Opening Bell: सेंसेक्स 300 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 22700 के नीचे; एशियन पेंट्स और इंफोसिस में 1-1% की गिरावट
Opening Bell: तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आने के कारण, अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी देखी गई. जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी क्रमशः 1.85 प्रतिशत और 4.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे.

Opening Bell: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच, 27 अक्टूबर को भारतीय इंडेक्स गिरावट के साथ खुले, जिसमें निफ्टी 22700 के स्तर पर रहा.
सेंसेक्स 225.19 अंक या 0.31 फीसदी की गिरावट के साथ 73,381.56 पर और निफ्टी 61.80 अंक या 0.27 फीसदी की गिरावट के साथ 22,691.40 पर आ गया. लगभग 1244 शेयरों में तेजी आई, 1000 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 158 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी पर सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वालों में टाटा कंज्यूमर, बीएसई लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैब्स, एनटीपीसी और श्रीराम फाइनेंस शामिल थे, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील, एचयूएल, एचसीएल टेक, टाटा स्टील और ग्रासिम में गिरावट देखने को मिली.
सेंसेक्स पैक में BEL, मारुति, इटरनल, पावर ग्रिड और NTPC टॉप गेनर्स रहे. इन्फोसिस, TCS, HUL और एशियन पेंट्स सबसे ज्यादा नुकसान में रहे.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टर के मोर्चे पर, निफ्टी IT इंडेक्स सबसे अधिक गिरा. इसमें 1.7 फीसदी की गिरावट आई.
बाजार पर दबाव क्यों?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वी.के. विजयकुमार ने कहा, ‘ब्रेंट क्रूड का 114 अमेरिकी डॉलर से ऊपर बने रहना और US 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का लगभग 4.97 फीसदी के आसपास रहना, बाजार के लिए निकट अवधि में चुनौतियां पैदा कर रहा है. इस कठिन मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल में, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) जोखिम लेने से बचेंगे.
हालांकि, दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजों में कॉरपोरेट सेक्टर के बेहतर होते फंडामेंटल्स और घरेलू फंडों का मजबूत फ्लो बाजार को सहारा देना जारी रखेगा.’
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,462.49 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
US फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म ‘एनरिच मनी’ (Enrich Money) के CEO पोनमुडी आर. ने कहा, ‘कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों (WTI क्रूड 101 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब) के बीच भारतीय इक्विटी बाजारों में सतर्कता बनी रहने की संभावना है.
US फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों का रुख भी सतर्क रह सकता है, क्योंकि बाजार भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेतों का इंतजार कर रहा है. फेड के नजरिए में कोई भी बदलाव US ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर उभरते बाजारों (Emerging Markets) में आने वाले विदेशी निवेश पर पड़ सकता है.’