Tata Chemicals का शेयर बना रॉकेट, 20% चढ़कर अपर सर्किट पर! एक खबर ने किया बड़ा कमाल
RBI की ओर से Tata Sons की Core Investment Company से बाहर निकलने की अर्जी खारिज किए जाने की खबर के बाद Tata Chemicals का शेयर 20 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया. Tata Investment Corporation में भी 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही.

Tata Chemicals Share: टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में मंगलवार, 15 सितंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली. Tata Chemicals का शेयर 20 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया. शेयर में इस तेजी की बड़ी वजह Tata Sons को लेकर आई खबर है. दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने Tata Sons की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने खुद को Core Investment Company के तौर पर रजिस्ट्रेशन से बाहर करने की मांग की थी. इस फैसले के बाद Tata Sons के शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना फिर मजबूत हो गई है.
Tata Sons ने RBI से क्या मांग की थी?
Tata Sons टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है. इसके पास Tata Consultancy Services, Tata Motors, Tata Steel और Air India समेत समूह की कई कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. कंपनी लंबे समय से निजी कंपनी के तौर पर बने रहना चाहती थी.
Tata Sons को RBI ने सितंबर 2022 में Upper Layer NBFC की श्रेणी में रखा था. इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर ज्यादा सख्त नियामकीय नियम लागू होते हैं और उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी होता है.
Tata Sons ने इस नियम से बाहर निकलने के लिए मार्च 2024 में RBI के पास अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी दी थी. कंपनी का तर्क था कि अगर उसे Core Investment Company के तौर पर NBFC ढांचे से बाहर निकलने की मंजूरी मिल जाती है, तो वह निजी कंपनी बनी रह सकती है.
RBI के फैसले के बाद अब क्या होगा?
RBI का फैसला शनिवार को Tata Sons के कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी को मिले पत्र के जरिए बताया गया. अर्जी खारिज होने के बाद Tata Sons Upper Layer NBFC के तौर पर बनी रहेगी. इस श्रेणी के NBFC के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग की शर्त लागू होती है. Tata Sons के लिए मूल लिस्टिंग की समयसीमा 30 सितंबर 2025 थी. कंपनी ने इस समयसीमा से पहले NBFC ढांचे से बाहर निकलने का रास्ता तलाशा था, लेकिन RBI ने उसकी अर्जी पर फैसला लंबित रखा था.
अब अर्जी खारिज होने से निजी बने रहने के लिए Tata Sons के पास मौजूद प्रमुख नियामकीय रास्ता बंद हो गया है. कंपनी की संपत्ति भी RBI के बड़े NBFC के लिए तय 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा से काफी ज्यादा है. मार्च 2025 तक Tata Sons की स्टैंडअलोन संपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये थी.
Tata Chemicals का शेयर क्यों उछला?
Tata Sons में टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों की हिस्सेदारी है. ऐसे में Tata Sons की संभावित लिस्टिंग की खबर का असर इन कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है. Tata Steel और Tata Motors Passenger Vehicles के पास Tata Sons में 3.06-3.06 फीसदी हिस्सेदारी है. Tata Chemicals की हिस्सेदारी 2.53 फीसदी है. इसके अलावा Tata Power के पास 1.65 फीसदी, Indian Hotels के पास 1.11 फीसदी, Tata Consumer के पास 0.40 फीसदी और Tata Investment Corporation के पास 0.25 फीसदी हिस्सेदारी है.
यही वजह है कि Tata Sons की लिस्टिंग की संभावना बढ़ने की खबर से इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है. मंगलवार को Tata Chemicals 20 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया और Tata Investment Corporation में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही.
Tata Sons की लिस्टिंग से क्या बदलेगा?
अगर Tata Sons शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो यह टाटा समूह के लिए बड़ा बदलाव होगा. अभी यह एक निजी होल्डिंग कंपनी है, जिसके पास टाटा समूह की कई लिस्टेड और गैर-लिस्टेड कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है. लिस्टिंग के बाद Tata Sons को नियमित तौर पर अपने वित्तीय प्रदर्शन, निवेश और पूंजी के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. इससे कंपनी के वित्त, निवेश के फैसलों और अलग-अलग टाटा कंपनियों में उसकी हिस्सेदारी की वैल्यू को लेकर बाजार में ज्यादा पारदर्शिता आएगी.
साथ ही, सार्वजनिक शेयरधारकों के आने से कंपनी पर अपने निवेश और पूंजी के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा जवाबदेही भी होगी.
Tata Sons और RBI का विवाद कब शुरू हुआ?
इस पूरे मामले की शुरुआत अक्टूबर 2021 में हुई, जब RBI ने NBFC के लिए स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू किया. इसके तहत NBFC को बेस, मिडिल, अपर और टॉप लेयर में बांटा गया और जैसे-जैसे स्तर बढ़ता है, नियामकीय नियम भी सख्त होते जाते हैं. सितंबर 2022 में RBI ने Tata Sons को Upper Layer NBFC की श्रेणी में रखा. इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना था. Tata Sons की शुरुआती समयसीमा 30 सितंबर 2025 थी.
कंपनी ने इस नियम से बाहर निकलने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाया और अपना Core Investment Company रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए RBI में आवेदन किया. RBI ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा, जबकि Tata Sons को Upper Layer NBFC की सूची में शामिल करता रहा.
अब RBI की ओर से अर्जी खारिज किए जाने के बाद Tata Sons के लिए लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बढ़ गया है. हालांकि, इस खबर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि Tata Sons की लिस्टिंग की तारीख या IPO की प्रक्रिया तय हो गई है. अभी खबर का मुख्य असर यह है कि कंपनी को NBFC नियमों से बाहर निकलने की कोशिश में RBI से मंजूरी नहीं मिली है.
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