नोएल टाटा को 19 अक्टूबर तक देना होगा जबाव, टाटा संस के कामकाज में ट्रस्ट्स की भागीदारी पर उठे हैं सवाल
Tata Trust Controversy: SDTT के वाइस-चेयरमैन और ट्रस्टी श्रीनिवासन और सिंह ने 'गवर्नेंस में गंभीर खामियों' का आरोप लगाया है. नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं. इसके तहत आने वाले ट्रस्ट मिलकर टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी रखते हैं.
Highlights
- ट्रस्ट मिलकर टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी रखते हैं.
- SP ग्रुप की अभी अनलिस्टेड टाटा संस में 18% से अधिक हिस्सेदारी है.
- 19 अक्टूबर तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है.
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT), नोएल टाटा और अन्य को 19 अक्टूबर तक जवाब देने का समय दिया है. ट्रस्ट के सदस्यों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के कामकाज और गवर्नेंस की तुरंत जांच की मांग की थी. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, SDTT, नोएल टाटा और अन्य ने शुरू में 12 अक्टूबर की डेडलाइन के बाद अपनी बात रखने के लिए दो और हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन अब उन्हें 19 अक्टूबर तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है.
गवर्नेंस में गंभीर खामियों का आरोप
SDTT के वाइस-चेयरमैन और ट्रस्टी श्रीनिवासन और सिंह ने ‘गवर्नेंस में गंभीर खामियों’ का आरोप लगाया है. उन्होंने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस के कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक मामलों में ट्रस्ट की भागीदारी पर सवाल उठाए हैं. नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं. इसके तहत आने वाले ट्रस्ट मिलकर टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी रखते हैं.
ट्रस्ट की बढ़ती भागीदारी
SDTT और सर रतन टाटा ट्रस्ट्स (SRTT) मिलकर ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में 51.54% हिस्सेदारी रखते हैं. श्रीनिवासन और सिंह ने नोएल टाटा की नियुक्ति और उनके हमेशा के लिए ट्रस्टी बने रहने (जो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बनने का आधार है), नेविल टाटा की नियुक्ति और फैसला लेने की प्रक्रिया से श्रीनिवासन को बाहर रखने पर चिंता जताई है. TVS ग्रुप के प्रमुख श्रीनिवासन, टाटा संस बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं.
ट्रस्टीज की बढ़ती भागीदारी पर सवाल
राज्य चैरिटी कमिश्नर को दिए गए एक विस्तृत पत्र में श्रीनिवासन ने टाटा संस के बिजनेस फैसलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उनके ट्रस्टीज की बढ़ती भागीदारी पर सवाल उठाए. उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स के 17 सितंबर के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें होल्डिंग कंपनी को लिस्ट करने के विकल्पों पर विचार करने और शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप को लिक्विडिटी (नकद) देने के लिए नोएल टाटा के प्रस्ताव की बात कही गई थी. SP ग्रुप की अभी अनलिस्टेड टाटा संस में 18% से अधिक हिस्सेदारी है.
लिस्टिंग के विकल्प
ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड को 28 सितंबर को लिखे एक पत्र में एक प्रस्तावित पुनर्गठन (Reorganisation) पर विचार करने को कहा था, जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय शामिल था. प्रेस रिलीज के साथ भेजे गए इस पत्र में कथित तौर पर SDTT और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) का प्रतिनिधित्व किया गया था, जो टाटा संस के दो सबसे बड़े शेयरधारक हैं.
इसके बाद श्रीनिवासन और सिंह ने 30 सितंबर को SDTT ट्रस्टियों को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें सार्वजनिक स्रोतों से इस पत्र और प्रेस रिलीज के बारे में पता चला, जिससे उन्हें हैरानी हुई. उन्होंने कहा कि पत्र भेजने से पहले प्रस्ताव पर चर्चा या विचार-विमर्श के लिए SDTT ट्रस्टियों की कोई बैठक नहीं हुई थी, और उन्हें यह भी नहीं पता था कि क्या अन्य ट्रस्टियों से सलाह ली गई थी.
चैरिटेबल फंड को खतरा
श्रीनिवासन ने तर्क दिया कि ट्रस्ट्स ने ‘टाटा संस से जुड़े बड़े कमर्शियल लेन-देन की पहचान करने, बातचीत करने और उन्हें लागू करने में सीधी भूमिका अपना ली है.’ उन्होंने कहा कि ऐसी भागीदारी SDTT के चैरिटेबल उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है और इससे इसके टैक्स-फ्री स्टेटस और चैरिटेबल फंड (कॉर्पस) को खतरा हो सकता है.
व्यापक स्तर पर, उनकी चिंताएं इस बात से जुड़ी हैं कि उनका आरोप है कि फैसले लेने की शक्ति ट्रस्टियों के एक छोटे समूह तक सीमित हो गई है और ट्रस्टियों को स्वतंत्र फ़ैसला लेने से रोकने की कोशिशें की जा रही हैं.
टाटा ट्रस्ट्स ने दायर की है कैविएट
इसके अलावा, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि SDTT को छोड़कर सात टाटा ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास 84 कैविएट (आपत्ति या सूचना की अर्जी) दायर की हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रस्ट्स से जुड़े मामलों में कोई भी आदेश पारित होने से पहले उनकी बात सुनी जाए. उन्होंने कहा कि उन फाइलिंग में नोएल टाटा और नेविल टाटा के नाम शामिल थे.
लोगों ने बताया कि SDTT के भीतर बढ़ते गवर्नेंस विवाद के बीच एहतियाती उपाय के तौर पर ये कैविएट दायर की गईं. इस विवाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और नेविल टाटा के खिलाफ कई व्यक्तिगत आरोप लगाए गए हैं. लोगों ने बताया कि मई में चैरिटी कमिश्नर ने SRTT के कामकाज पर रोक लगा दी थी, जिसकी वजह से जब तक यह रोक हटाई नहीं जाती, तब तक संस्था मीटिंग नहीं कर सकती.
टाटा संस में किस ट्रस्ट्स की कितनी हिस्सेदारी?
| क्रम संख्या | टाटा ट्रस्ट का नाम | टाटा संस में हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| 1 | सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) | 27.98% |
| 2 | सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) | 23.56% |
| 3 | JRD टाटा ट्रस्ट | 4.01% |
| 4 | टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट | 3.73% |
| 5 | RD टाटा ट्रस्ट | 2.19% |
| 6 | टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट | 3.73% |
| 7 | सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट | 0.10% |
| कुल | सातों ट्रस्ट की कुल हिस्सेदारी | 65.30% |
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