₹1.51 करोड़ के MF पोर्टफोलियो से हर महीने चाहिए ₹16,000,एक्सपर्ट ने बताए कौन से फंड्स रखें

रिटायरमेंट के बाद रेगुलर कमाई के लिए म्यूचुअल फंड में जमा रकम से सही तरीके से निकासी करना जरूरी है. एक 59 साल के निवेशक के पास ₹1.51 करोड़ का पोर्टफोलियो है और वह SWP के जरिए हर महीने ₹16,000 निकालना चाहता है. Anand Rathi Wealth के एक्सपर्ट ने पोर्टफोलियो में बदलाव, किन म्यूचुअल फंड्स को बनाए रखने या बेचने और नियमित आय के लिए तीन बास्केट की रणनीति अपनाने के सुझाव दिए हैं.

- ₹1.51 करोड़ के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो से हर महीने ₹16,000 निकालने की योजना. Image Credit: MONEY9LIVE.COM

रिटायरमेंट के बाद हर महीने रेगुलर कमाई के लिए सिर्फ बड़ा निवेश फंड होना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आपका पैसा लंबे समय तक चले. अगर आपके पास म्यूचुअल फंड में ₹1.51 करोड़ जमा हैं और आप हर महीने ₹16,000 निकालना चाहते हैं, तो इसके लिए सही पोर्टफोलियो और निकासी की रणनीति बनाना जरूरी है. एक 59 साल के निवेशक ने इसी सवाल पर एक्सपर्ट से सलाह मांगी है. एक्सपर्ट ने बताया है कि किन म्यूचुअल फंड्स को पोर्टफोलियो में बनाए रखने, किनसे बाहर निकलने और रिटायरमेंट के बाद पैसे की निकासी कैसे करने पर विचार किया जा सकता है.

हर महीने कितने पैसे निकालना सही?

ETMutualFunds की रिपोर्ट के मुताबिक, 59 साल के इस निवेशक के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की वैल्यू करीब ₹1.51 करोड़ है. निवेशक सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान यानी SWP के जरिए हर महीने ₹16,000 निकालना चाहता है. इस तरह सालाना निकासी ₹1.92 लाख होगी, जो मौजूदा पोर्टफोलियो का करीब 1.27 फीसदी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशक की प्रस्तावित निकासी एक आम रिटायरमेंट प्लानिंग गाइडलाइन के दायरे में है. उनके आकलन के अनुसार, ₹1.51 करोड़ के रिटायरमेंट फंड से सालाना 4 से 6 फीसदी निकासी करने पर हर महीने करीब ₹50,511 से ₹75,767 तक मिल सकते हैं.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इतनी निकासी करने पर पैसा पूरी रिटायरमेंट अवधि तक जरूर चलेगा. बाजार में गिरावट, महंगाई, खर्च और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का असर पोर्टफोलियो पर पड़ सकता है. खासकर रिटायरमेंट के शुरुआती वर्षों में बाजार गिरने पर निवेश बेचकर खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है.

पोर्टफोलियो में ज्यादा फंड रखने से बचें

निवेशक के पोर्टफोलियो में कई इक्विटी, हाइब्रिड, मल्टी एसेट, गोल्ड और सिल्वर स्कीम शामिल हैं. इनमें Quant Small Cap Fund, HDFC Flexi Cap Fund, SBI Contra Fund, HDFC Mid Cap Fund, Edelweiss Mid Cap Fund और ICICI Prudential Large Cap Fund जैसे फंड शामिल हैं.

एक्सपर्ट के मुताबिक, निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में फंड्स की संख्या और एक ही फंड हाउस पर निर्भरता की समीक्षा करनी चाहिए. उनके आकलन के अनुसार, पोर्टफोलियो का करीब 69 फीसदी हिस्सा HDFC Mutual Fund की स्कीमों में है. ऐसे में अलग-अलग फंड हाउस में निवेश बांटने पर विचार किया जा सकता है.

लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में कितना निवेश होना चाहिए?

एक्सपर्ट ने निवेशक के लिए मार्केट कैप के हिसाब से 55 फीसदी लार्ज कैप, 23 फीसदी मिड कैप और 22 फीसदी स्मॉल कैप में निवेश का सुझाव दिया है. उनके आकलन के मुताबिक, मौजूदा पोर्टफोलियो में लार्ज कैप में करीब एक फीसदी और मिड कैप में 6 फीसदी ज्यादा निवेश है, जबकि स्मॉल कैप में करीब 7 फीसदी कम निवेश है.

हालांकि, रिटायरमेंट में केवल इस अनुपात को पूरा करने के लिए स्मॉल कैप और मिड कैप में निवेश बढ़ाना सही फैसला नहीं होगा. इन कैटेगरी के फंड्स में बाजार की गिरावट के दौरान ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

किन म्यूचुअल फंड्स को बनाए रखने की सलाह?

