टाटा संस में विवाद के बीच ₹10 लाख करोड़ का दांव! एन. चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर पर साफ किया रुख

Tata Sons के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा है कि Tata Group सेमीकंडक्टर चिप जैसे अहम क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगा, भले ही प्रोजेक्ट पूरे होने में ज्यादा समय लगे. ग्रुप अगले विकास चरण के लिए 120 अरब डॉलर के निवेश पर दांव लगा रहा है.

N Chandrasekaran Image Credit: tv9 bharatvarsh

Tata Sons के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा है कि Tata Group दुनिया और भारत की जरूरतों के हिसाब से काम करता रहेगा. सेमीकंडक्टर चिप बनाने जैसे प्रोजेक्ट में ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन ग्रुप इन पर काम जारी रखेगा. उन्होंने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 2026 Bloomberg New Economy Forum में कही. यह बयान ऐसे समय आया है, जब टाटा ग्रुप के भीतर बोर्डरूम विवाद भी चल रहा है.

चंद्रशेखरन ने कहा, “दिशा निश्चित है, जरूरत निश्चित है और काम को पूरा करने की क्षमता भी निश्चित है.” उन्होंने जोर दिया कि भारत के पास टैलेंट, बड़ा बाजार और निर्माण करने की क्षमता है. उनके मुताबिक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का दायरा बढ़ने के साथ दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप की जरूरत भी बुनियादी तौर पर बढ़ेगी.

₹120 अरब डॉलर के निवेश से ग्रुप की अगली ग्रोथ पर दांव

करीब 160 साल पुराने Tata Group ने पिछले वित्त वर्ष में 185 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया था. अब ग्रुप अपने अगले विकास चरण के लिए 120 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना पर दांव लगा रहा है. इसकी अहम कड़ी भारत की पहली चिप निर्माण इकाई है. यह प्रोजेक्ट भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा से जुड़ा है.

हालांकि, इस दिशा में चुनौतियां भी सामने आई हैं. Bloomberg News की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Tata Electronics देश के पहले बड़े पैमाने के चिप उत्पादन प्लांट पर काम कर रही है और उसे परिचालन से जुड़ी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

Tata Sons में चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेद

टाटा ग्रुप में निवेश और शेयरधारकों को रिटर्न देने की रणनीति को लेकर Tata Sons के चेयरमैन चंद्रशेखरन और Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं. Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है.

चंद्रशेखरन ने अगस्त में कहा था कि वह अगले साल फरवरी में अपना कार्यकाल खत्म होने पर पद छोड़ देंगे. उन्होंने इसकी वजह बोर्ड के सभी सदस्यों का एकमत समर्थन नहीं मिलना बताया था. विवाद की शुरुआत इससे पहले हुई थी. फरवरी में नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद बोर्ड ने इस पर फैसला टाल दिया था. इसके बाद Tata Trusts ने चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू की.

पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति पर बढ़ा विवाद

सितंबर में Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त कर दिया. हालांकि, बोर्ड में Tata Trusts के दो नामित सदस्यों में से एक नोएल टाटा ने इस फैसले के खिलाफ वोट दिया. इसके बाद Tata Trusts ने कानूनी सलाह का हवाला देते हुए चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को Tata Sons के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत अवैध बताया. Tata Sons ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया है. ऐसे में ग्रुप के नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई की आशंका बढ़ गई है.

चुनौतियों के बावजूद ग्रोथ पर नजर

एन. चंद्रशेखरन ने माना है कि ग्रुप इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है. टाटा ग्रुप की एयरलाइन Air India को पिछले साल बड़े विमान हादसे का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा साइबर हमले और सप्लाई चेन से जुड़ी बड़ी रुकावटें भी सामने आईं. इन चुनौतियों के बावजूद, खबर के मुताबिक ग्रुप के मार्जिन स्थिर रहे हैं और ग्रोथ दोहरे अंकों में बनी हुई है. सेमीकंडक्टर जैसे बड़े प्रोजेक्ट में समय और परिचालन संबंधी चुनौतियों के बीच चंद्रशेखरन का संदेश साफ है कि Tata Group भारत की लंबी अवधि की जरूरतों के मुताबिक निवेश और निर्माण जारी रखेगा.

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