शेयर बाजार की गिरावट में पैसा निकालना पड़ेगा भारी, Midcap-Smallcap निवेशक न करें ये गलती

पिछले एक महीने में Nifty Midcap 150 में 10.13% और Nifty Smallcap 250 में 10.60% की गिरावट आई है. जानें निवेशकों को कब शेयर बेचने चाहिए और SIP जारी रखने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट Image Credit: Canva

शेयर बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले एक महीने में Nifty Midcap 150 में 10.13 फीसदी और Nifty Smallcap 250 में 10.60 फीसदी की गिरावट आई है. इसके मुकाबले Nifty 50 में 4.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. इस गिरावट का असर म्यूचुअल फंड निवेशकों पर भी पड़ा है. पिछले एक महीने में मिडकैप फंड कैटेगरी में औसतन 7.86 फीसदी और स्मॉलकैप फंड कैटेगरी में 7.59 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं, लार्जकैप फंड में तुलनात्मक रूप से कम 3.71 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

बाजार में इस कमजोरी के पीछे कंपनियों की कमाई को लेकर चिंता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें जैसे कारण हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 में भारतीय शेयरों से 3.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है. यह पिछले साल पूरे साल के दौरान हुई निकासी का करीब दोगुना है. भारतीय शेयर बाजार में उनकी हिस्सेदारी भी 17 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है.

ऐसे माहौल में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों या फंड में निवेश करने वालों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे नुकसान को समझते हुए सही फैसला कैसे लें. शेयरों में तेज गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि हर निवेश को तुरंत बेच देना चाहिए. लेकिन सिर्फ अपना शुरुआती पैसा वापस पाने की उम्मीद में निवेश बनाए रखना भी सही रणनीति नहीं है.

पोर्टफोलियो में नुकसान देखकर तुरंत न बेचें निवेश

निवेशकों को कोई भी फैसला लेने से पहले यह समझना चाहिए कि उनके निवेश में गिरावट क्यों आ रही है. बाजार में बड़े स्तर पर गिरावट का मतलब यह जरूरी नहीं है कि कोई शेयर या म्यूचुअल फंड खराब निवेश बन गया है. अगर किसी निवेशक ने सीधे शेयर खरीदे हैं, तो उसे कंपनी की कमाई, कारोबार की संभावनाओं और शेयर की वैल्यूएशन की समीक्षा करनी चाहिए. साथ ही, यह भी देखना चाहिए कि जिस वजह से उसने शेयर खरीदा था, क्या वह वजह अब भी बनी हुई है.

म्यूचुअल फंड निवेशकों को अपने फंड के प्रदर्शन की तुलना उसके बेंचमार्क और समान कैटेगरी के दूसरे फंड से करनी चाहिए. इसके अलावा फंड की निवेश रणनीति और उसके पोर्टफोलियो में शामिल शेयरों की गुणवत्ता को भी समझना जरूरी है. अगर कोई फंड पूरे बाजार की गिरावट के साथ नीचे आया है, तो उसका आकलन उस फंड से अलग तरीके से किया जाना चाहिए जो लगातार अपने बेंचमार्क से कमजोर प्रदर्शन कर रहा है.

निवेशकों को सिर्फ इसलिए भी निवेश बनाए रखने से बचना चाहिए कि वे अपना शुरुआती पैसा वापस पाना चाहते हैं. लंबी अवधि के लिए निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि हर शेयर या फंड को हमेशा बनाए रखा जाए.

क्या निवेशकों को SIP जारी रखनी चाहिए?

बाजार में गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों को अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तुरंत बंद कर देनी चाहिए. जिन निवेशकों का निवेश का नजरिया लंबी अवधि का है और जिन्होंने अपनी जरूरतों के हिसाब से सही फंड चुना है, वे उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता होने पर SIP जारी रख सकते हैं.

हालांकि, जिन लोगों को अगले कुछ सालों में अपने निवेश की रकम की जरूरत है, उन्हें अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए. मिडकैप और स्मॉलकैप निवेश में काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है. ऐसे में अगर किसी वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए कम समय बचा है, तो तेज गिरावट से उबरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सकता.

निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि उनके कुल पोर्टफोलियो में मिडकैप और स्मॉलकैप निवेश का हिस्सा जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है. अगर किसी निवेशक ने अपनी जोखिम उठाने की क्षमता से ज्यादा जोखिम ले रखा है, तो उसे अपने निवेश के बंटवारे की समीक्षा करने की जरूरत हो सकती है.

किन हालात में निवेश बेचने पर विचार करें?

अगर किसी कंपनी के कारोबार की संभावनाएं कमजोर हो गई हैं, उसकी कमाई लगातार उम्मीद से खराब आ रही है या शेयर खरीदने की मूल वजह अब लागू नहीं होती, तो निवेश बेचने पर विचार किया जा सकता है. म्यूचुअल फंड के मामले में भी लगातार बेंचमार्क से कमजोर प्रदर्शन, निवेश रणनीति में बदलाव या निवेशक के वित्तीय लक्ष्यों से फंड का मेल न खाना समीक्षा की वजह बन सकता है.

हालांकि, फंड बदलने या निवेश बेचने से पहले टैक्स और एग्जिट लोड के असर को समझना भी जरूरी है. जल्दबाजी में फैसला लेने से अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है. हालांकि, सिर्फ इसलिए कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गिरावट आई है, निवेशकों को अपना पूरा पोर्टफोलियो लार्जकैप शेयरों में नहीं बदल देना चाहिए. निवेश से जुड़ा फैसला वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और पूरे पोर्टफोलियो में निवेश के बंटवारे को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए.

घबराहट में निवेश बेचना पड़ सकता है भारी

बाजार में गिरावट के दौरान सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि निवेशक बिना यह समझे कि उन्होंने निवेश क्यों किया था, घबराहट में अपना पूरा निवेश बेच दें. गिरावट आने पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ नुकसान देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना सही नहीं है. निवेशकों को कंपनी या फंड के प्रदर्शन, अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति बनानी चाहिए.

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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.