ग्लोबल स्लोडाउन से उबर जाएगा भारत, IMF ने बढ़ाया ग्रोथ का अनुमान, 2026 में 7% रह सकती है विकास दर
वर्ल्ड बैंक और OECD ने अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं, जबकि दूसरी बड़ी एजेंसियां भी लगभग 7% की ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं. फंड ने इस बेहतर अनुमान का कारण मजबूत घरेलू मांग और जबरदस्त सर्विस एक्टिविटी को बताया.

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने मंगलवार को 2026 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान जुलाई में बताए गए 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया. इसके पीछे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद उम्मीद से अधिक तेजी, मजबूत घरेलू मांग और जबरदस्त सर्विस एक्टिविटी जैसे कारण बताए गए हैं. इससे दुनिया भर के अनुमान लगाने वालों के बीच यह आम राय और मजबूत हुई है कि उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही (Q1) के नतीजों के बाद भारत की ग्रोथ उम्मीद से अधिक मजबूत बनी हुई है.
क्यों बेहतर हुई हैं ग्रोथ की संभावनाएं?
वर्ल्ड बैंक और OECD ने अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं, जबकि दूसरी बड़ी एजेंसियां भी लगभग 7% की ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं, जो भारत की आर्थिक रफ्तार पर भरोसा दिखाता है. फंड ने कहा कि लगातार बनी हुई रफ्तार, अनुकूल डेमोग्राफिक्स (जनसांख्यिकी), बड़े और बढ़ते घरेलू बाजार और लगातार हो रहे स्ट्रक्चरल सुधारों की वजह से भारत की लंबी अवधि की संभावनाएं बेहतर हुई हैं.
IMF ने अपनी अक्टूबर 2026 की ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा, ‘भारत के अनुमानों में बढ़ोतरी इसे अलग बनाती है और मजबूत ग्रोथ की संभावनाओं के बढ़ते सबूतों की ओर इशारा किया.
घरेलू मांग की वजह से अनुमान में बढ़ोतरी
IMF ने जुलाई के अनुमान के मुकाबले 2026 के लिए अपनी ग्रोथ का अनुमान 0.6 फीसदी अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 फीसदी अंक बढ़ाया है. 2027 के लिए भी इसका अनुमान बढ़कर 7 फीसदी हो गया है, जो जुलाई से 0.3 फीसदी अंक और अप्रैल से 0.5 फीसदी अंक अधिक है.
मजबूत घरेलू मांग और सर्विस एक्टिविटी
फंड ने इस बेहतर अनुमान का कारण मजबूत घरेलू मांग और जबरदस्त सर्विस एक्टिविटी को बताया, जिससे ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद ग्रोथ बनाए रखने में मदद मिली.
वर्ल्ड बैंक ने भी अपने ताजा बदलाव में एनर्जी की कीमतों में अचानक उछाल के असर को कम करने के लिए मजबूत घरेलू खपत का जिक्र किया, साथ ही तेल की ऊंची कीमतों और अल नीनो के जोखिमों की ओर भी इशारा किया. ये बदलाव ऐसे समय में हुए हैं जब ग्लोबल माहौल कुछ धीमा है.
वर्ल्ड ग्रोथ अनुमान
IMF ने 2026 में वर्ल्ड ग्रोथ 3.1% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान लगाया, जबकि उभरते और विकासशील एशिया में ग्रोथ 2025 में 5.6% से घटकर 2026 में 5.1% और 2027 में 4.9% होने की उम्मीद थी.
चीन की ग्रोथ 2026 में धीमी होकर 4.5% और 2027 में 4% होने का अनुमान लगाया गया, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें, लंबे समय तक बनी अनिश्चितता और स्ट्रक्चरल रुकावटों ने एक्टिविटी पर असर डाला.
ग्रोथ के बड़े इंजन
IMF की इकोनॉमिक काउंसलर और रिसर्च डिपार्टमेंट की डायरेक्टर सिल्वाना टेनरेरो ने कहा, ‘यह क्षेत्र (एशिया) बहुत मजबूत रहा है, भले ही इसकी अर्थव्यवस्थाएं एनर्जी और अन्य कमोडिटी की नेट आयातक हैं. AI के तेजी से विकास ने कमोडिटी मार्केट से आई रुकावटों के असर को काफी हद तक खत्म कर दिया है, और चीन तथा भारत ग्रोथ के बड़े इंजन के तौर पर उभरे हैं.’
टेनरेरो ने कहा कि चीन और भारत के लिए ग्रोथ के अनुमानों को बढ़ाया गया है, जिसमें भारत के अनुमान में काफी बढ़ोतरी हुई है.
भारत ने कमजोर ट्रेंड को पीछे छोड़ा
IMF ने अनुमान लगाया कि 2028-31 के दौरान ग्लोबल आउटपुट औसतन सालाना 3.2% की दर से बढ़ेगा, जो महामारी से पहले 2000-19 के दौरान दर्ज किए गए 3.7% के औसत से कम है. इसमें कहा गया है कि मध्यम अवधि में रेटिंग में गिरावट मुख्य रूप से उन अर्थव्यवस्थाओं में देखी गई जो पश्चिम एशिया के संघर्ष से सीधे प्रभावित हैं और जो ऊर्जा का आयात करने वाली उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हैं. हालांकि, भारत इसका अपवाद है.
बरकरार हैं जोखिम
फंड ने भारत के बेहतर आउटलुक का श्रेय लगातार बनी हुई आर्थिक गति और विकास की मजबूत संभावनाओं को दिया है, जिसे अनुकूल डेमोग्राफिक स्थिति, बढ़ते घरेलू बाजार और संरचनात्मक सुधारों का समर्थन मिला है.
हालांकि, बेहतर अनुमानों के बावजूद अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जोखिम खत्म नहीं हुए हैं. तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए एक कमजोरी बनी हुई हैं, जबकि लगातार बनी हुई वैश्विक अनिश्चितता मांग और विकास पर असर डाल सकती है.