रेलवे स्टेशनों पर पानी की क्वालिटी होगी दुरुस्त! E.coli मिलने के बाद 20000 जगह लगाए जाएंगे फिल्ट्रेशन सिस्टम
रेलवे स्टेशनों के पानी में E.coli मिलने के बाद Indian Railways ने बड़ा कदम उठाया है. रेलवे नेटवर्क में करीब 20,000 जगहों पर ‘टैंक टू टैप’ वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाए जाएंगे. CAG की रिपोर्ट में कई स्टेशनों के वाटर कूलर और नलों के पानी के सैंपल में E.coli और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले थे. रेलवे पुराने पानी के टैंकों को बदलेगा और सोर्स से लेकर आउटलेट तक पानी की नियमित टेस्टिंग करेगा.

Indian Railways: भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पीने के पानी की क्वालिटी को लेकर सामने आई CAG रिपोर्ट के बाद रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है. रिपोर्ट में कई रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर और नलों से लिए गए पानी के सैंपल में E.coli और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पानी की क्वालिटी की समीक्षा की और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
20,000 जगह लगाए जाएंगे नए फिल्ट्रेशन सिस्टम
रेलवे अब पूरे नेटवर्क में करीब 20,000 जगहों पर नया ‘टैंक टू टैप’ वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाएगा. इनमें वाटर कूलर समेत यात्रियों के लिए पीने के पानी से जुड़े प्रमुख प्वाइंट शामिल होंगे. इन जगहों पर पानी की क्वालिटी की लगातार निगरानी के लिए व्यापक फिल्ट्रेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा.
रेलवे के मुताबिक, इस पहल के तहत सिर्फ फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने तक ही काम सीमित नहीं रहेगा. पुराने और खराब पानी के टैंकों को बदला जाएगा. पानी की क्वालिटी की नियमित टेस्टिंग को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा. पानी की जांच सोर्स और आउटलेट, दोनों स्तरों पर की जाएगी. इसके साथ ही सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग, जवाबदेही और स्टोरेज टैंकों की तय समय पर क्लीनिंग और मेंटेनेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.
कई स्टेशनों के पानी में मिला E.coli
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, कई रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के सैंपल में E.coli पाया गया. सदर्न रेलवे के कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन, साउथ सेंट्रल रेलवे के हैदराबाद, सेंट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला तथा ईस्टर्न रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर के सैंपल E.coli के लिए पॉजिटिव पाए गए.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022-23 में 8 जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में 9 जोन के 56 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए पानी के सैंपल में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, जिसमें E.coli भी शामिल है, की मौजूदगी मिली. E.coli की कुछ प्रजातियां फूड पॉइजनिंग, डायरिया और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं. यही वजह है कि रेलवे ने पानी की क्वालिटी को टॉप प्रायोरिटी एरिया में शामिल किया है.
512 स्टेशनों की जांच में 458 में कमियां
CAG ने 2019-20 से 2023-24 के दौरान किए गए टेस्ट ऑडिट के आधार पर रेलवे स्टेशनों पर पैसेंजर सुविधाओं और सैनिटेशन की स्थिति की जांच की. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडिट में 512 नॉन-सबअर्बन ग्रेड स्टेशनों को शामिल किया गया. इनमें से 458 स्टेशनों यानी 89% से ज्यादा स्टेशनों पर मिनिमम एसेंशियल एमेनिटीज यानी MEA के स्तर पर कमियां पाई गईं.
रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टेशनों पर जरूरी सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं थीं या तय मानकों से कम थीं. इनमें ड्रिंकिंग वाटर, वेटिंग हॉल, सीटिंग अरेंजमेंट, प्लेटफॉर्म शेल्टर, यूरिनल, लैट्रिन, हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, पंखे, फुट ओवरब्रिज, डस्टबिन, क्लॉक और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
दिलचस्प बात यह है कि CSMT, Howrah, Sealdah, New Delhi और Mumbai Central जैसे NSG-1 कैटेगरी के प्रमुख स्टेशनों पर भी कुछ जरूरी सुविधाओं में कमी पाई गई. ऑडिट में 12 NSG-1 स्टेशनों पर ड्रिंकिंग वाटर टैप, 8-8 स्टेशनों पर पंखे और वाटर कूलर तथा 5 स्टेशनों पर साइनेज से जुड़ी कमियां सामने आईं.
2,035 स्टेशनों पर वाटर टैप की कमी
Passenger Amenities Management System के विश्लेषण में भी कई स्टेशनों पर जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक, 201 स्टेशनों पर लैट्रिन, 403 स्टेशनों पर यूरिनल और 2,035 स्टेशनों पर वाटर टैप की कमी पाई गई. CAG ने रेलवे को पानी की सप्लाई सिस्टम की नियमित जांच और ड्रिंकिंग वाटर की व्यापक टेस्टिंग के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है.
इसमें Uniform Drinking Water Quality Protocol के तहत सभी जरूरी पैरामीटर्स की जांच शामिल है. रेलवे ने इस पूरी पहल को बोर्ड स्तर पर मॉनिटर करने का फैसला किया है. पानी की क्वालिटी और सुधार से जुड़े प्रोग्रेस रिपोर्ट भी समय-समय पर जारी किए जाएंगे. इससे रेलवे के करोड़ों यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में निगरानी और जवाबदेही दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
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