अमेरिका ने ईरान पर हटाए तेल प्रतिबंध, $77 पर फिसला कच्चा तेल, भारत के लिए खुला सस्ते क्रूड का रास्ता
अमेरिका ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में 21 अगस्त 2026 तक अस्थायी ढील दे दी है. वाशिंगटन-तेहरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बीच लिए गए इस फैसले से भारत के लिए ईरानी कच्चे तेल का आयात फिर से संभव हो सकता है. फैसले के बाद वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 डॉलर से नीचे आ गई हैं.

Iran oil sanctions lifted: अमेरिका ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है. वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही एक व्यापक शांति वार्ता के बीच यह बड़ा फैसला लिया गया है, जिससे अब भारतीय रिफाइनरियों के लिए ईरानी कच्चे तेल के आयात का रास्ता एक बार फिर साफ हो सकता है. इस फैसले का सकारात्मक असर तेल बाजार पर भी हुआ जहां कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई.
21 अगस्त तक मिली खुली छूट
अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी एक जनरल लाइसेंस के अनुसार, ईरान के कच्चे तेल और उससे जुड़े पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, परिवहन और डिलीवरी पर लगे सभी प्रतिबंधों को 21 अगस्त 2026 (सुबह 12:01 बजे EDT) तक के लिए हटा दिया गया है.
यह ढील दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही सकारात्मक बातचीत का नतीजा है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया (X) पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस समझौते के तहत ईरान ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ से तेल टैंकरों की सुरक्षित और मुफ्त आवाजाही सुनिश्चित करने और अपनी परमाणु साइटों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अनुमति देने के लिए तैयार हो गया है. इसी के बदले अमेरिका ने यह 60 दिनों का अस्थाई लाइसेंस जारी किया है.
भारत को क्या होगा फायदा?
प्रतिबंध लगने से पहले भारत, ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक था. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रतिबंधों से पहले भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी. ऐसे में यह छूट भारत के लिए तेल आयात के विकल्पों को डाइवर्सिफाई करने का बड़ा मौका है.
यह भी पढ़ें: रूस से रिकॉर्ड तेल खरीद रहा भारत, जून में 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा आयात; UAE भी बना बड़ा सप्लायर
वैश्विक बाजार को मिलेगी राहत
वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) व्यापार के लिए ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ बेहद संवेदनशील रूट है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी वित्त विभाग के इस फैसले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में नरमी आने और सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम होने की उम्मीद है. ब्रेंट क्रूड जो 80 डॉलर के तरफ बढ़ रहा था इस फैसले के बाद यू-टर्न लेते हुए 77 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.
हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस अमेरिकी छूट का फायदा क्यूबा, उत्तर कोरिया और क्रीमिया से जुड़े लेनदेन को नहीं मिलेगा.