₹1.51 करोड़ के म्यूचुअल फंड से हर महीने ₹16,000 निकालने का तरीका, रिटायरमेंट में ऐसे करें SWP की प्लानिंग
₹1.51 करोड़ के म्यूचुअल फंड से हर महीने ₹16,000 निकालने के लिए विशेषज्ञ ने तीन-बकेट रणनीति बताई है. इसमें तुरंत खर्च, मध्यम अवधि और लंबी अवधि के लिए अलग-अलग निवेश रखने की सलाह है.

रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी के लिए सिर्फ बड़ा निवेश कोष होना काफी नहीं है. जरूरी यह भी है कि पैसे को इस तरह रखा जाए कि हर महीने जरूरत के मुताबिक रकम मिलती रहे और निवेश पर बाजार के उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर न पड़े. म्यूचुअल फंड में इसके लिए सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान यानी SWP का इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक 59 साल के निवेशक के पास करीब ₹1.51 करोड़ का म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो है. वह रिटायरमेंट के बाद हर महीने करीब ₹16,000 निकालना चाहता है. विशेषज्ञ के मुताबिक इस रकम की निकासी मौजूदा पोर्टफोलियो के मुकाबले काफी कम है. ₹16,000 की मासिक निकासी सालाना ₹1.92 लाख बैठती है, जो कुल पोर्टफोलियो का करीब 1.27% है.
पोर्टफोलियो में ज्यादा फंड रखने से बचें
विशेषज्ञ ने पोर्टफोलियो में मौजूद कई म्यूचुअल फंड की समीक्षा करने और जरूरत के हिसाब से फंड की संख्या कम करने की सलाह दी है. किसी एक फंड या एक ही फंड हाउस में बहुत ज्यादा पैसा रखने से जोखिम बढ़ सकता है.
इस मामले में करीब 69% निवेश एक ही फंड हाउस से जुड़ा हुआ बताया गया. इसलिए अलग-अलग फंड हाउस और एसेट क्लास में निवेश फैलाने पर जोर दिया गया है.
मार्केट कैप के हिसाब से करीब 55% लार्ज कैप, 23% मिड कैप और 22% स्मॉल कैप का सुझाव दिया गया है. हालांकि रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके निवेशक को सिर्फ इस अनुपात को हासिल करने के लिए जोखिम वाले फंड में पैसा बढ़ाने से बचना चाहिए.
SWP के लिए तीन हिस्सों में बांटें पैसा
रिटायरमेंट के दौरान पूरे पोर्टफोलियो से सीधे पैसे निकालने के बजाय निवेश को तीन हिस्सों में बांटने की रणनीति सुझाई गई है.
पहला हिस्सा- तुरंत जरूरत का पैसा:
दो साल की SWP रकम को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले डेट फंड में रखा जा सकता है. ₹16,000 मासिक निकासी के हिसाब से दो साल के लिए करीब ₹3.84 लाख अलग रखे जा सकते हैं. इससे बाजार गिरने पर इक्विटी फंड बेचने की जरूरत कम होगी.
दूसरा हिस्सा- मध्यम अवधि का पैसा:
इस हिस्से में करीब 60-70% इक्विटी और 30-40% डेट का मिश्रण रखा जा सकता है. हर साल जरूरत के अनुसार यहां से पहले हिस्से में पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है.
तीसरा हिस्सा- लंबी अवधि का पैसा:
जिस रकम की कई साल तक जरूरत नहीं है, उसमें करीब 80% इक्विटी और 20% डेट रखने का सुझाव दिया गया है. इससे लंबे समय में पूंजी बढ़ाने की संभावना बनी रहती है, हालांकि बाजार जोखिम भी रहेगा.
गोल्ड और सिल्वर में कितना निवेश?
पोर्टफोलियो में गोल्ड को डायवर्सिफिकेशन के लिए शामिल किया जा सकता है. विशेषज्ञ ने लंबे समय के निवेशक के लिए करीब 10% तक गोल्ड रखने की बात कही है. वहीं सिल्वर को ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला बताते हुए इस पोर्टफोलियो में इससे बचने की सलाह दी गई है.
रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके निवेशक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हर महीने की जरूरत का पैसा सुरक्षित तरीके से उपलब्ध रहे और बाकी रकम को लंबे समय के लक्ष्य के अनुसार निवेश किया जाए. SWP की रकम तय करते समय महंगाई, बाजार रिटर्न, टैक्स और भविष्य के खर्चों को भी ध्यान में रखना चाहिए.