TCS-Infosys धड़ाम, बिकवाली के दबाव से 2.3% टूटा निफ्टी IT इंडेक्स, IT स्टॉक्स में आया ‘भूचाल’

भारतीय IT स्टॉक्स में भारी गिरावट आई, जिसमें निफ्टी IT इंडेक्स 2.3 फीसदी नीचे आ गया क्योंकि इन्वेस्टर्स एआई से होने वाली दिक्कत, ग्लोबल अनिश्चितता और बढ़े हुए वैल्यूएशन पर ध्यान दे रहे थे. ब्रोकरेज को रिकवरी और वैल्यूएशन री-रेटिंग की संभावना दिख रही है.

आईटी स्टॉक्स Image Credit: मनी9लाइव

IT Stocks: आज मंगलवार, 27 अक्टूबर को आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली का दबाव रहा, क्योंकि इन्वेस्टर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं, ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता और हाई वैल्यूएशन के बीच सेक्टर की ग्रोथ की संभावनाओं का फिर से आकलन किया. इस बिकवाली से निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.3 फीसदी नीचे चला गया, जिससे यह दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स बन गया, जबकि निफ्टी 50 में 0.4 फीसदी की गिरावट आई.

इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों ने सेक्टर को नीचे खींच लिया, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या करेक्शन प्रॉफिट लेने का एक टेम्पररी दौर है या यह चेतावनी है कि आईटी सर्विस मॉडल को और मुश्किल ग्रोथ माहौल का सामना करना पड़ रहा है.

इन IT Shares में दिखी गिरावट

लाइव मिंट के मुताबिक, पूरे IT सेक्टर में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई, जिसमें कई लार्ज-कैप और मिड-कैप कंपनियों ने इंट्राडे ट्रेड के दौरान अपनी पकड़ खो दी. TCS और इंफोसिस 3 फीसदी तक गिरे, जबकि परसिस्टेंट सिस्टम्स और विप्रो में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. HCL टेक्नोलॉजीज, एम्फैसिस, टेक महिंद्रा और कोफोर्ज में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज का शेयर लगभग 1 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहा था.

सेक्टर में अच्छे परफॉर्मेंस के बावजूद यह तेज गिरावट आई. निफ्टी IT इंडेक्स पिछले महीने 12 फीसदी, तीन महीनों में 8 फीसदी और छह महीनों में 9 फीसदी बढ़ा था. हालांकि, इंडेक्स पिछले साल 12 फीसदी नीचे रहा जिससे पता चलता है कि हाल ही में सुधार ने अभी तक इसकी लंबे समय की गिरावट से हुए नुकसान को मिटाया नहीं है.

क्यों गिर रहे हैं आईटी स्टॉक्स?

आईटी कंपनी के शेयर्स पर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि एआई से चलने वाला ऑटोमेशन आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स में रुकावट डाल सकते हैं. एआई प्लेटफॉर्म्स के तेजी से विस्तार को लेकर इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ गई है, जिसमें एंथ्रोपिक के संभावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन पर रोशनी डालने वाली रिपोर्ट्स भी शामिल हैं.

भारतीय आईटी सर्विस कंपनियों के लिए चुनौती सिर्फ नई टेक्नोलॉजी अपनाने से कहीं ज्यादा मुश्किल है. उनके ट्रेडिशनल बिजनेस मॉडल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मेंटेनेंस, टेस्टिंग और दूसरी टेक्नोलॉजी सर्विस के लिए स्किल्ड कर्मचारियों को रखने पर बहुत ज्यादा निर्भर रहे हैं और अक्सर क्लाइंट से समय और रिसोर्स के आधार पर चार्ज करते हैं. अगर एआई टूल कस्टमर को कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम ऑटोमेट करने देते हैं तो ट्रेडिशनल सर्विस की मांग कम हो सकती है.

इसके अलावा, ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक हालात भी दबाव बढ़ा रहे हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है जबकि विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर के लगातार निकलने से घरेलू बाजार की धारणा पर असर पड़ा है. तेल की ज्यादा कीमतें भारत के लिए खास तौर पर मुश्किल हैं क्योंकि इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और ब्याज दरों और रुपए के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय करेंसी भी लगातार तीसरे सेशन में कमजोर हुई जो यूएस डॉलर के मुकाबले 25 पैसे गिरकर 95.19 पर बंद हुई. डॉलर इंडेक्स 101.80 से ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि यूएस 10 साल की ट्रेजरी यील्ड लगातार तीसरे सेशन में 5 फीसदी से नीचे रही. इन डेवलपमेंट्स की वजह से इन्वेस्टर्स को एक्सपोर्टर्स के लिए कमजोर रुपए के संभावित फायदे और ग्लोबल अनिश्चितता और विदेशी फंड के आउटफ्लो से होने वाले बड़े रिस्क के बीच बैलेंस बनाना पड़ रहा है.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है.

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