राज्यों के खाते में आएंगे ₹1.09 लाख करोड़! जानिए किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा
केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमित किस्त के अलावा ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी जारी की है. इस राशि से राज्यों को विकास परियोजनाओं, पूंजीगत खर्च और जनकल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलेंगे.

केंद्र सरकार ने राज्यों को वित्तीय मजबूती देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्रालय ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी (Tax Devolution) जारी करने का ऐलान किया है. सरकार का कहना है कि यह राशि राज्यों को पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) बढ़ाने, विकास परियोजनाओं को गति देने और लोगों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेगी.
राज्यों को मिलेगा विकास कार्यों में सहारा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी नियमित मासिक किस्त के अलावा जारी की गई है. केंद्र सरकार ने कहा कि राज्यों के पास पर्याप्त धन उपलब्ध रहेगा, जिससे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा सकेगा. इसके साथ ही राज्यों को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए भी वित्तीय सहायता मिलेगी.
क्यों जारी की गई अतिरिक्त राशि?
सरकार का कहना है कि कई राज्यों में विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक खर्च की जरूरत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी जारी करने का फैसला राज्यों की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इससे राज्यों को अपने बजट पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना जरूरी योजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त धन मिलने से राज्यों की नकदी स्थिति (Liquidity) बेहतर होगी और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश बढ़ेगा. इसका सकारात्मक असर रोजगार, स्थानीय कारोबार और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है.
क्या होती है टैक्स डिवोल्यूशन?
टैक्स डिवोल्यूशन यानी केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का तय हिस्सा राज्यों को देना. वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार राज्यों के बीच यह राशि तय फॉर्मूले के अनुसार बांटती है. इसका उद्देश्य राज्यों को उनकी विकास संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना होता है.
राज्यों को मिलने वाली यह राशि उनके लिए बिना शर्त (Untied Funds) होती है. यानी राज्य अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार इसका उपयोग विकास कार्यों, सामाजिक योजनाओं और अन्य सार्वजनिक खर्चों में कर सकते हैं.
अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों द्वारा पूंजीगत खर्च बढ़ाने से अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी. जब राज्य सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाते हैं, तो रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलता है.
सरकार का मानना है कि ₹1.09 लाख करोड़ की यह अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगी और विकास कार्यों को रफ्तार देगी. इससे आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा और देश की आर्थिक विकास दर को भी समर्थन मिलेगा.
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