Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत हुआ रुपया, 3 दिन में 1.50 रुपये की रिकवरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती आई है. मंगलवार को रुपया 40 पैसे चढ़कर 95.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में रुपये ने कुल 1.50 रुपये की रिकवरी की है. RBI के डॉलर मांग घटाने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने वाले कदमों से घरेलू करेंसी को सहारा मिला. डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी रुपये की मजबूती में भूमिका निभाई.

- डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे मजबूत होकर 95.38 पर बंद हुआ. Image Credit: @Money9live

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली है. मंगलवार, 13 अक्टूबर को रुपया 40 पैसे मजबूत होकर 95.38 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की ओर से रुपये में गिरावट रोकने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदमों से घरेलू करेंसी को सहारा मिला है. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में रुपया कुल 1.50 रुपये मजबूत हो चुका है. इस दौरान डॉलर में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और शेयर बाजार में तेजी ने भी रुपये को सपोर्ट दिया.

डॉलर के मुकाबले रुपये में क्यों आई तेजी?

मंगलवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.53 प्रति डॉलर पर खुला. कारोबार के दौरान यह मजबूत होकर 94.96 के स्तर तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 95.53 रहा. अंत में रुपया 95.38 प्रति डॉलर के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. यानी एक दिन में रुपये में 40 पैसे की मजबूती दर्ज की गई. इससे पहले सोमवार को रुपया 93 पैसे चढ़ा था, जो छह महीने से ज्यादा समय में इसकी एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी.

RBI के किन कदमों से रुपये को मिला सहारा?

रुपये में मजबूती की बड़ी वजह RBI के हालिया कदम माने जा रहे हैं. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं. इसके तहत तेल विपणन कंपनियों के लिए चुनिंदा बैंकों के जरिए डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इससे इन कंपनियों की डॉलर की मांग सीधे स्पॉट मार्केट पर पड़ने का दबाव कम हो सकता है. इसके अलावा, फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव सौदों से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं, ताकि रुपये के खिलाफ बड़े सट्टा सौदों पर अंकुश लगाया जा सके.

डॉलर खरीदने पर बैंकों के लिए भी नियम सख्त

RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए बैंकों को भी निर्देश दिए हैं. केंद्रीय बैंक के कदमों के तहत 20 लाख डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर बैंकों को 20 फीसदी रिजर्व बनाए रखना होगा. इसके साथ ही, कुछ विदेशी मुद्रा हेजिंग सौदों की लागत बढ़ाई गई है. बाजार के जानकारों के मुताबिक, इन उपायों से डॉलर की स्पॉट मांग घट सकती है और रुपये के खिलाफ बड़े सट्टा दांव लगाने की प्रवृत्ति पर लगाम लग सकती है. हालांकि, इन कदमों का असर आने वाले दिनों में डॉलर की मांग और रुपये की चाल पर निर्भर करेगा.

वित्त मंत्री ने रुपये की गिरावट पर क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में काफी गिरावट आई है और RBI घरेलू करेंसी में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए प्रयास जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि रुपये में अस्थिरता की बड़ी वजह बाहरी चुनौतियां हैं. सरकार का कहना है कि देश के भीतर व्यापक आर्थिक बुनियादी स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है. रुपये की हालिया रिकवरी के बीच वित्त मंत्री का यह बयान अहम है, क्योंकि डॉलर की चाल और वैश्विक परिस्थितियां भारतीय करेंसी पर दबाव डाल सकती हैं.

डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी

मंगलवार को डॉलर इंडेक्स 0.26 फीसदी गिरकर 102.32 पर कारोबार कर रहा था. यह इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.93 फीसदी गिरकर 104.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को राहत मिल सकती है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है.

शेयर बाजार की तेजी से भी रुपये को मिला सपोर्ट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार तेजी रही. सेंसेक्स 1,109.10 अंक उछलकर 73,033.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 358.60 अंक बढ़कर 22,721.95 पर पहुंच ग

या. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली जारी रही. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 1,708.48 करोड़ रुपये निकाले थे. ऐसे में शेयर बाजार की तेजी से रुपये को कुछ सहारा जरूर मिला, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबावों पर आगे भी नजर रखना जरूरी होगा.

ये भी पढ़ें- टाटा संस में विवाद के बीच ₹10 लाख करोड़ का दांव! एन. चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर पर साफ किया रुख

आम आदमी पर रुपये की मजबूती का क्या असर होगा?

डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से आयात पर निर्भर कुछ वस्तुओं की लागत का दबाव कम हो सकता है. खासकर कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश से आने वाले दूसरे उत्पादों के आयात बिल पर इसका असर पड़ सकता है. इससे महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. वहीं, विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए डॉलर की कीमत में गिरावट राहत दे सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि रुपये की मजबूती कितने समय तक बनी रहती है और आयातक इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं या नहीं.