AI कंपनियों की कमाई में आएगी सुस्ती! 2 साल में 100% से घटकर 22% रह जाएगी ग्रोथ; जेफरीज के क्रिस वुड ने बताया अगला दांव
AI कंपनियों की कमाई में ग्रोथ धीमी होने और ऊंची वैल्यूएशन के बीच Jefferies के Chris Wood ने निवेश में विविधता लाने की सलाह दी है. जानें भारत समेत किन एशियाई बाजारों पर है उनका भरोसा.

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के बीच अब निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने की जरूरत महसूस हो रही है. Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी Chris Wood ने निवेशकों को AI शेयरों से आगे बढ़कर दूसरे सेक्टरों में भी निवेश के मौके तलाशने की सलाह दी है. उनकी यह सलाह ऐसे समय आई है, जब AI कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी होने का अनुमान है और इन शेयरों की वैल्यूएशन भी दूसरी कंपनियों के मुकाबले काफी ज्यादा है.
Jefferies की ताजा GREED & fear रिपोर्ट में ग्लोबल क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजी टीम ने भी कहा है कि अब AI से आगे निवेश में विविधता लाने का समय आ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों को केवल AI पर होने वाले भारी खर्च के बजाय कंपनियों की कमाई, कर्ज जुटाने की लागत और शेयरों की वैल्यूएशन पर भी ध्यान देना चाहिए.
AI कंपनियों की कमाई में धीमी होगी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर की AI कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी की दर 2026 में करीब 100 फीसदी रहने का अनुमान है. इसके बाद 2027 में यह घटकर 30 फीसदी और 2028 में 22 फीसदी रह सकती है यानी AI कंपनियों की कमाई बढ़ती रहेगी, लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी हो सकती है.
वहीं, AI सेक्टर को छोड़कर बाकी वैश्विक कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी 2026 में 16 फीसदी रहने का अनुमान है. 2027 और 2028 में यह घटकर 9 फीसदी रह सकती है. इससे संकेत मिलता है कि AI कंपनियों की कमाई में सुस्ती आने पर निवेशकों के लिए दूसरे सेक्टर भी आकर्षक हो सकते हैं.
AI शेयरों की वैल्यूएशन दूसरी कंपनियों से काफी ज्यादा
AI शेयरों को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह उनकी ऊंची वैल्यूएशन है. रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक AI शेयर अपने अनुमानित अगले 12 महीने के मुनाफे के करीब 23 गुना पर कारोबार कर रहे हैं. वहीं, AI सेक्टर को छोड़कर बाकी कंपनियों के शेयरों का यह अनुपात करीब 13 गुना है.
इसका मतलब है कि निवेशक AI कंपनियों के शेयरों के लिए दूसरी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा कीमत चुका रहे हैं. ऐसे में अगर कंपनियां कमाई के मामले में बाजार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती हैं, तो शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI में निवेश का दौर खत्म हो गया है. Jefferies की रिपोर्ट के मुताबिक, अब निवेशकों के लिए कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन के साथ-साथ कर्ज की उपलब्धता पर ध्यान देना भी जरूरी हो गया है.
Oracle और CoreWeave के कर्ज पर बढ़ा दबाव
AI सेक्टर में बढ़ते खर्च का असर अब क्रेडिट मार्केट में भी दिखाई देने लगा है. Jefferies ने निवेशकों को कंपनियों के क्रेडिट स्प्रेड पर नजर रखने की सलाह दी है. क्रेडिट स्प्रेड में बढ़ोतरी से कर्ज लेने वाली कंपनियों के जोखिम को लेकर बाजार की चिंता का संकेत मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, Oracle के पांच साल के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (CDS) स्प्रेड में 11 सितंबर के 186 बेसिस पॉइंट से बढ़कर 288 बेसिस पॉइंट तक पहुंच गया. वहीं, CoreWeave का CDS स्प्रेड 749 बेसिस पॉइंट से बढ़कर 1,118 बेसिस पॉइंट हो गया. ये दोनों स्तर AI पर भारी निवेश का मौजूदा दौर 2023 की शुरुआत में शुरू होने के बाद के सबसे ऊंचे स्तर हैं.
