सहारा के ₹14,000 करोड़ पर नया विवाद! निवेशकों का पैसा आखिर कहां अटका?

करीब दो करोड़ निवेशकों से ₹14,106 करोड़ जुटाने वाले सहारा समूह के चर्चित ओएफसीडी (ऑप्शनली फुल्ली कन्वर्टेबल डिबेंचर) मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है. इस मामले में पहले सेबी ने सहारा समूह और उसके निदेशकों पर कार्रवाई को सही ठहराया था. हालांकि, सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (सैट) ने मार्च 2023 में अपने एक आदेश में कुछ कंपनी अधिकारियों को कर्मचारी होने के आधार पर राहत दी थी.

इस फैसले के खिलाफ बाजार नियामक सेबी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सेबी का तर्क है कि इतनी बड़ी राशि जुटाने के मामले में केवल कर्मचारी होने के आधार पर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. यह मामला निवेशकों के धन की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही से जुड़ा है. सेबी का कहना है कि यह एक पब्लिक ऑफर था जिसके लिए नियमों का पालन ज़रूरी था. वहीं, सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल) का दावा है कि उसने अधिकांश निवेशकों का पैसा लौटा दिया है और सिर्फ ₹17 करोड़ बकाया हैं, जबकि सेबी ₹14,000 करोड़ से अधिक की वापसी पर जोर दे रहा है. सुप्रीम कोर्ट में इस अपील के बाद अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि निवेशकों को उनका पैसा कब मिलेगा और दोषी कौन ठहरता है.

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