कॉलेज का एक असफल असाइनमेंट और Jio का आइडिया, ईशा अंबानी ने बताया कैसे हुई शुरुआत

ईशा अंबानी ने बताया कि कैसे कॉलेज में एक असफल असाइनमेंट ने जियो के आइडिया को जन्म दिया. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान इंटरनेट कनेक्शन की समस्या से उन्हें भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी की जरूरत का एहसास हुआ. इसके बाद जियो ने 2016 में अपनी सर्विस शुरू कीं और टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव आया. अब जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है.

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से करीब 30213 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. Image Credit:

कभी-कभी एक छोटी सी परेशानी बड़े बदलाव की वजह बन जाती है. रिलायंस जियो की शुरुआत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने बताया कि कॉलेज के एक असाइनमेंट को ऑनलाइन जमा नहीं कर पाने की परेशानी ने जियो के आइडिया को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान ईशा और उनके भाई आकाश अंबानी को भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी महसूस हुई. इसी अनुभव ने दोनों के बीच इस बात पर चर्चा शुरू की कि भारत में भी पश्चिमी देशों जैसी इंटरनेट सुविधा क्यों नहीं है. आगे चलकर यही सोच रिलायंस जियो की शुरुआत की वजह बनी. आज करीब एक दशक बाद जियो प्लेटफॉर्म्स अपना IPO लाने की तैयारी कर रही है.

कैसे आया Jio का आइडिया

ईशा अंबानी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जियो की शुरुआत से जुड़ा यह किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि वह और आकाश अंबानी अमेरिका में कॉलेज में पढ़ते थे. छुट्टियों के दौरान दोनों मुंबई आए हुए थे. इसी दौरान ईशा को अपना एक असाइनमेंट ऑनलाइन जमा करना था, लेकिन इंटरनेट ने काम नहीं किया और वह असाइनमेंट जमा नहीं कर पाईं.

ईशा के मुताबिक, इस घटना के बाद दोनों भाई-बहन के बीच चर्चा हुई कि भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी वैसी क्यों नहीं है, जैसी सुविधा उन्हें पश्चिमी देशों में मिलती थी. आकाश अंबानी का मानना था कि भारत की कनेक्टिविटी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी बनाई जानी चाहिए. इसी सोच ने आगे चलकर जियो के लिए आधार तैयार किया.

2016 में शुरू हुई जियो

रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में अपना कमर्शियल सर्विस शुरू की थीं. कंपनी ने शुरुआती दौर में मुफ्त वॉयस कॉल और सस्ता इंटरनेट डेटा उपलब्ध कराया. इससे देश में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा और ज्यादा लोगों के लिए इंटरनेट तक पहुंच आसान हुई.

जियो की एंट्री ने टेलीकॉम सेक्टर में कंपटीशन बढ़ा दी. दूसरी कंपनियों को भी अपनी सर्विस की कीमतों और कारोबारी रणनीति में बदलाव करना पड़ा. जियो का कारोबार धीरे-धीरे मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर डिजिटल सेवाओं और होम ब्रॉडबैंड तक पहुंच गया. अब कंपनी की पैरेंट इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है.

30000 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी

जियो प्लेटफॉर्म्स ने 14 अक्टूबर को IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी आरएचपी दाखिल किया. कंपनी ने IPO के लिए 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे.

IPO से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं. यह इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को निर्धारित है. कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने और बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल करेगी.

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ईशा अंबानी ने बताए कारोबार बढ़ाने के तीन सिद्धांत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईशा अंबानी ने रिलायंस के कारोबार को आगे बढ़ाने के तीन अहम सिद्धांत भी बताए. इनमें लंबी अवधि की योजना, बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करना और बेहतर तरीके से उसे लागू करना शामिल है. ईशा ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इस विचार के प्रति प्रतिबद्ध है कि देश के आर्थिक विकास में भारतीयों की भागीदारी बढ़नी चाहिए.