पैरेंटल लीव ली तो छीन ली नौकरी, अब इस बैंक को देना होगा 18.5 करोड़ का मुआवजा
Goldman Sachs के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जोनाथन रीव्स को गलत तरीके से नौकरी से निकाल देने और पैटरनिटी लीव के दौरान उनके साथ भेदभाव करने पर लंदन ट्रिब्यूनल ने इस दिग्गज बैंक को 18.5 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

नए पेरेंट्स के लिए पैरेंटल लीव का मतलब परिवार के साथ समय बिताना होता है. Goldman Sachs के एक एग्जीक्यूटिव के लिए यह एक कानूनी लड़ाई बन गई, जिसका अंत £1.45 मिलियन (लगभग 18.5 करोड़) के ट्रिब्यूनल अवॉर्ड के साथ हुआ.लंदन के एक एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने Goldman Sachs को पूर्व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जोनाथन रीव्स को मुआवजा देने का आदेश दिया है.ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया है कि पैटरनिटी लीव के दौरान उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया था और उनके साथ डिस्क्रिमिनेशन (भेदभाव) हुआ था.
रॉयटर्स के मुताबिक, रीव्स Goldman Sachs के लंदन कंप्लायंस डिवीजन में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कंट्रोल रूम के डिप्टी हेड के तौर पर काम करते थे.उन्होंने बैंक में करीब 15 साल बिताए और 2011 से 2019 के बीच उन्हें लगातार बैंक के टॉप परफॉर्म करने वाले कर्मचारियों में गिना जाता था.ट्रिब्यूनल ने Goldman Sachs की इस दलील को खारिज कर दिया कि उनका करियर रुक गया है और अब उन्हें प्रमोशन के लिए नहीं माना जा रहा है.
कब से शुरू हुआ विवाद?
जिन घटनाओं की वजह से आखिरकार कानूनी लड़ाई शुरू हुई वह Covid-19 महामारी के दौरान शुरू हुई. HR Magazine UK के मुताबिक, 2019 में अपने पहले बच्चे के जन्म के बाद, रीव्स ने अपने मैनेजर से कहा कि महामारी के दौरान घर से काम करने से काम और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारियों में बैलेंस बनाना मुश्किल हो गया है.
रीव्स ने ट्रिब्यूनल को बताया कि, उनके मैनेजर ने उन पर बार-बार चिल्लाकर कहा कि इसे समझो. उनके मैनेजर ने चिल्लाने से इनकार किया, ट्रिब्यूनल ने कहा कि मैनेजर Covid लॉकडाउन के दौरान बहुत छोटे बच्चों वाले माता-पिता को हो रही मुश्किलों को समझने को तैयार नहीं दिखे.
पैरेंटल लीव के दौरान नौकरी से निकाल दिया
2021 की शुरुआत में, रीव्स Goldman Sachs के दूसरे डिपार्टमेंट में चले गए. कुछ महीने बाद, मई में उन्होंने अपने मैनेजर को बताया कि वह अपने दूसरे बच्चे के जन्म के बाद नवंबर से छह महीने की पेरेंटल लीव लेंगे. हालांकि, जब रीव्स छुट्टी पर थे तो उन्हें बताया गया कि उनके रोल में नौकरी से निकाले जाने का खतरा है. उनकी पेरेंटल लीव ऑफिशियली 1 जून 2022 को खत्म हो गई, लेकिन उन्हें काम पर वापस जाने की इजाजत नहीं दी गई. इसके बजाय उन्हें 4 सितंबर 2022 को फॉर्मल तौर पर नौकरी से निकालने से पहले गार्डन लीव पर रखा गया. ट्रिब्यूनल ने बाद में फैसला सुनाया कि नौकरी से निकालने का प्रोसेस गलत था और रीव्स के साथ उनकी पेरेंटल लीव की वजह से डिस्क्रिमिनेशन (भेदभाव) हुआ था.
कंपनसेशन इतना ज्यादा क्यों?
£1.45 मिलियन (लगभग 18.5 करोड़) का अवॉर्ड सिर्फ नौकरी जाने के लिए नहीं था. ट्रिब्यूनल ने इस बात पर भी विचार किया कि इस केस ने रीव्स के भविष्य के करियर पर कैसे असर डाला.फैसले के मुताबिक, Goldman Sachs छोड़ने के बाद रीव्स ने 417 नौकरियों के लिए अप्लाई किया था. वह 43 पोस्ट के लिए इंटरव्यू स्टेज तक पहुंचे, लेकिन उन्हें सिर्फ दो फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट मिले. हालांकि रीव्स ने बाद में UBS और मिलेनियम में फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया, लेकिन Goldman Sachs छोड़ने के बाद से उन्हें कोई दूसरी परमानेंट पोस्ट नहीं मिली.
ट्रिब्यूनल ने माना कि चल रहे केस ने रीव्स की नौकरी की संभावनाओं पर असर डाला, इंटरव्यू कैंसिल कर दिए गए, ऑफर वापस ले लिए गए और एम्प्लॉयर ज्यादा जांच कर रहे थे. इसलिए अंदाजा लगाया कि उन्हें परमानेंट रोल पाने में लगभग तीन साल लग सकते हैं और कमाई पर आठ साल तक असर पड़ सकता है. कम्पेनसेशन में इमोशनल परेशानी, फाइनेंशियल नुकसान और करियर पर पड़ने वाला असर शामिल था.
क्या था कंपनी का जवाब?
रॉयटर्स के मुताबिक,फैसले के बाद Goldman Sachs ने अपनी पैरेंटल लीव पॉलिसी का बचाव किया. बैंक ने कहा कि वह पेड पैरेंटल लीव में मार्केट लीडर है और सभी कामकाजी माता-पिता को, चाहे उनका जेंडर कुछ भी हो, दी गई पूरी 26 हफ्ते की पेड लीव लेने के लिए बढ़ावा देता है. एक स्पोक्सपर्सन ने कहा, हम इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं हैं. बैंक ने इस पर कमेंट करने से मना कर दिया कि क्या वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा या नहीं.