Vedanta Group के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट, 5 फीसदी तक टूटा स्टॉक; जानें क्या है वजह
Vedanta Group की कंपनियों के शेयरों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली. Sterlite Technologies में लगातार दूसरे दिन 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा, जबकि Vedanta, Vedanta Power और Vedanta Iron & Steel के शेयर भी दबाव में रहे. ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में कमजोरी, प्रॉफिट बुकिंग और ब्रॉड मार्केट में रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट को गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है.

Anil Agarwal के नेतृत्व वाले Vedanta Group की कंपनियों के शेयरों में बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली. इंट्राडे कारोबार के दौरान Group की कुछ कंपनियों के शेयर 5 फीसदी तक टूट गए. Sterlite Technologies में लगातार दूसरे दिन 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा. वहीं, Vedanta का शेयर NSE पर करीब 0.7 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था. Vedanta Power और Vedanta Iron & Steel के शेयरों में भी 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. Vedanta Oil & Gas का शेयर भी मामूली कमजोरी के साथ 0.2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था.
इसके उलट, Hindustan Zinc और Vedanta Aluminium Metal के शेयर बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे और दोनों में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई. यानी Vedanta Group के सभी शेयरों में एक जैसी चाल देखने को नहीं मिली.
ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में कमजोरी का असर
Vedanta Group के शेयरों में 2-5 फीसदी की गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल कमोडिटीज में कमजोरी, प्रॉफिट बुकिंग और ब्रॉड मार्केट में रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट की वजह से आई. Vedanta का बिजनेस Aluminium, Zinc, Lead, Silver और Oil & Gas जैसी कमोडिटीज से जुड़ा है. इसलिए ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी की अर्निंग्स और वैल्यूएशन पर पड़ सकता है.
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के ऊपर
मार्केट सेंटीमेंट पर जियोपॉलिटिकल टेंशंस और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों का भी असर पड़ा है. Brent Crude 100 डॉलर प्रति Barrel से ऊपर बना हुआ है और करीब 107 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा था. महंगा Crude Oil Vedanta के Oil & Gas बिजनेस के लिए सपोर्टिव हो सकता है, लेकिन भारतीय इकोनॉमी के लिए इम्पोर्टेड इंफ्लेशन और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है.
US बॉन्ड यील्ड भी बना दबाव
ग्लोबल मार्केट में US 10-Year Treasury Yield के 5 फीसदी से ऊपर जाने से इन्वेस्टर्स के लिए फिक्स्ड-इनकम एसेट्स ज्यादा आकर्षक हुए हैं. ऐसे माहौल में इमर्जिंग मार्केट इक्विटीज में निवेश को लेकर रिस्क एपेटाइट कम हो सकती है. इसका असर खास तौर पर साइक्लिकल और हाई-बीटा स्टॉक्स पर ज्यादा देखने को मिल सकता है.
रुपये की कमजोरी और फॉरेन इन्वेस्टर्स की बिकवाली
रुपये की कमजोरी भी मार्केट वोलैटिलिटी बढ़ाने वाले फैक्टर्स में शामिल रही. रुपया 95-96 प्रति डॉलर के आसपास बना हुआ था. इसके साथ फॉरेन इन्वेस्टर्स की ओर से लगातार रिस्क रिडक्शन ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाला. Vedanta Group के शेयरों में हाल में आई मजबूत तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग की संभावना भी बढ़ी.
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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.