एक्सपर्ट के मुताबिक, HDFC Flexi Cap Fund, HDFC Mid Cap Fund, HDFC Value Fund, ICICI Prudential Flexi Cap Fund, ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund, Nippon India Small Cap Fund और Quant Small Cap Fund को बनाए रखने वाले फंड्स में शामिल किया गया है.

इन स्कीमों में अलग-अलग निवेश कैटेगरी का एक्सपोजर मिलता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशक को सभी फंड्स में बराबर रकम रखनी चाहिए. हर स्कीम का पोर्टफोलियो में योगदान, दूसरी स्कीमों के साथ उसका ओवरलैप और निवेशक की नियमित आय की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है.

किन म्यूचुअल फंड्स से निकलने की सलाह?

एक्सपर्ट ने पोर्टफोलियो को सरल बनाने और निवेश के दोहराव की समीक्षा करने के लिए कई स्कीमों से बाहर निकलने का सुझाव दिया है. इनमें Axis Multi Asset Allocation Fund, HDFC Balanced Advantage Fund, HDFC ELSS Tax Saver Fund, HDFC Silver ETF Fund of Funds, ICICI Prudential Aggressive Hybrid Fund और ICICI Prudential ELSS Tax Saver Fund शामिल हैं.

इसके अलावा, ICICI Prudential Gold ETF Fund of Funds, SBI Contra Fund, Edelweiss Mid Cap Fund, HDFC Large Cap Fund, ICICI Prudential Large Cap Fund और ICICI Prudential Multi Cap Fund को भी बाहर निकलने के लिए चिन्हित किया गया है.

वहीं, नए निवेश के लिए एक्सपर्ट ने Quant Large Cap Fund, Bandhan Large & Mid Cap Fund, Invesco India Smallcap Fund, Kotak Multi Cap Fund, Canara Robeco Multi Cap Fund और UTI Gold ETF पर विचार करने का सुझाव दिया है.

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि किसी फंड को बेचने या नया फंड खरीदने का फैसला केवल इस सूची के आधार पर नहीं करना चाहिए. निवेशक को संभावित कैपिटल गेन टैक्स, एग्जिट लोड, निवेश का उद्देश्य और पोर्टफोलियो में बदलाव की जरूरत भी देखनी चाहिए.

ELSS फंड्स में निवेश जारी रखें या बेच दें?

निवेशक के पोर्टफोलियो में HDFC ELSS Tax Saver Fund और ICICI Prudential ELSS Tax Saver Fund भी शामिल हैं. इन फंड्स को बनाए रखने या बेचने का फैसला निवेशक के टैक्स रिजीम और निवेश की जरूरत पर निर्भर करेगा.

पुराने टैक्स रिजीम में धारा 80C के तहत पात्र निवेशकों को ELSS में निवेश पर टैक्स छूट मिल सकती है. वहीं, नए टैक्स रिजीम में आम तौर पर धारा 80C की कटौती उपलब्ध नहीं होती. ऐसे में निवेशक लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद इन स्कीमों से बाहर निकलने पर विचार कर सकते हैं.

किन डेट फंड्स पर विचार कर सकते हैं?

एक्सपर्ट के मुताबिक, डेट फंड चुनते समय निवेश की अवधि और टैक्स स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए. अधिक टैक्स स्लैब वाले निवेशक अपनी परिस्थितियों के अनुसार आर्बिट्राज फंड्स पर विचार कर सकते हैं. तय अवधि के निवेश के लिए टारगेट मैच्योरिटी फंड्स और दो साल के भीतर रकम की जरूरत होने पर अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स के विकल्प देखे जा सकते हैं.

हालांकि, डेट फंड चुनते समय केवल पिछले रिटर्न को आधार नहीं बनाना चाहिए. इसमें लिक्विडिटी, क्रेडिट रिस्क, ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम और टैक्स का असर भी देखना जरूरी है. रिटायरमेंट के बाद जिस पैसे की जल्द जरूरत पड़ सकती है, उसे ऐसे विकल्प में रखना चाहिए जहां से जरूरत के समय रकम निकालना आसान हो.

कुल मिलाकर, ₹1.51 करोड़ के पोर्टफोलियो से हर महीने ₹16,000 निकालने की योजना में निकासी की दर फिलहाल कम है. लेकिन रिटायरमेंट के बाद पैसा कितने समय तक चलेगा, यह केवल शुरुआती रकम से तय नहीं होगा. सही एसेट एलोकेशन, नियमित खर्च की योजना, टैक्स और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखकर ही SWP की रणनीति बनानी चाहिए. यह एक्सपर्ट के विश्लेषण पर आधारित जानकारी है, व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं.