8th Pay Commission: महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में क्या है अंतर, कब तक आएगी सैलरी में बढ़ोतरी वाली रिपोर्ट?
8th Pay Commission: आयोग वेतन, पेंशन और भत्तों में संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है, इसलिए कार्यरत कर्मचारियों, रिटायर्ड लोगों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बहुत महत्वपूर्ण बने हुए हैं.

8th Pay Commission: महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी का अहम हिस्सा. इन दोनों का मकसद महंगाई के असर को कम करना है, लेकिन ये अलग-अलग समूहों पर लागू होते हैं. 8वां वेतन आयोग 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में हुई अपनी बैठक के बाद, अब 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में अपनी अगली बैठक की तैयारी कर रहा है.
चूंकि आयोग वेतन, पेंशन और भत्तों में संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है, इसलिए कार्यरत कर्मचारियों, रिटायर्ड लोगों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बहुत महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
संगठनों ने पेश किए कई प्रस्ताव
पिछले कुछ महीनों में कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने DA, DR, फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन, वेतन वृद्धि और इससे जुड़े अन्य लाभों को लेकर अपने प्रस्ताव पेश किए हैं. ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयीज एंड वर्कर्स’ ने मांग की है कि 50% DA/DR को मूल वेतन (बेसिक पे) और पेंशन में मिला दिया जाए. ‘नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी’ (NC-JCM) ने मिनिमम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.833 करने की मांग की है.
‘भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ’ (BPMS) ने न्यूनतम वेतन 72,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 4.0 रखने का प्रस्ताव दिया है. ‘फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस’ (FNPO) सहित अन्य संगठनों ने भी वेतन और सेवा लाभों को लेकर अपनी मांगें रखी हैं.
सरकार के फैसले पर नजर
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केवल मांगें और प्रस्ताव हैं. आयोग या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी घोषित नहीं किया गया है. 8वां वेतन आयोग DA और DR के संबंध में क्या फैसला लेता है, इसी से कार्यरत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के भविष्य के वेतन और पेंशन का स्वरूप तय होगा.
DA, DR से किस तरह अलग है?
महंगाई भत्ता (DA) कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है और इसकी गणना उनके मूल वेतन (बेसिक पे) के प्रतिशत के रूप में की जाती है. पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों के लिए इसी के समान ‘महंगाई राहत’ (DR) होती है, जिसकी गणना उनकी मूल पेंशन के आधार पर की जाती है. इन दोनों की समीक्षा साल में दो बार ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ के आधार पर की जाती है.
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
DA और DR को लेकर क्या फैसला होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा. अपने वेतन और पेंशन पर पड़ने वाले असर का आकलन करते समय, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को यूनियनों की मांगों और आधिकारिक तौर पर मंजूर किए गए बदलावों के बीच का अंतर समझना चाहिए.
कब तक आ सकती है आयोग की रिपोर्ट?
3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को बने हुए लगभग एक साल हो चुका है. अपने ‘कार्य-क्षेत्र’ (Terms of Reference – ToR) के अनुसार, आयोग के पास गठन के बाद से अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए लगभग 18 महीने का समय है.
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस तीन सदस्यीय पैनल के पास अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए अब लगभग छह से सात महीने बचे हैं. उम्मीद है कि यह रिपोर्ट मई-जून 2027 तक आ जाएगी. इसके बाद ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पता चलेगा कि भविष्य में उनके वेतन और पेंशन में DA और DR को किस तरह लागू किया जाएगा.
इन सिफारिशों का असर 1.1 करोड़ से अधिक कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा. इसलिए, देश भर में चल रही बैठकें पूरी होने के बाद, सबकी नजरें इसी पैनल पर टिकी होंगी.