ब्रोकरेज फर्म्स ने माना Jio को डिजिटल ग्रोथ का पावरहाउस, IPO को एंकर इन्वेस्टर्स से मिला जोरदार रिस्पॉन्स
Jio Platform IPO: इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए जियो का आईपीओ खुलते ही जबरदस्त डिमांड देखने को मिली, 8110 करोड़ के शेयर्स के लिए मांग 2.5 लाख करोड़ का भी आंकड़ा पार कर गई. वहीं, दूसरी ओर ब्रोकरेज हाउसेज ने कंपनी की मजबूत ग्रोथ, 5G और AI क्षमताओं के चलते इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह दी है.

Jio Platforms के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक जबरदस्त इन्वेस्टमेंट स्टोरी के तौर पर उभर रहा है, जिसमें ब्रोकरेज हाउस कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं, मजबूत ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस और बढ़ती टेक्नोलॉजी की महत्वाकांक्षाओं पर भरोसा जता रहे हैं. उनके अंदाजे एक ऐसे बिजनेस की ओर इशारा करते हैं जो ट्रेडिशनल टेलीकम्युनिकेशन से बहुत आगे निकल गया है और भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी के सेंटर में अपनी जगह बना रहा है.
एंकर बुक में इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की जबरदस्त डिमांड
जियो का आईपीओ आज इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए खुला और खुलते ही जबरदस्त डिमांड देखने को मिली, 8110 करोड़ रुपए की ‘एंकर बुक’ के लिए 30 गुना से ज्यादा का सब्सक्रिप्शन मिला है. 8110 करोड़ रुपए के उपलब्ध शेयर्स के लिए इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपए को भी पार कर गई.
मजबूत लिस्टिंग की ओर इशारा करता है GMP
IPO के खुलने से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) एक मजबूत संकेत दे रहा है, इंडिया इंफोलाइन ने 19 अक्टूबर को हर शेयर का GMP 252 रुपए बताया है. जियो आईपीओ का इश्यू प्राइस 1065 रुपए से 1119 रुपए तक है, जीएमपी 1119 रुपए के ऊपरी प्राइस बैंड से लगभग 22.52 फीसदी प्रॉफिट का संकेत दे रहा है. अगर ऐसा हुआ तो जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 1371 रुपए पर लिस्ट हो सकता है, इसके 1 लॉट में 12 शेयर्स हैं. एक लॉट में 12 शेयर्स और प्रति शेयर 252 रुपए के लिस्टिंग गेन का मतलब है कि 1 लॉट पर 3024 रुपए का फायदा हो सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स ने अलग से हर शेयर का GMP 251 रुपए या 22.4 फीसदी बताया है, इसका मतलब है कि प्राइस लगभग 1370 रुपए हो सकता है. यह छोटा सा अंतर अनऑफिशियल मार्केट कोट्स की टाइमिंग को दिखाता है. GMP एक इनफॉर्मल सेंटीमेंट इंडिकेटर है, जो तेजी से बदल सकता है और यह असल लिस्टिंग प्राइस या लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं देता है.
Jio Platforms IPO Date
30213 करोड़ के IPO में 27 करोड़ फ्रेश शेयर शामिल हैं और इसका प्राइस बैंड 1065–1119 रुपए प्रति शेयर है. यह इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा और लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होगी. कंपनी का प्लान है कि 27,500 करोड़ का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (RJIL) के उधार का प्रीपेमेंट के लिए किया जाए.
ब्रोकरेज की पॉजिटिव कमेंट्री जियो की इस काबिलियत पर भरोसा दिखाती है कि वह अपने बड़े कस्टमर बेस को लगातार कमाई में बढ़ा सकता है, साथ ही 5G, होम ब्रॉडबैंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सर्विसेज के जरिए नए रेवेन्यू सोर्स डेवलप कर सकता है.
