…तो इसलिए टाटा संस की लिस्टिंग नहीं चाहते नोएल, कहा- क्या होगा अगर कोई कंपनी मुश्किल में फंस जाए?

उनका तर्क है कि लिस्टिंग से टाटा ग्रुप के पिछले 150 वर्षों से चले आ रहे कामकाज के तरीके में बुनियादी बदलाव आ जाएगा. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा कि पिछले 50 साल में ऐसे कई मौके आए हैं जब ग्रुप कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा और टाटा संस ने मदद की.

नोएल टाटा Image Credit: TV9 Bharatvarsh

टाटा संस के बोर्ड में जारी विवाद के बीच टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने लिस्टिंग को लेकर पहली बार एक पब्लिक इंटरव्यू में खुलकर अपनी बात कही है. नोएल टाटा ने कहा है कि टाटा संस को अनलिस्टेड ही रहना चाहिए. उनका तर्क है कि लिस्टिंग से टाटा ग्रुप के पिछले 150 वर्षों से चले आ रहे कामकाज के तरीके में बुनियादी बदलाव आ जाएगा. पब्लिक लिस्टिंग से टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की मुश्किल में फंसी ग्रुप कंपनियों की मदद करने की क्षमता सीमित हो सकती है.

टाटा संस की भूमिका

रिपब्लिक टीवी के इंटरव्यू में नोएल टाटा ने कहा कि जब भी ग्रुप की किसी कंपनी पर कोई मुश्किल आई है, टाटा संस ने हमेशा उसे सहारा दिया है. टाटा संस की 66% हिस्सेदारी रखने वाली चैरिटीज के प्रमुख नोएल ने बताया कि बैंक, लोन देने वाली एजेंसियां, शेयरहोल्डर्स और सप्लायर्स को हमेशा इस बात से भरोसा मिला है.

जब नोएल से टाटा संस के लिए स्ट्रैटेजिक प्लान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ग्रुप का मकसद सामाजिक विकास है. यह पारंपरिक रूप से पूर्व चेयरमैन जेआरडी टाटा के बताए सिद्धांत का पालन करता रहा है.

लिस्टिंग के बाद क्या आएंगी मुश्किलें?

उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस लिस्टेड कंपनी बन जाती है, तो उसे ऐसे निवेशकों से निपटना होगा जो मुनाफा चाहते हैं और चाहते हैं कि उनका निवेश हर तिमाही में बढ़े. उन्होंने कहा कि यह ग्रुप के सामाजिक विकास के बड़े मकसद से टकरा सकता है.

नोएल ने कहा, ‘जब आपके पास निवेशक हों और वे विदेशी निवेशक भी हो सकते हैं जो मुनाफा कमाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका निवेश हर तिमाही में बढ़े, तो आप इन दोनों चीजों में तालमेल कैसे बिठाएंगे? हम इन दो विरोधाभासी बातों को कैसे संभालेंगे?’

बदल जाएगा बुनियादी ढांचा

नोएल ने कहा, ‘अब चिंता इस बात की है कि जब अलग-अलग शेयरहोल्डर होंगे, तो क्या वे इसके लिए सहमत होंगे और क्या वे हमें मुश्किल दौर से गुजर रही कंपनियों में निवेश करने की इजाजत देंगे. हमें लगता है कि ये बातें उस बुनियादी ढांचे को बदल देंगी जिसके तहत यह ग्रुप पिछले 150 सालों से काम कर रहा है.’

17 सितंबर को हुई एक हंगामेदार बैठक में, टाटा संस बोर्ड ने लिस्टिंग करने और नटराजन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने के फैसले में नोएल के खिलाफ वोट दिया.

बैकस्टॉप के तौर पर टाटा संस

नोएल ने कहा कि टाटा की ऑपरेटिंग कंपनियां पहले से ही पब्लिक कंपनियां हैं और उन्हें रिटर्न देकर शेयरहोल्डर्स के हितों का ध्यान रखना होता है. लेकिन उन्होंने कहा कि टाटा संस एक अलग भूमिका निभाती है, क्योंकि ऑपरेटिंग कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड पर हर तिमाही रिटर्न देने का वैसा दबाव नहीं होना चाहिए.

नोएल ने मुश्किल में फंसी ग्रुप कंपनियों के लिए बैकस्टॉप के तौर पर टाटा संस की भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब भी हमारी कोई कंपनी मुश्किल में फंसी है, टाटा संस हमेशा मदद के लिए आगे आई है.

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा कि पिछले 50 साल में ऐसे कई मौके आए हैं जब ग्रुप कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा और टाटा संस ने मदद की. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रुप कंपनियों के साथ टाटा संस के खड़े होने से बैंकों, लोन देने वाली एजेंसियों, शेयरहोल्डर्स और सप्लायर्स को भी भरोसा मिला है.

टाटा संस का प्रस्तावित रीस्ट्रक्चरिंग

सोमवार को, टाटा ट्रस्ट्स ने प्रस्ताव दिया कि टाटा संस अपनी दो अनलिस्टेड यूनिट्स- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स- के साथ विलय कर ले, ताकि लिस्टिंग के आदेश से बचा जा सके.

नोएल ने कहा कि इस प्रस्ताव से टाटा संस का ढांचा ऐसा हो जाएगा जिसमें एक ही कंपनी के तहत ‘ऑपरेटिंग और फाइनेंशियल’ दोनों तरह के कारोबार होंगे.

उन्होंने कहा कि भारत की दूसरी होल्डिंग कंपनियों में यह बहुत आम बात है जो इन दोनों पैमानों पर काम करती हैं. इस प्रस्ताव को अभी टाटा संस बोर्ड और RBI की मंजूरी की जरूरत है.

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