गिरावट के दौर में कहां होगी असली कमाई? लार्ज, मिड या स्मॉलकैप, किसमें मिलेगा फायदा?
2026 में सितंबर तक स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये का नेट निवेश आया. इसके बावजूद लार्जकैप शेयर मिडकैप के मुकाबले 30 फीसदी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं. स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई में तेज ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन सभी शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा. ऐसे में अगले मल्टीबैगर की तलाश में वैल्यूएशन और कंपनी की कमाई अहम हैं.

Smallcap vs Largecap: शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न की तलाश में निवेशक स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों पर बड़ा दांव लगा रहे हैं. 2026 में सितंबर तक स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये का नेट निवेश आया है. लेकिन दूसरी तरफ, लार्जकैप शेयरों का वैल्यूएशन अब तुलनात्मक रूप से आकर्षक नजर आ रहा है. ऐसे में सवाल है कि आने वाले समय में निवेश के बेहतर मौके कहां मिल सकते हैं और अगले मल्टीबैगर शेयरों की तलाश किस सेगमेंट में करनी चाहिए.
सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, मिडकैप फंडों में 51,295 करोड़ रुपये और स्मॉलकैप फंडों में 55,300 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया यानी दोनों सेगमेंट में कुल करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ. इसके मुकाबले लार्जकैप फंडों में इसी अवधि के दौरान 11,690 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया. इससे पता चलता है कि निवेशकों का रुझान अभी छोटी और मध्यम कंपनियों की ओर ज्यादा है. हालांकि, फंडों में पैसा आने का मतलब यह नहीं है कि आगे भी इन शेयरों से उतना ही रिटर्न मिलेगा.
Largecap शेयर 30% डिस्काउंट पर
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में वैल्यूएशन का गणित अब लार्जकैप शेयरों के पक्ष में जाता दिख रहा है. लार्जकैप शेयर फिलहाल मिडकैप के मुकाबले 30 फीसदी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि पिछले 10 साल में यह औसत डिस्काउंट 20 फीसदी रहा है. इसका मतलब है कि ऐतिहासिक औसत के मुकाबले दोनों सेगमेंट के वैल्यूएशन में अंतर बढ़ गया है.
लार्जकैप कंपनियों के पक्ष में एक और बात यह है कि आने वाले वित्त वर्षों में उनकी कमाई की ग्रोथ और मिडकैप कंपनियों की कमाई की ग्रोथ के बीच का अंतर घटने की उम्मीद है. ऐसे में जिन निवेशकों को मजबूत कंपनियों, बेहतर लिक्विडिटी और तुलनात्मक रूप से कम जोखिम वाले विकल्पों की तलाश है, उनके लिए लार्जकैप शेयरों पर नजर रखना अहम हो सकता है.
Nifty 50 का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल करीब 17 गुना है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बाजार में कमाई की ग्रोथ का अनुमान करीब 16% है. वहीं, इसका PEG रेशियो करीब 1 के आकर्षक स्तर की ओर बढ़ रहा है. ये आंकड़े संकेत देते हैं कि बाजार में कुछ बड़े शेयरों का वैल्यूएशन कमाई की संभावित ग्रोथ के मुकाबले आकर्षक हो सकता है.
Smallcap में कमाई की ग्रोथ ज्यादा, लेकिन शेयर चुनना जरूरी
लार्जकैप के मुकाबले स्मॉलकैप में निवेश के मौके भी खत्म नहीं हुए हैं. Carnelian Capital के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 से 2027-28 के दौरान स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई सालाना 26.6% की दर से बढ़ सकती है. इसके मुकाबले लार्जकैप कंपनियों के लिए यह अनुमान 18.7% है यानी छोटी कंपनियों के लिए कमाई बढ़ने की संभावना ज्यादा है, लेकिन इस ग्रोथ को हासिल करना कंपनियों के कारोबार और प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.
अप्रैल 2023 से स्मॉलकैप शेयरों के मार्केट वैल्यू में 2.3 गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी अवधि में लार्जकैप का मार्केट वैल्यू 1.4 गुना बढ़ा. इतनी तेजी के बाद स्मॉलकैप के कुछ शेयर महंगे भी हो चुके हैं. इसलिए केवल इस आधार पर शेयर चुनना सही नहीं होगा कि वह स्मॉलकैप या मिडकैप कैटेगरी में आता है. बीते वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि स्मॉलकैप सेगमेंट में सभी कंपनियों ने एक जैसा प्रदर्शन नहीं किया. मई 2022 से सितंबर 2026 के बीच Nifty MidSmallcap 400 इंडेक्स ने 99% रिटर्न दिया, जबकि Nifty 100 का रिटर्न 35% रहा.
लेकिन इस अतिरिक्त रिटर्न का बड़ा हिस्सा सिर्फ 16 कंपनियों से आया, जिनके शेयरों में 1000% से ज्यादा तेजी आई थी. ये कंपनियां स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के कुल समूह का करीब 4% थीं. इससे साफ है कि पूरे सेगमेंट में निवेश करने और मजबूत कंपनियों की पहचान करने के नतीजे अलग हो सकते हैं. कंपनी की कमाई, कारोबार की गुणवत्ता, बैलेंस शीट, कॉरपोरेट गवर्नेंस और शेयर का वैल्यूएशन देखना जरूरी है.
कहां मिल सकते हैं अगले मल्टीबैगर?
आने वाले समय में लार्जकैप और स्मॉलकैप, दोनों सेगमेंट में अवसर हो सकते हैं, लेकिन उनकी वजह अलग-अलग है. लार्जकैप में तुलनात्मक रूप से आकर्षक वैल्यूएशन, बेहतर लिक्विडिटी और कमाई में संभावित सुधार निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं. वहीं, स्मॉलकैप में घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल्स और बढ़ते डिस्क्रिशनरी खर्च से फायदा उठाने वाली कंपनियों में ग्रोथ की गुंजाइश बनी हुई है.
हालांकि, स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में 1.07 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने के बावजूद सिर्फ निवेश के रुझान के आधार पर अगला मल्टीबैगर चुनना सही रणनीति नहीं होगी. निवेशकों के लिए असली चुनौती ऐसी कंपनियों की पहचान करना है जिनकी कमाई लंबे समय तक बढ़ सकती है और जिनके शेयर का मौजूदा वैल्यूएशन इस ग्रोथ को देखते हुए उचित हो.
कुल मिलाकर, लार्जकैप में वैल्यूएशन का फायदा दिख रहा है, जबकि स्मॉलकैप में कमाई की तेज ग्रोथ की संभावना बनी हुई है. अगले मल्टीबैगर किसी एक सेगमेंट तक सीमित नहीं हैं. बेहतर मौका उन कंपनियों में हो सकता है जो मजबूत कारोबार के साथ अपनी कमाई को लगातार बढ़ाने में सफल रहती हैं.
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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.