विदेशी बाजारों में भारतीय कपड़ों की पहुंच बढ़ाने की तैयारी, नोएडा में हुआ TEXPORT कार्यक्रम
कपड़ा मंत्रालय ने AEPC के माध्यम से नोएडा में TEXPORT क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया. यह National Export Continuity Programme का हिस्सा है. इसका उद्देश्य मौजूदा और नए निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करना है. मंत्रालय ने 2030 तक भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.

कपड़ा मंत्रालय ने Apparel Export Promotion Council (AEPC) के माध्यम से नोएडा सेक्टर-18 स्थित रेडिसन ब्लू एमबीडी में ‘TEXPORT: How to Start, Sustain and Scale Apparel Exports’ कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम मंत्रालय के नेशनल एक्सपोर्ट कंटीन्यूटी प्रोग्राम का हिस्सा है. इसके तहत देशभर में कपड़ा और परिधान निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
सूरत के बाद नोएडा में दूसरा TEXPORT कार्यक्रम
नोएडा में आयोजित यह TEXPORT प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सीरीज का दूसरा कार्यक्रम था. इससे पहले गुजरात के सूरत में MATEXIL के सहयोग से पहला कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कपड़ा मंत्रालय देश के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल क्लस्टर में ऐसे कई और कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है. इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के निर्यातकों की जरूरतों और चुनौतियों को समझने के साथ उन्हें निर्यात के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा.
नोएडा में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलकनंदा दयाल (IAS) ने की. इसमें कपड़ा मंत्रालय के व्यापार सलाहकार ए. बिपिन मेनन, आईटीएस, एईपीसी के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर, उत्तर प्रदेश सरकार के शेषमणि पांडेय( IAS), ट्रेड डायरेक्टर अमित कुमार और डिप्टी DGFT हेमंत कुमारभी शामिल हुए.
कार्यक्रम में परिधान उद्योग, कोयंबटूर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल संस्थान, National Institute of Fashion Technology (NIFT) और दूसरे संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.
2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य
कार्यक्रम में अलकनंदा दयाल ने भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात को बढ़ाने और निर्यातकों की क्षमता मजबूत करने के लिए मंत्रालय की योजनाओं पर बात की. उन्होंने साल 2030 तक भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि TEXPORT को देशभर में क्षमता निर्माण की पहल के तौर पर तैयार किया गया है. इसका फायदा स्थापित निर्यातकों के साथ उन कारोबारियों को भी मिल सकेगा, जो पहली बार निर्यात शुरू करना चाहते हैं या इस क्षेत्र में आने की तैयारी कर रहे हैं.
उन्होंने नोएडा की परिधान निर्यात केंद्र के रूप में क्षमता पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर मौजूद अवसरों और निर्यातकों की खास चुनौतियों को पहचानकर उन्हें सही प्रशिक्षण, निर्यात से जुड़ी तैयारी और संस्थागत सहायता देना जरूरी है.
निर्यातकों को FTA से जुड़े अवसरों की जानकारी
कार्यक्रम में कपड़ा मंत्रालय के ट्रेड एडवाइजर ए. बिपिन मेनन ने भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात की संभावनाओं पर तकनीकी प्रस्तुति दी. इसमें बताया गया कि Free Trade Agreements (FTAs) के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
प्रस्तुति में अलग-अलग देशों और उत्पादों के हिसाब से निर्यात रणनीति तैयार करने, बाजार से जुड़ी जानकारी जुटाने, जरूरी नियमों का पालन करने, निर्यात को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ बेहतर संपर्क बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.
कार्यक्रम की शुरुआत AEPC के सेक्रेटरी जनरल मिथिलेश्वर ठाकुर के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने भारत के निर्यात आधार को व्यापक बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि देश के करीब 88 फीसदी निर्यात सिर्फ 100 जिलों से आते हैं. उन्होंने समावेशी निर्यात विकास की रणनीति के तहत 100 Champion Districts को वैश्विक निर्यात केंद्र और 100 Aspirational Districts को आत्मनिर्भर विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया.
इसके अलावा, उन्होंने भारत के बढ़ते FTA नेटवर्क से मिलने वाले अवसरों पर बात की. इनमें डिजिटल कारोबार, ई-कॉमर्स, निवेश और टिकाऊ विकास जैसे विषयों को शामिल करने वाले नए दौर के व्यापार समझौते भी शामिल हैं.
तीन अलग-अलग समूहों में निर्यातकों के साथ चर्चा
कार्यक्रम की खास बात नियमित निर्यातकों, अनियमित निर्यातकों और नए या संभावित निर्यातकों के लिए आयोजित तीन अलग-अलग संवाद सत्र रहे. इन सत्रों में तकनीकी चर्चा और सवालों के जरिए कारोबारियों की जरूरतों को समझने की कोशिश की गई. इनमें निर्यात प्रक्रिया, नियमों का पालन, वित्त, लॉजिस्टिक्स, उत्पाद विकास, खरीदारों से संपर्क और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल रहे.
इसके अलावा, एक अलग सवाल-जवाब सत्र भी आयोजित किया गया. इसमें प्रतिभागियों को निर्यात से जुड़ी समस्याएं उठाने, अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी लेने और अपनी शंकाओं का समाधान पाने का अवसर मिला.
क्या है TEXPORT कार्यक्रम का मकसद?
National Export Continuity Programme के तहत TEXPORT का उद्देश्य देशभर में निर्यातकों को प्रशिक्षण और जरूरी सहायता देने के लिए एक व्यवस्थित मंच तैयार करना है. इसके जरिए कपड़ा मंत्रालय भारत के निर्यातकों का दायरा बढ़ाने, स्थानीय विनिर्माण केंद्रों को मजबूत करने और ज्यादा कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने के लिए तैयार करने पर जोर दे रहा है.
मंत्रालय की योजना है कि प्रमुख कपड़ा और परिधान केंद्रों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके कारोबारियों को निर्यात शुरू करने, उसे जारी रखने और अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने में मदद दी जाए. इससे भारत को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल सोर्सिंग केंद्रों में शामिल करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
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