धीरूभाई के सपनों में मुकेश अंबानी ने लगाए 13 जीरो, ऐसे बदली Jio की तकदीर; ₹10.3 लाख करोड़ की हुई कंपनी
रिलायंस जियो ने साल 2016 में फ्री कॉलिंग और सस्ता इंटरनेट देकर भारतीय टेलीकॉम मार्केट की तस्वीर बदल दी. अब इसकी पैरेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स IPO के जरिए शेयर मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी का संभावित मूल्यांकन 10.3 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 108 अरब डॉलर हो सकता है. प्रस्तावित IPO से करीब 30000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. जानिए कैसे मुकेश अंबानी ने धीरूभाई अंबानी के सपने को डिजिटल दौर में नई पहचान दी.

मुकेश अंबानी ने अपने पिता धीरूभाई अंबानी के सपने को डिजिटल दौर में नई पहचान दी है. साल 2016 में रिलायंस जियो ने फ्री कॉलिंग और बेहद सस्ता इंटरनेट देकर देश के टेलीकॉम मार्केट में हलचल मचा दी थी. अब करीब एक दशक बाद जियो की पैरेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी के प्रस्तावित IPO में करीब 30000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है, जबकि इसका संभावित वैल्यूएशन 10.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी कंपनी की वैल्यू में 13 जीरो नजर आ सकते हैं. जियो का यह सफर दिखाता है कि कैसे बड़े निवेश, कम कीमत और करोड़ों ग्राहकों की रणनीति ने कंपनी की तकदीर बदल दी.
25 अरब डॉलर के निवेश से बदली टेलीकॉम की तस्वीर
रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में अपनी कमर्शियल सर्विस शुरू की थीं. इससे पहले कंपनी ने नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और टेक्नोलॉजी पर करीब 25 अरब डॉलर का निवेश किया. मुकेश अंबानी की रणनीति थी कि पहले देशभर में मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाए और फिर कम कीमत पर सर्विस देकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ा जाए.
जियो ने शुरुआत में फ्री वॉयस कॉल और बेहद सस्ते डेटा ऑफर दिए. इससे ग्राहकों को कम कीमत पर इंटरनेट इस्तेमाल करने का मौका मिला. दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी अपनी कीमतें घटानी पड़ीं. इस कंपटीशन के बीच कई कंपनियां मार्केट से बाहर हो गईं या दूसरी कंपनियों के साथ उनका विलय हो गया. इस तरह जियो की एंट्री ने पूरे टेलीकॉम सेक्टर का कारोबारी मॉडल बदल दिया.
फ्री कॉल से 5G तक, करोड़ों ग्राहकों का सफर
जियो की रणनीति केवल सस्ते इंटरनेट तक सीमित नहीं रही. साल 2017 में कंपनी ने जियोफोन पेश किया. इसका मकसद उन लोगों तक 4G कनेक्टिविटी पहुंचाना था, जो महंगे स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते थे. तय शर्तों के तहत 1500 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट पर फोन प्रभावी रूप से फ्री मिल सकता था.
धीरे-धीरे कंपनी ने अपनी सर्विस का विस्तार किया. 31 मार्च 2026 तक जियो के 26.85 करोड़ 5G ग्राहक थे. इसी तारीख तक जियोफाइबर और जियोएयरफाइबर के कुल 2.71 करोड़ ग्राहक थे. इससे साफ है कि कंपनी का कारोबार मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर घरों में ब्रॉडबैंड सेवाओं तक पहुंच गया है.
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO पर सबकी नजर
अब जियो प्लेटफॉर्म्स IPO के जरिए शेयर मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही है. ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी के मुताबिक, IPO के लिए 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है. इस आधार पर कंपनी का संभावित वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये यानी 108 अरब डॉलर हो सकता है.
कंपनी की योजना 27 करोड़ नए शेयर जारी करके करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की है. IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा टेलीकॉम सब्सिडियरी का कर्ज घटाने और बाकी सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों पर खर्च किया जाएगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि IPO जियो प्लेटफॉर्म्स का है, न कि केवल टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का.
धीरूभाई का सपना, मुकेश अंबानी ने दिया डिजिटल रूप
धीरूभाई अंबानी चाहते थे कि फोन पर बात करना आम आदमी के लिए भी सस्ता हो. मुकेश अंबानी ने इसी सोच को इंटरनेट के दौर में आगे बढ़ाया. जियो ने डेटा की कीमत कम करके वीडियो देखने, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन पढ़ाई और ई-कॉमर्स जैसी सर्विस के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया.
हालांकि, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास में सरकारी योजनाओं, यूपीआई, बैंकिंग सेवाओं और स्मार्टफोन की उपलब्धता की भी अहम भूमिका रही है. अब जियो के सामने चुनौती अपने बड़े ग्राहक आधार से ज्यादा कमाई करने और 5G, ब्रॉडबैंड तथा नई तकनीकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की है. सस्ती कॉलिंग से शुरू हुआ जियो का सफर अब लाखों करोड़ रुपये के संभावित वैल्यूएशन तक पहुंच गया है.