भारत पर नहीं लगेगा टैरिफ, रूस से तेल खरीदने वाले देशों को बड़ी राहत, ट्रंप का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की घोषणा की है कि रूस से गैस और तेल खरीदने वाले देशों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा, इस ऐलान से भारत समेत पांच देशों को बड़ा फायदा होगा.

डोनाल्ड ट्रंप Image Credit: Andrew Harnik/Getty Images

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात का ऐलान किया है कि रूस से गैस और तेल खरीदने पर भारत समेत पांच देशों पर कोई भी टैरिफ नहीं लगेगा. डोनाल्ड ट्रंप का ये ऐलान भारत और चीन के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. ट्रंप के मुताबिक, यह रोक देश के हित में लगाई गई है.

शुक्रवार देर रात जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ट्रंप ने कहा, मैं ग्राहम एक्ट में दिए गए ऐसे बैन, रोक और ड्यूटी को लागू करने से छूट दे रहा हूं. मैंने कांग्रेस को एक सर्टिफिकेट दिया है कि इस समय ऐसी छूट देना यूनाइटेड स्टेट्स के देश के हित में है.

हालांकि, यह निर्देश सिर्फ रूस से जुड़े टैरिफ को लागू करने से रोकता है, इसका मतलब है कि ट्रंप चाहें तो उन्हें बाद में भी लागू कर सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कानून पर साइन किया था जिसका नाम सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया था जो वाशिंगटन में यूक्रेन के पक्के सपोर्टर में से एक है. इस साल जुलाई में Kyiv की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई.

रूसी तेल के ये हैं टॉप 5 खरीदार

इस कदम से ट्रंप को रूसी कच्चे तेल के टॉप पांच खरीदारों चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के सभी सामानों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए 30 दिन का समय मिला था. साथ ही, कई रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और रूसी एनर्जी प्रोडक्ट्स के सभी अमेरिकी इंपोर्ट पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का भी आदेश दिया गया था. एक महीने की डेडलाइन कल 18 अक्टूबर को खत्म होने वाली थी.

क्या है ये कानून?

इस कानून का मकसद यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई को बनाए रखने वाले फाइनेंशियल रिसोर्स को कम करना था और इसका मकसद रूसी अधिकारियों, बैंकों, एनर्जी कंपनियों और मॉस्को के मिलिट्री ऑपरेशन्स को सपोर्ट करने वाली विदेशी कंपनियों को टारगेट करना था. इस कानून ने ट्रंप को रूस के साथ बिजनेस करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का भी अधिकार दिया ताकि वे रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम कर सकें. इसके अलावा, इसमें रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और रूसी सरकार के सीनियर लोगों के खिलाफ प्रतिबंध भी शामिल थे.

इससे रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो जाता, जिससे भारत और चीन उन 10 देशों में शामिल हो जाते जो खतरे में हैं.

भारत पर असर

अगर ट्रंप ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया होता तो यह उस 10 फीसदी टैरिफ के ऊपर होता जो यूएस अभी नई दिल्ली से इम्पोर्ट पर जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इम्पोर्ट को रोकने के लिए काफी कुछ न करने पर पेनल्टी के तौर पर लगाता है. हालांकि, भारतीय एक्सपोर्ट पर नए टैरिफ का सही असर टैरिफ रेट की घोषणा के बाद ही पता चल पाता.

भारत और US के बीच पिछले साल तब रिश्ते खराब हो गए थे जब ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल के भारतीय इम्पोर्ट पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के अलावा 25 फीसदी का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था. हालांकि, एक्स्ट्रा टैरिफ फरवरी 2026 में हटा दिए गए, जबकि यूएस-भारत ट्रेड फ्रेमवर्क के हिस्से के तौर पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया.

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