इसके अलावा, 2032 में मैच्योर होने वाले CoreWeave के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 14.8% हो गई है. यह AI से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए फंड जुटाने की बढ़ती लागत को दिखाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कर्ज देने वाले निवेशक AI पर होने वाले भारी खर्च को फंड करने से पीछे हटते हैं, तो इस सेक्टर की कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
सेमीकंडक्टर शेयरों में भी बढ़ा जोखिम
रिपोर्ट में बाजार की अगुवाई करने वाले सेक्टरों में बदलाव का भी जिक्र किया गया है. उभरते बाजारों में AI से जुड़े निवेश ने जून तक के एक साल में 81% रिटर्न दिया था, लेकिन 2026 की दूसरी छमाही में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई. इस दौरान AI से बाहर के कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया.
Chris Wood की एशिया निवेश रणनीति में सेमीकंडक्टर कंपनियों को जगह मिली हुई है. इसे AI इकोसिस्टम के ‘पिक्स एंड शोवेल्स’ यानी ऐसी कंपनियों के रूप में देखा जा सकता है, जो AI के लिए जरूरी चिप और दूसरे उपकरण उपलब्ध कराती हैं. हालांकि, उनका पोर्टफोलियो उन कंपनियों में निवेश नहीं करता, जो AI पर भारी पूंजीगत खर्च की दौड़ में बहुत ज्यादा पैसा लगा रही हैं.
TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix का MSCI AC Asia ex-Japan Index में कुल 32.1% हिस्सा है. इसके मुकाबले Chris Wood के Asia ex-Japan लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो में इन तीनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 16% है.
रिपोर्ट का कहना है कि सेमीकंडक्टर शेयरों में तेजी से कमाई के बड़े मौके पहले ही मिल चुके हैं. अब कंपनियों के उम्मीद के मुताबिक नतीजे आने के बावजूद उनके शेयरों में गिरावट देखी जा रही है. उदाहरण के लिए, 30 सितंबर को नतीजे घोषित करने के बाद Micron के शेयर 14% गिर चुके हैं. Samsung Electronics और SK Hynix के नतीजे अक्टूबर के आखिर में आने वाले हैं. इन नतीजों से AI शेयरों में निवेश की दिशा को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं.
भारत समेत इन एशियाई बाजारों पर Wood का भरोसा
AI को लेकर सतर्कता के बावजूद Chris Wood ने एशिया से दूरी नहीं बनाई है. उनकी निवेश रणनीति में भारत, चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम में बेंचमार्क के मुकाबले ज्यादा निवेश का सुझाव दिया गया है.
भारत को उनके सुझाए गए Asia-Pacific ex-Japan पोर्टफोलियो में 12% हिस्सेदारी दी गई है, जबकि बेंचमार्क में भारत का वजन 10.5% है. इसी तरह चीन को पोर्टफोलियो में 22% जगह मिली है, जबकि बेंचमार्क में उसका वजन 19.5% है. हांगकांग की हिस्सेदारी 6% है, जबकि बेंचमार्क में यह 3.1% है. वियतनाम को पोर्टफोलियो में 2% जगह दी गई है, जबकि संबंधित बेंचमार्क में फिलहाल उसका कोई वजन नहीं है.
दूसरी ओर, ताइवान में निवेश बेंचमार्क के मुकाबले कम रखने का सुझाव दिया गया है. पोर्टफोलियो में ताइवान की हिस्सेदारी 25% है, जबकि बेंचमार्क में यह 28.6% है. दक्षिण कोरिया में भी पोर्टफोलियो की हिस्सेदारी 19% है, जबकि बेंचमार्क में इसका वजन 21.1% है. हालांकि, हाल में बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बाद रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया को लेकर पहले की अंडरवेट रणनीति को न्यूट्रल कर दिया गया है.
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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.