OYO की पैरेंट कंपनी PRISM आधा कर सकती है IPO साइज, आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?

शुरुआती इश्यू का साइज कंपनी के हालिया वित्तीय प्रदर्शन के सामने आने से पहले तय किया गया था. अब चूंकि कैश जेनरेशन मजबूत बना हुआ है और बैलेंस शीट में सुधार हो रहा है. इश्यू के आकार में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब PRISM अपने बकाया कर्ज को कम करने पर लगातार ध्यान दे रही है.

Oyo आईपीओ Image Credit: @Money9live

OYO की पैरेंट कंपनी PRISM अपने प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में ‘फ्रेश इश्यू’ (नए शेयर जारी करने) के साइज को लगभग आधा करने की योजना बना रही है. खबर है कि इसे करीब 6,650 करोड़ रुपये से घटाकर 3,350 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है.

क्यों हुई साइज में कटौती?

न्यूज एजेंसी PTI ने इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि इश्यू के साइज में यह कटौती इसलिए की जा रही है, क्योंकि कंपनी लगातार अच्छा कैश जनरेट कर रही है और उसकी बैलेंस शीट की स्थिति भी बेहतर हो रही है. इसके चलते, कंपनी को जितनी पूंजी जुटाने की जरूरत है. वह पहले सोचे गए अनुमान से कम हो गई है.

शुरुआती इश्यू का साइज कंपनी के हालिया वित्तीय प्रदर्शन के सामने आने से पहले तय किया गया था. अब चूंकि कैश जेनरेशन मजबूत बना हुआ है और बैलेंस शीट में सुधार हो रहा है, इसलिए फंडिंग की जरूरत कम हो गई है. इससे कंपनी को जुटाई जाने वाली प्राइमरी कैपिटल की राशि कम करने का मौका मिल गया है.

क्या कंपनी में मकसद?

इसका मकसद यह है कि बिजनेस को जितनी पूंजी की जरूरत है, उतनी ही जुटाई जाए और साथ ही कैपिटल स्ट्रक्चर को भी बेहतर बनाए रखा जाए. योजना यह है कि अगले दो से तीन साल में बिजनेस से होने वाले कैश फ्लो के जरिए बाकी बचे कर्ज को चुका दिया जाए.

इससे पहले, OYO ने IPO के जरिए 6,650 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बनाई थी, जिसमें से लगभग 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाना था.

इश्यू के आकार में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब PRISM अपने बकाया कर्ज को कम करने पर लगातार ध्यान दे रही है.

बदलते हुए स्ट्रक्चर के तहत, IPO से मिलने वाली रकम का ज्यादातर हिस्सा कुछ कर्ज को आंशिक या पूरी तरह से चुकाने (या समय से पहले चुकाने) में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है.

अपडेटेड ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब PRISM अपने प्रस्तावित IPO के अगले चरण की ओर बढ़ रही है. इससे पहले कंपनी ने UDRHP (अपडेटेड ड्राफ्ट हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइल किया था.

मूडीज रेटिंग्स (Moody’s Ratings) ने PRISM के आउटलुक को ‘स्टेबल’ (स्थिर) से बदलकर ‘पॉजिटिव’ (सकारात्मक) कर दिया है. साथ ही, इस ट्रैवल टेक यूनिकॉर्न की ‘B2 कॉरपोरेट फैमिली रेटिंग’ को भी बरकरार रखा है.

मूडीज की रेटिंग

रेटिंग के पीछे का कारण बताते हुए मूडीज ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले 12-18 महीनों में OYO का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये (315 मिलियन अमेरिकी डॉलर) हो जाएगा, क्योंकि कंपनी लगातार अपना विस्तार कर रही है और अपने प्लेटफॉर्म पर नए स्टोरफ्रंट (होटल/प्रॉपर्टी) जोड़ रही है.’

FY26 के लिए, OYO का EBITDA FY25 के 1,080 करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक बढ़कर 2,630 करोड़ रुपये हो गया.

कितनी है रितेश अग्रवाल की हिस्सेदारी?

OYO की स्थापना 2013 में रितेश अग्रवाल ने की थी. जिनकी कंपनी में अभी 30.52 फीसदी हिस्सेदारी है. सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प की सब्सिडियरी, SVF इंडिया होल्डिंग्स (केमैन) लिमिटेड, कंपनी में सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है. जिसके पास 40.04 फीसदी हिस्सेदारी है.

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