कारोबारों को रोजगार पैदा करने का बड़ा जरिया बताया. उन्होंने कहा, “जब हम छोटे कारोबारों की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे, तो बहुत सारी नौकरियां पैदा होंगी.” उनका मानना है कि अगर छोटे कारोबारी AI और दूसरे डिजिटल टूल का ज्यादा इस्तेमाल करें, तो वे अपना काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं, ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं और कारोबार बढ़ा सकते हैं. इससे कर्मचारियों और दूसरी सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है.
हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि कारोबार इतना बढ़े कि वे ज्यादा लोगों को रोजगार दे सकें. चुनौती सिर्फ तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि उसका इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार के मौके तैयार करने के लिए करने की भी है.
AI से दुनिया भर में नौकरियों पर असर की आशंका
नीलेकणि का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया भर में AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई जा रही है. IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने AI को वैश्विक श्रम बाजार के लिए “धीरे-धीरे बढ़ने वाली सुनामी” बताया था. उनके मुताबिक, दुनिया भर में हर 10 में से करीब 4 नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं. इनमें कुछ काम ऑटोमेट हो सकते हैं, जबकि कुछ नौकरियों की प्रकृति बदल सकती है या AI की मदद से उनकी उत्पादकता बढ़ सकती है.
नीलेकणि का नजरिया इस बात पर जोर देता है कि AI को केवल नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक के रूप में देखने के बजाय यह भी समझना होगा कि कंपनियां और छोटे कारोबारी इसका इस्तेमाल करके अपना काम कैसे बढ़ा सकते हैं. उनके मुताबिक, भारत के लिए बड़ा अवसर AI के सबसे शक्तिशाली मॉडल बनाने के बजाय इसे बड़े पैमाने पर लोगों और कारोबारों तक पहुंचाने में है.
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