कंपनी की बढ़ती कमाई
जियो की मार्केट पोजीशन इस उम्मीद की बुनियाद है. 30 जून 2026 तक 533.3 मिलियन कस्टमर्स के साथ, कंपनी ने FY26 में भारत के लगभग 60 फीसदी वायरलेस डेटा ट्रैफिक को कैरी किया. ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में साल-दर-साल 14.6 फीसदी बढ़कर 1,46,885 करोड़ हो गया, जबकि टैक्स के बाद प्रॉफिट लगभग 30,049 करोड़ तक पहुंच गया. EBITDA मार्जिन सुधरकर लगभग 51.9 फीसदी हो गया, जो ऑपरेटिंग लेवरेज और नेटवर्क इन्वेस्टमेंट के बेहतर इस्तेमाल को दिखाता है.
ब्रोकरेज हाउस दे रहे ये सलाह
ब्रोकरेज असेसमेंट इस परफॉर्मेंस की कंसिस्टेंसी को दिखाते हैं. एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इस ऑफरिंग को ग्रोथ को देखते हुए सही कीमत वाला बताया. इसने FY24–FY26 के EBITDA में 16.2 फीसदी और टैक्स के बाद प्रॉफिट में 18.4 फीसदी की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट को जियो की अपने बढ़ते नेटवर्क के साथ-साथ कमाई बढ़ाने की क्षमता के सबूत के तौर पर बताया.
GEPL कैपिटल ने भी सब्सक्राइब करने की सलाह दी, यह तर्क देते हुए कि Jio की मार्केट लीडरशिप और ग्रोथ के मौकों के संदर्भ में FY26 की कमाई का लगभग 33.3 गुना वैल्यूएशन सही लगता है. कंपनी की अपने सब्सक्राइबर बेस को बढ़ाने, एवरेज रेवेन्यू पर यूज़र (ARPU) में सुधार करने और डिजिटल-सर्विस की पहुंच बढ़ाने की स्ट्रैटेजी ग्रोथ के लिए और रास्ते देती है.
फिलिपकैपिटल ने कहा कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से जियो ने पिछले एक दशक में डिसरप्टिव प्राइसिंग और अलग ऑफरिंग के जरिए भारत के टेलीकॉम लैंडस्केप को नया आकार दिया है. ब्रोकरेज को टैरिफ-लेड अर्निंग्स ग्रोथ, ऑर्गेनिक ARPU एक्सपेंशन और नए डिजिटल-सर्विस रेवेन्यू स्ट्रीम के कॉम्बिनेशन में पोटेंशियल दिखता है, जिसके बारे में कहा कि यह अर्निंग्स को कंपाउंड करने के लिए हेडरूम देता है और IPO वैल्यूएशन को आगे के आधार पर आकर्षक बनाता है.
SBICAPS ने कहा कि इश्यू प्राइसिंग जियो के स्केल, अर्निंग्स ग्रोथ, टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म मोनेटाइजेशन पोटेंशियल को दिखाती है. आगे कहा कि उधार के प्रस्तावित रीपेमेंट से लेवरेज और फाइनेंस कॉस्ट कम होने, कैश फ्लो मजबूत होने और भविष्य के इन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलने की उम्मीद है.
कनेक्टिविटी से टेक्नोलॉजी पावरहाउस तक
इन्वेस्टमेंट प्रपोजल को जो चीज मजबूत करती है, वह है कोर टेलीकॉम बिजनेस से परे डेवलप की गई कैपेबिलिटी को मोनेटाइज करने का मौका. जियो का इन-हाउस 5G टेक्नोलॉजी स्टैक, क्लाउड-नेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर और जियोब्रेन AI प्लेटफॉर्म इसे एंटरप्राइज सॉल्यूशन डेवलप करने और इंटरनेशनल मार्केट में ऑपरेटरों को टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटी ऑफर करने का पोटेंशियल देते हैं.
इसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही शानदार है, जिसमें दस लाख से ज्यादा रूट किलोमीटर फाइबर, 360,537 नेटवर्क टावर तक एक्सेस और भारत की 99 फीसदी से ज़्यादा आबादी तक वायरलेस ब्रॉडबैंड कवरेज है. Jio के एप्लिकेशन, क्लाउड सर्विस और एंटरप्राइज़ ऑफरिंग का बढ़ता इकोसिस्टम इस इंफ्रास्ट्रक्चर से ज़्यादा वैल्यू पाने के मौके बनाता है.
वेंचुरा सिक्योरिटीज ने Jio को भारत का सबसे बड़ा डिजिटल सर्विसेज और कनेक्टिविटी प्लेटफॉर्म बताकर इस बड़ी पोजिशनिंग को समझा है. यह असेसमेंट कंपनी की क्षमता में सिर्फ कनेक्टिविटी बेचने से लेकर एक इंटीग्रेटेड डिजिटल-सर्विसेज बिज़नेस बनाने तक के बदलाव को दिखाता है.
होम ब्रॉडबैंड का विस्तार इस मौके को और मजबूत करता है. जून 2026 तक जियो के 28.6 मिलियन फिक्स्ड-ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिनमें 14 मिलियन जियो एयरफाइबर सब्सक्राइबर शामिल थे. हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की बढ़ती डिमांड, बचे हुए 2G यूज़र्स का 4G और 5G पर माइग्रेशन और बढ़ता एंटरप्राइज़ डिजिटलाइजेशन कई ग्रोथ ड्राइवर देते हैं.
कैश जेनरेशन से मजबूत होता आउटलुक
जियो का बेहतर होता कैश जेनरेशन एक और फैक्टर है जो अच्छा ध्यान खींच रहा है. Emkay के एनालिसिस के मुताबिक, FY26 में ऑपरेशन से कैश फ्लो लगभग 77,556 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि कैपिटल खर्च FY24 में रेवेन्यू के 48.8 फीसदी से घटकर FY26 में 23.3 फीसदी हो गया. यह सुधार कंपनी को अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करते हुए नए मौकों में इन्वेस्ट करने के लिए ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी दे सकता है.
सेंट्रम ब्रोकिंग का अनुमान है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की इक्विटी वैल्यू लगभग 11.5 लाख करोड़ है. उम्मीद है कि FY26 और FY29 के बीच रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद प्रॉफिट क्रमशः लगभग 14 फीसदी, 16 फीसदी और 16 फीसदी की कंपाउंड सालाना दर से बढ़ेगा. यह टैरिफ में बढ़ोतरी, प्रीमियम ऑफर और बढ़ती डिजिटल-सर्विस अपनाने को भी ARPU ग्रोथ के संभावित रूप में पहचानता है.
19 लीड मैनेजर कर रहे हैं मैनेज
IPO को 19 बुक-रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) मैनेज कर रहे हैं, जो ऑफर के स्केल और इंटरनेशनल पहुंच को दिखाता है. ये हैं कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, CLSA इंडिया, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज, जेफरीज इंडिया, JM फाइनेंशियल, जे.पी. मॉर्गन इंडिया, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया और 360 ONE WAM.
ये फर्म इस इश्यू के लीड मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं, इसलिए उनकी रिसर्च ब्रांच इंडिपेंडेंट रिसर्च रिपोर्ट पब्लिश करने की स्थिति में नहीं हैं, जिसमें यह बताया गया हो कि इन्वेस्टर्स को उसी IPO को सब्सक्राइब करना चाहिए या नहीं, जिसे वे मैनेज कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में जिन ब्रोकरेज विचारों पर बात की गई है, वे दूसरे रिसर्च हाउस और एनालिस्ट से आए हैं, जिनके असेसमेंट पब्लिकली रिपोर्ट किए गए हैं.
बड़ा असेसमेंट यह है कि जियो की ग्रोथ का अगला फेज सिर्फ कस्टमर जोड़ने से नहीं, बल्कि अपने नेटवर्क, टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोसिस्टम से ज्यादा वैल्यू निकालने से आएगा. मार्केट लीडरशिप, बेहतर फाइनेंशियल प्रोडक्टिविटी, नए ग्रोथ के मौकों और कई ब्रोकरेज से पॉजिटिव असेसमेंट के साथ, यह IPO इन्वेस्टर्स को एक ऐसे बिजनेस में एक्सपोजर देता है जो भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के अगले चैप्टर को आकार देना चाहता है. मजबूत ग्रे-मार्केट प्रीमियम प्री-इश्यू उत्साह को और बढ़ाता है, जबकि ऑफरिंग का स्केल और 19 लीड मैनेजर्स की भागीदारी भारत के कैपिटल मार्केट के लिए इसके महत्व को दिखाती है.
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