India-US Trade: 3 साल में 500 अरब डॉलर के पार होगा ट्रेड! सेमीकंडक्टर और डिफेंस सेक्टर पर रहेगा फोकस
भारत और अमेरिका ने अगले तीन साल में बाइलेटरल ट्रेड 500 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंचाने का टारगेट रखा है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच कारोबार 240 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. अब सेमीकंडक्टर, एनर्जी, डिफेंस और AI जैसे सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने पर जोर है.

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की तैयारी है. अमेरिका ने अगले तीन साल में भारत के साथ बाइलेटरल ट्रेड 500 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंचाने का टारगेट रखा है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मुंबई में आयोजित Freedom 250 कार्यक्रम में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कारोबार रिकॉर्ड 240 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है. अब सेमीकंडक्टर, एनर्जी, डिफेंस और महत्वपूर्ण खनिज जैसे सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
भारत-अमेरिका ट्रेड को मिलेगी नई रफ्तार
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें भारत में ठोस नतीजे हासिल करने के उद्देश्य से भेजा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है. अमेरिका का टारगेट मौजूदा 240 अरब डॉलर से ज्यादा के कारोबार को तीन साल में 500 अरब डॉलर के पार ले जाना है. इस टारगेट को हासिल करने के लिए दोनों देशों को व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाना होगा.
इन सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग
भारत और अमेरिका के बीच भविष्य की टेक्नोलॉजी और स्ट्रेटेजिक सेक्टर में साझेदारी बढ़ाने पर जोर है. इसमें सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, एनर्जी, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सेक्टर शामिल हैं. दोनों देश समुद्र के भीतर डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर अंतरिक्ष में बिजनेस एक्टिविटी तक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इस साझेदारी से टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर में निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक फायदा समझौतों और प्रोजेक्ट के लागू होने पर निर्भर करेगा.
मुंबई में 500 से ज्यादा अमेरिकी कंपनियां
सर्जियो गोर ने मुंबई को भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी का अहम केंद्र बताया. उनके मुताबिक, शहर में Google, Meta, IBM, Pfizer, Johnson & Johnson और JPMorgan Chase समेत 500 से ज्यादा बड़ी अमेरिकी कंपनियां काम कर रही हैं. अमेरिकी संस्थागत निवेशक भी भारतीय शेयर बाजार में विदेशी कैपिटल के प्रमुख सोर्स में शामिल हैं. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू कंपनियों में अमेरिकी निवेशकों की दिलचस्पी का पता चलता है.
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अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को 87.31 अरब डॉलर का कमोडिटी एक्सपोर्ट किया, जबकि अमेरिका से 53.45 अरब डॉलर का आयात हुआ. यानी वस्तुओं के व्यापार में भारत का निर्यात आयात से अधिक रहा. अब 500 अरब डॉलर से ज्यादा के कारोबार का टारगेट हासिल करने के लिए दोनों देशों को बाजार पहुंच, टैरिफ और व्यापार संबंधी बाधाओं पर सहमति बनानी होगी.