धान की बुआई 3.71 फीसदी घटी, कर्नाटक और तेलंगाना में सबसे ज्यादा गिरावट; दालों का रकबा बढ़ा
खरीफ सीजन 2026 में धान की बुआई पिछले साल से 3.71 फीसदी कम रही है. 4 सितंबर तक धान का रकबा 421.82 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल 438.19 लाख हेक्टेयर था. कर्नाटक और तेलंगाना में बुआई घटने से कुल रकबा प्रभावित हुआ है. दूसरी ओर दालों की बुआई 117.13 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जो पिछले साल से ज्यादा है.

खरीफ सीजन 2026 में धान की बुआई पिछले साल के मुकाबले पीछे चल रही है. 4 सितंबर तक धान की बुआई 421.82 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 438.19 लाख हेक्टेयर था. यानी इस साल धान का रकबा 3.71 फीसदी कम है. कर्नाटक और तेलंगाना में बुआई कम होने का असर कुल आंकडे़ पर पड़ा है. हालांकि दालों की बुआई में सुधार देखने को मिला है और इसका रकबा पिछले साल से आगे निकल गया है.
धान की बुआई सबसे ज्यादा घटी
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक , धान की बुआई में सबसे बड़ी कमी कर्नाटक और तेलंगाना में देखने को मिली है. कर्नाटक में धान का रकबा 4.28 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. तेलंगाना में भी 3.61 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. आंध्र प्रदेश में 1.91 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 1.38 लाख हेक्टेयर की कमी रही. उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है.
कम हुई बुआई के बावजूद चिंता सीमित
तमिलनाडु में धान का रकबा 1.32 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. दूसरी ओर असम में 0.52 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 0.29 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में धान बोया गया है. धान की बुआई में पिछड़ापन पहले की तुलना में कम हुआ है. सिंचाई की बेहतर सुविधा और कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों के कारण किसानों को देरी से हुई बारिश के बावजूद बुआई में मदद मिली है.
सरकार के पास पर्याप्त चावल स्टॉक
धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है और इसकी कटाई अक्टूबर से शुरू होती है. केंद्र सरकार ने इस खरीफ सीजन में 708.64 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है. जानकारों का मानना है कि धान के रकबे में मामूली कमी फिलहाल बड़ी चिंता नहीं है. इसकी एक वजह सरकारी भंडार में चावल का पर्याप्त स्टॉक होना है. सरकार की खरीद व्यवस्था के कारण किसानों को भी धान की खेती के लिए भरोसा बना हुआ है.
दालों की बुआई पिछले साल से आगे निकली
दालों के मामले में तस्वीर बेहतर हुई है. 4 सितंबर तक दालों की बुआई 117.13 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी समय यह रकबा 115.30 लाख हेक्टेयर था. यानी इस साल दालों का रकबा 1.83 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. तूर का रकबा 44.93 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर हो गया है. उरद की बुआई भी 22.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गई है.
दालों की बुआई में उत्तर प्रदेश का बड़ा योगदान
दालों की बुआई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश में हुई है. यहां दालों का रकबा 3.97 लाख हेक्टेयर बढा है. झारखंड में 0.98 लाख हेक्टेयर और तेलंगाना में 0.90 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि मूंग की बुआई पिछले साल के मुकाबले कम रही है. भारत में दालों की घरेलू जरूरत का एक हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है. ऐसे में दालों का रकबा बढ़ना देश के लिए राहत की खबर है.
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दूसरी खरीफ फसलों का क्या हाल
तिलहन की बुआई इस साल थोड़ी कम हुई है. 4 सितंबर तक तिलहन का रकबा 191.99 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 193.06 लाख हेक्टेयर था. सोयाबीन का रकबा भी 121.82 लाख हेक्टेयर पर थोड़ा पीछे रहा. अनाज में ज्वार और बाजरा की बुआई मामूली बढ़ी है, जबकि मक्का का रकबा घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर रहा. कपास का रकबा 109.17 लाख हेक्टेयर पर लगभग स्थिर रहा है. कुल मिलाकर सभी खरीफ फसलों का रकबा 1086.31 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 1104 लाख हेक्टेयर से कम है.