76% तक गिरा स्मॉलकैप इंडेक्स! 20 साल के आंकड़ों से समझें कितना है जोखिम; रिकवरी में लगे 7 साल से ज्यादा

स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट आना असामान्य नहीं है. जनवरी 2004 से सितंबर 2026 के बीच Nifty Smallcap 100 अपने पिछले उच्च स्तर से 30% से ज्यादा नीचे 36% कारोबारी दिनों में रहा. साल 2008 में इंडेक्स 76% तक गिरा था और पुराने उच्च स्तर पर लौटने में सात साल से ज्यादा लगे थे.

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शेयर बाजार में निवेश करने वालों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि स्मॉलकैप शेयरों में 10 फीसदी या 20 फीसदी की गिरावट आने पर निवेश बनाए रखना चाहिए या पैसा निकाल लेना चाहिए. खासकर जब बाजार में तेज उतार-चढ़ाव हो, तब छोटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है. हालांकि, पिछले करीब 22 साल के आंकड़े बताते हैं कि स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट आना कोई असामान्य बात नहीं है. कई बार इन शेयरों को अपने पुराने उच्च स्तर पर लौटने में कई साल भी लग जाते हैं.

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2004 से सितंबर 2026 के बीच Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 36% कारोबारी दिनों में अपने पिछले सबसे ऊंचे स्तर से 30% या उससे ज्यादा नीचे रहा यानी इस दौरान कई बार ऐसा हुआ, जब स्मॉलकैप इंडेक्स अपने पुराने उच्च स्तर के मुकाबले काफी नीचे बना रहा. इसकी तुलना में Nifty Midcap 100 में ऐसा 10% कारोबारी दिनों में हुआ, जबकि Sensex में यह आंकड़ा सिर्फ 4% रहा. इससे पता चलता है कि बड़े शेयरों के मुकाबले स्मॉलकैप शेयरों में गहरी गिरावट का जोखिम ज्यादा रहा है.

कितनी बार 10% और 20% से ज्यादा गिरा स्मॉलकैप इंडेक्स?

स्मॉलकैप शेयरों में केवल बड़ी गिरावट ही नहीं, बल्कि 10 फीसदी तक का करेक्शन भी आम रहा है. जनवरी 2004 से सितंबर 2026 के बीच Nifty Smallcap 100 अपने पिछले उच्च स्तर से 10% से ज्यादा नीचे 63% कारोबारी दिनों में रहा. वहीं, Nifty Midcap 100 के लिए यह आंकड़ा 47% और Sensex के लिए 33% था.

अगर गिरावट 20% से ज्यादा होने की बात करें, तो Nifty Smallcap 100 अपने पिछले उच्च स्तर से 20% से ज्यादा नीचे 45% कारोबारी दिनों में रहा. Nifty Midcap 100 में ऐसा 28% और Sensex में 11% कारोबारी दिनों में हुआ.

यहां एक बात समझना जरूरी है. ये आंकड़े यह नहीं बताते कि बाजार में कितनी बार अलग-अलग क्रैश आए. इनसे पता चलता है कि कुल कारोबारी दिनों में कोई इंडेक्स अपने पिछले उच्च स्तर से कितनी बार नीचे रहा. एक बड़ी गिरावट के बाद इंडेक्स लंबे समय तक अपने पुराने स्तर से नीचे रह सकता है.

2008 में 76% तक गिरा था स्मॉलकैप इंडेक्स

स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट कितनी गहरी हो सकती है, इसका अंदाजा अलग-अलग साल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2004 से 2025 के बीच 22 में से 21 साल ऐसे रहे, जब Nifty Smallcap 100 में साल के दौरान कम से कम 10% की गिरावट आई.

कुछ साल में गिरावट काफी ज्यादा रही. साल 2008 में इस इंडेक्स की साल के दौरान सबसे बड़ी गिरावट 76% रही. इसके बाद 2020 में 47% और 2018 में 40% की गिरावट दर्ज की गई. साल 2022 में इंडेक्स 33% और 2025 में 23% तक गिरा.

हालांकि, साल के दौरान बड़ी गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि उस साल इंडेक्स का सालाना रिटर्न भी निगेटिव रहा हो. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन सालों का एनालिसिस किया गया, उनमें से करीब दो-तिहाई साल में इंडेक्स ने सकारात्मक कैलेंडर ईयर रिटर्न दिया.

पुराने स्तर पर लौटने में लगे सात साल से ज्यादा

स्मॉलकैप निवेशकों के लिए चिंता की बात केवल शेयरों में गिरावट नहीं, बल्कि उससे उबरने में लगने वाला समय भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2008 के उच्च स्तर के बाद Nifty Smallcap 100 मार्च 2009 तक करीब 76% गिर गया था. इसके बाद इंडेक्स को अपना पुराना उच्च स्तर हासिल करने में जुलाई 2016 तक का समय लगा यानी गिरावट के सबसे निचले स्तर से पुराने उच्च स्तर तक लौटने में सात साल से ज्यादा लग गए.

इसी तरह, जनवरी 2018 में शुरू हुई गिरावट मार्च 2020 तक बढ़कर 65% हो गई. इसके बाद इंडेक्स जून 2021 में अपने पिछले उच्च स्तर पर वापस पहुंचा. ये उदाहरण बताते हैं कि स्मॉलकैप निवेश में लंबे समय तक पैसा लगाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण है. हालांकि, लंबी अवधि के लिए निवेश करने से यह गारंटी नहीं मिलती कि निवेश किसी तय समय में अपने पुराने स्तर पर लौट ही आएगा.

स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े बाजार के इंडेक्स पर आधारित हैं, किसी खास म्यूचुअल फंड स्कीम पर नहीं. अलग-अलग स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन उनके पोर्टफोलियो और निवेश रणनीति के आधार पर अलग हो सकता है. इसलिए इंडेक्स में आई गिरावट को किसी खास फंड के रिटर्न के बराबर नहीं मानना चाहिए.

निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि अगर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो क्या निवेशक बिना जल्दबाजी में पैसा निकाले उसे बनाए रख सकता है. जिन लोगों को निकट भविष्य में अपने वित्तीय लक्ष्यों के लिए पैसों की जरूरत है, उन्हें जोखिम पर खास ध्यान देना चाहिए.

स्मॉलकैप शेयर लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने की संभावना रखते हैं, लेकिन इनमें निवेश का सफर उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है. बड़ी गिरावट और उससे उबरने में लगने वाला लंबा समय, दोनों को ध्यान में रखकर ही अपने पोर्टफोलियो में स्मॉलकैप निवेश की हिस्सेदारी तय करनी चाहिए.

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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.