Sensex-Nifty की अगली चाल क्या होगी? इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर
भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ. अब निवेशकों की नजर इस हफ्ते US Fed चेयर केविन वार्श के भाषण, US-Iran युद्ध और नए प्रतिबंधों, कच्चे तेल की कीमतों, FII-DII के निवेश और सोने के भाव पर रहेगी. इन फैक्टर के आधार पर Sensex और Nifty की आगे की दिशा तय हो सकती है.

Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता कई बड़े वैश्विक और घरेलू संकेतों के लिहाज से अहम रहने वाला है. सेंसेक्स और निफ्टी 50 शुक्रवार 21 अगस्त को लगभग सपाट बंद हुए, लेकिन लगातार दूसरे हफ्ते बाजार में गिरावट दर्ज की गई. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, US-Iran बातचीत में प्रगति नहीं होना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों का भरोसा कमजोर रहा.
शुक्रवार को सेंसेक्स सिर्फ 3 अंक बढ़कर 77540.83 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 20 अंक यानी 0.08 फीसदी की बढ़त रही और यह 24252 पर बंद हुआ. अब जून तिमाही के नतीजों का सीजन लगभग खत्म हो चुका है. ऐसे में बाजार की आगे की दिशा पर ग्लोबल इकोनॉमी, US Fed की नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.
कच्चा तेल, डॉलर और बॉन्ड यील्ड रहेंगे अहम
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर के बीच का संबंध अहम रहेगा. निवेशकों की नजर रुपये की चाल और संस्थागत निवेशकों के निवेश पर भी रहेगी. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि हालिया गिरावट के बाद घरेलू बाजार संभल पाता है या नहीं.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जून तिमाही के नतीजों का सीजन लगभग पूरा हो चुका है. ऐसे में आने वाले दिनों में ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेंड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
1. US Fed चेयर केविन वार्श का भाषण
इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर US Federal Reserve के चेयर केविन वार्श के भाषण पर रहेगी. वह 28 अगस्त 2026 को Wyoming में होने वाले Jackson Hole Economic Policy Symposium में अपना पहला मुख्य भाषण देने वाले हैं. बाजार उनके भाषण से यह संकेत तलाशेगा कि लगातार बनी महंगाई, ब्याज दरों की आगे की दिशा और अपेक्षाकृत कमजोर पड़ते लेबर मार्केट को लेकर यूएस फेड का रुख क्या है.
लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच वार्श के बयान को काफी अहम माना जा रहा है. खासकर सितंबर में होने वाली फेड की नीति बैठक से पहले बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक सुस्ती के जोखिम के बीच किस दिशा में आगे बढ़ सकता है.
2. US-Iran युद्ध और नए प्रतिबंधों का खतरा
US-Iran तनाव इस हफ्ते भी भारतीय बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना रह सकता है. ईरान ने शनिवार को अमेरिका की नई पाबंदियां लगाने की योजना की आलोचना की और कहा कि इससे उसकी अर्थव्यवस्था और चीन समेत उसके प्रमुख कारोबारी साझेदार प्रभावित हो सकते हैं. अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमले शुरू होने के करीब छह महीने बाद भी शांति को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं हैं. फिलहाल बड़े स्तर पर संघर्ष थमा हुआ है, लेकिन शांति वार्ता की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही है.
रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही लगभग रुक गई है. ईरान ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा सकता है. इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent सोमवार को भारतीय समय के अनुसार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी. ऐसे में नए प्रतिबंधों या तनाव बढ़ने की किसी भी खबर का सीधा असर तेल और शेयर बाजार पर पड़ सकता है.
3. कच्चे तेल की कीमत
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए बड़ी चिंता हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 61 सेंट यानी 0.65 फीसदी बढ़कर 94.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. वहीं, US West Texas Intermediate यानी WTI 23 सेंट यानी 0.26 फीसदी बढ़कर 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
पूरे हफ्ते ब्रेंट क्रूड में 6.39 फीसदी और WTI में 5.66 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. पिछले कारोबारी सत्र में दोनों बेंचमार्क 24 जुलाई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट की ओर से ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी के बाद तेल सप्लाई बाधित होने की चिंता बढ़ी है. अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर भारत की महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है.
4. FII और DII का निवेश
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी पर बाजार की नजर रहेगी. 21 अगस्त को FII ने भारतीय शेयरों में 542.71 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की. इससे पहले गुरुवार को FII ने 583.36 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की थी.
वहीं, DII लगातार खरीदार बने हुए हैं. 21 अगस्त को DII ने 2124.14 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की. हालांकि, पिछले सत्र में DII की नेट खरीदारी 3,537.71 करोड़ रुपये रही थी.
शुक्रवार को FII ने 12,560.91 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 13,103.62 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. दूसरी ओर, DII ने 15,258.71 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 13,134.57 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है तो बाजार पर दबाव आ सकता है. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है.
5. सोने की कीमत
सोने की कीमतों की चाल भी निवेशकों के लिए अहम संकेत हो सकती है. सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ने पर शेयर बाजार में जोखिम से बचने का रुझान भी दिखाई दे सकता है. गुरुवार को MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 264 रुपये यानी 0.17 फीसदी बढ़कर 1,58,260 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. इस दौरान कारोबार का वॉल्यूम 10,450 लॉट रहा.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यू यार्क में Comex पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 4546 डॉलर प्रति औंस के आसपास सपाट रहा. अमेरिकी डॉलर में तेज गिरावट के कारण सोने को समर्थन मिला.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी संवेदनशील हो सकता है. एक तरफ US Fed की फ्यूचर की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिलेंगे, तो दूसरी तरफ US-Iran तनाव और नए प्रतिबंधों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. कच्चा तेल महंगा होने, FII की बिकवाली बढ़ने और वैश्विक तनाव गहराने पर बाजार में दबाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर, अगर Fed से पॉजिटिव संकेत मिलते हैं, तेल की कीमतों में राहत आती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है.
इसे भी पढ़ें- बुढ़ापे में चाहिए मंथली पेंशन? तो याद रखिए EPFO का ये 10 साल वाला नियम
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.