PM मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक, व्यापार, निवेश, ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर होगा फोकस

उम्मीद है कि इस बैठक में रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन Image Credit: PMO India X

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को भारत की तीन दिन की यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं. यहां वे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के मकसद से व्यापक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. दोपहर 3.30 बजे रूसी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बातचीत होनी है.

उम्मीद है कि इस बैठक में रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा.

100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने गुरुवार को रूस के साथ नॉन-एनर्जी ट्रेड को बढ़ाने और 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद करने के लिए फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, खाद्य उत्पाद, केमिकल और ऑटो प्रोडक्ट्स को अहम क्षेत्रों के तौर पर पहचाना.

BIT पर तेजी से काम

इंडिया-रूस बिजनेस डायलॉग में उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया-रूस प्रायोरिटी इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स मैकेनिज्म अब एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी, माइनिंग, रेलवे और उभरती टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में 40 चालू निवेश प्रोजेक्ट्स पर नजर रख रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि दोनों तरफ के निवेशकों को वह कानूनी भरोसा मिल सके जिसकी तलाश प्रोजेक्ट्स और बिजनेस को निवेश की जगह तय करते समय होती है..

गोयल ने यह भी कहा कि भारत और रूस लोकल करेंसी में पेमेंट सेटलमेंट के सिस्टम को मज़बूत करना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा, ‘जमीनी स्तर पर व्यापार की रफ्तार अक्सर टैरिफ के बजाय पेमेंट में आने वाली दिक्कतों की वजह से धीमी होती है.’

मजबूत बने रहे हैं भारत-रूस के रिश्ते

यह बताते हुए कि भारत-रूस के रिश्ते बदलती दुनिया के सात दशकों में भी मजबूत बने रहे हैं. गोयल ने कहा, ‘लेकिन हमारे नेताओं ने अब हमसे सिर्फ इसी सिलसिले को बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि इसे और तेज करने के लिए कहा है.’ गोयल ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने दो लक्ष्य तय किए हैं. पहला 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार और दूसरा 50 अरब डॉलर का दोनों तरफ से निवेश है.

डबल-डिजिट ग्रोथ की जरूरत

उन्होंने कहा, ’60 अरब डॉलर के बेस से 100 अरब डॉलर के लक्ष्य का मतलब है अगले चार वर्षों में 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी.’ उन्होंने आगे कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए साल-दर-साल डबल-डिजिट ग्रोथ की जरूरत होगी और दोनों तरफ से न सिर्फ सरकार से, बल्कि हमारे बिजनेस से भी बड़ी कोशिशों की जरूरत होगी.’

उन्होंने कंपनियों से अपने प्लान में नॉन-एनर्जी सेक्टर से जुड़ी नई चीजें शामिल करने को भी कहा, जिनमें फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल, ऑटो, फूड, एग्रीटेक, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं.

भारत में मैन्युफैक्चरिंग करें

गोयल ने रूस के इंडस्ट्री से जुड़े दोस्तों से कहा, ‘भारत में मैन्युफैक्चरिंग करें, सिर्फ भारत में बेचें नहीं.’ उन्होंने भारत के नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर इशारा किया. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय इंडस्ट्री से कहूंगा कि वे निवेशक और निर्यातक के तौर पर रूस जाएं.

मंत्री ने दोनों तरफ़ के अधिकारियों से यह भी कहा कि वे इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करें और व्यापार और निवेश में रुकावट डालने वाली समस्याओं की पहचान करें, जैसे कि पेमेंट सिस्टम, लॉजिस्टिक्स, सर्टिफिकेट की जरूरतें, मंजूरी, स्टैंडर्ड और वीजा.

एक-दूसरे के पूरक होने की संभावना

गोयल ने कहा कि मैं अपने रूसी दोस्तों को भरोसा दिलाता हूं कि हम मदद करने और इस पूरे सफर को आसान और रोमांचक बनाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता और तेजी से बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग बेस की पेशकश करता है.

गोयल ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार में एक-दूसरे के पूरक होने की संभावना है, लेकिन दोनों तरफ हमारा नॉन-एनर्जी व्यापार उतना नहीं है जितना होना चाहिए.

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